PretikaUrban Legendsखरगोश का साया

खरगोश का साया

Pretika · Urban Legends · 16 मिनट

Writer
Pretika
Story
खरगोश का साया
Chapter
Single story
Category
Urban Legends
Reading time
16 min
Words
3144
Language
Hindi (हिंदी)
Price
Free to read

स्थान: Fairfax County, Virginia, अमेरिका

आधारित: Washington Post में दर्ज दो वास्तविक पुलिस केस — अक्टूबर 1970

❖ ❖ ❖

शहरी किंवदंतियाँ — urban legends — अक्सर ऐसी कहानियाँ होती हैं जिनकी जड़ कहीं न कहीं किसी सच्ची घटना में होती है। सालों, दशकों के बाद वो कहानी इतनी फैल जाती है, इतने रूप बदल लेती है, कि लोगों को असली घटना याद ही नहीं रहती। बस एक डर रह जाता है। एक नाम। एक जगह। और एक रात।

Virginia राज्य के Fairfax County इलाक़े में एक छोटा सा रेलवे पुल है। इसका असली नाम है Colchester Overpass। ये सन् 1906 में बना था। लेकिन पिछले पचास साल से, इस पुल को कोई इस नाम से नहीं जानता। आज इसे Google Maps तक पर एक ही नाम से दिखाया जाता है — Bunny Man Bridge। खरगोश आदमी का पुल।

ये कहानी, जो मैं आपको सुनाने जा रहा हूँ, उन सालों से शुरू नहीं होती जब लोग इस पुल से डरना शुरू हुए थे। ये कहानी अक्टूबर 1970 की उन दो रातों से शुरू होती है, जब Fairfax County पुलिस के दफ़्तर में दो अलग-अलग रिपोर्ट दर्ज हुई थीं। दोनों रिपोर्ट्स में एक बात सामान्य थी।

एक आदमी था। जो खरगोश की पोशाक पहने हुए था। और उसके हाथ में एक कुल्हाड़ी थी।

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एक — रॉबर्ट की रात

मेरा नाम Robert Bennett है। उम्र इक्कीस साल। उस वक़्त मैं US Air Force Academy का cadet था — कोलोराडो में पढ़ रहा था, अपनी छुट्टियों पर Virginia आया हुआ था। मेरी मँगेतर का नाम था Dorothy। हमारी शादी अगले साल वसंत में होने वाली थी।

बात है शनिवार रात की — 17 अक्टूबर 1970। हम दोनों मेरे चाचा के घर पर डिनर के लिए गए थे। उनका घर Guinea Road पर था, Burke इलाक़े में, Fairfax से क़रीब पंद्रह मिनट। डिनर के बाद, क़रीब साढ़े ग्यारह बजे, हम वापस निकले। ये अक्टूबर का महीना था — हवा में ठंडक थी, पेड़ों के पत्ते लाल और भूरे रंग में बदल चुके थे। चाँद आधा था, और हल्के बादलों के पीछे से झाँक रहा था।

मैं Dorothy को उसके घर छोड़ने जा रहा था। हम दोनों को घर पहुँचने की जल्दी नहीं थी। उनके माँ-बाप को मैंने पहले ही फ़ोन कर दिया था कि देर हो जाएगी। हम Guinea Road के 5400 ब्लॉक पर मेरी कार में बैठे — एक हल्की नीले रंग की Pontiac — और कुछ देर रुक गए। दोस्त लोग इसे "parking" कहते थे — रात को किसी सुनसान सड़क पर रुककर, बस बातें करना।

मैंने रेडियो धीरे से चलाया। कुछ पुराना गाना आ रहा था — Frank Sinatra का। Dorothy ने मेरी जैकेट के कॉलर से खेलते हुए कहा कि वो शादी की list में और एक चीज़ जोड़ना चाहती है। मैंने हँस के कहा कि list इतनी लंबी हो चुकी है, अब तो मेरी जेब फटने वाली है। हम दोनों हँस रहे थे।

तभी मेरी नज़र — रियर-व्यू मिरर में — कुछ पर पड़ी।

कार के पीछे, सड़क के बाएँ किनारे पर, एक आकृति खड़ी थी। मैंने पहले सोचा कोई पेड़ है। फिर मैंने ध्यान से देखा। वो हिल रहा था। थोड़ा-थोड़ा। हवा में नहीं, अपनी मर्ज़ी से।

"Robert," Dorothy ने मेरी अचानक खामोशी देखकर पूछा, "क्या हुआ?"

मैंने कहा, "पीछे कोई है। शायद कोई पैदल चल रहा है।"

मैंने आख़िरी कार के पीछे की रोशनी जलाने के लिए मुड़कर देखा। और जो मैंने देखा — मेरी ज़िंदगी में मैंने वैसा कभी कुछ नहीं देखा।

एक आदमी था। पाँच फ़ुट आठ इंच के क़रीब लंबा। पतला सा शरीर। उसने एक सफ़ेद रंग की पोशाक पहनी हुई थी — पूरी पोशाक। पैरों से लेकर सिर तक एक ही कपड़ा। जैसे रात को बच्चे Halloween पर पहनते हैं। और उसके सिर पर — दो लंबे कान। खड़े हुए। खरगोश के कान।

"तुम लोग यहाँ क्या कर रहे हो?" उसने ज़ोर से चिल्लाकर कहा। उसकी आवाज़ अजीब थी — मानो किसी मुखौटे के पीछे से आ रही हो। तेज़ और गुस्से से भरी।

मैंने Dorothy की तरफ़ देखा। वो बोली, "Robert, गाड़ी चलाओ।"

लेकिन मेरी नज़र उस आदमी पर अटक गई थी। उसके दाहिने हाथ में कुछ था। एक लंबा सा हत्था। मैंने अंधेरे में पहचान नहीं पाया।

"तुम लोग private property पर हो," वो चिल्लाया। "तुम्हारी licence plate का number मेरे पास है। मैं अभी पुलिस को बुला रहा हूँ।"

और फिर — उसने अपना हाथ पीछे खींचा।

Dorothy ने एक चीख़ निकाली। मेरी कार के दाहिने तरफ़ की खिड़की पर — Dorothy के बिल्कुल पास — एक कुल्हाड़ी आकर लगी। काँच कड़ाक से चटक गया। कुल्हाड़ी का सिरा शीशे को तोड़कर अंदर तक धँस गया था। उसका लकड़ी का हत्था बाहर लटक रहा था।

मैंने accelerator दबाया। टायर rubber की चीख़ के साथ ज़मीन पर घूमे। हम वहाँ से निकले। मैंने पीछे मुड़कर एक बार देखा। उस आदमी ने अपने दोनों हाथ हवा में उठा रखे थे। और वो खड़ा था — बीच सड़क पर। हमें जाते हुए देखता हुआ। उसने मुँह खोला। मुझे उसके मुँह से कुछ निकलता हुआ दिखा।

लेकिन ये कोई आवाज़ नहीं थी।

ये हँसी थी।

❖ ❖ ❖

दो — अख़बार में

हम सीधा पुलिस स्टेशन गए। Fairfax County police के दो officers हमारी कार के पास आए। उन्होंने काँच में फँसी हुई कुल्हाड़ी को देखा। एक officer ने कुल्हाड़ी निकालने में पाँच मिनट लगाए — वो इतनी गहरी धँसी हुई थी।

मैंने उन्हें पूरी कहानी बताई। एक officer मेरी आँखों में देख रहा था। दूसरा अपनी notebook में लिख रहा था। जब मैंने "खरगोश की पोशाक" वाली बात कही, दोनों ने एक-दूसरे को देखा।

पहले वाले officer ने कहा, "Mr. Bennett, क्या आप शराब पी रहे थे आज रात?"

मैंने कहा, "नहीं, सर। मैं Air Force का cadet हूँ। मेरी मँगेतर भी मेरे साथ थी। उसकी गवाही ले लीजिए।"

Dorothy ने हर बात की पुष्टि की।

officer ने कहा, "ठीक है। हम report दर्ज कर रहे हैं। हम कुल्हाड़ी को evidence में रख रहे हैं।"

उस वक़्त मुझे लगा कि बात यहीं ख़त्म होगी। शायद वो आदमी कोई पागल हो जो उस इलाक़े में घूम रहा है। कुछ दिनों में पुलिस उसे पकड़ लेगी।

लेकिन अगले मंगलवार के अख़बार में — Washington Post — एक छोटी सी खबर छपी। Headline थी: "Man in Bunny Suit Sought in Fairfax"। ("फ़ेयरफ़ैक्स में खरगोश की पोशाक वाले आदमी की तलाश"।) उस खबर में मेरी और Dorothy की कहानी थी। पुलिस इस आदमी को ढूँढ रही थी। पुलिस के पास कोई सुराग़ नहीं था।

मुझे लगा कि बस — अब वो पकड़ा जाएगा।

लेकिन वो पकड़ा नहीं गया।

और दो हफ़्ते बाद — वो वापस आया।

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तीन — पॉल का घर

मेरा नाम Paul Phillips है। उस वक़्त मैं अड़तालीस साल का था। एक construction कंपनी में security guard की नौकरी थी। उस इलाक़े में, जिसे वो लोग Kings Park West कहते थे, एक नया housing development बन रहा था। एक दर्जन नए घर। आधे बने हुए, आधे अधूरे। मेरा काम था रात को उन अधूरे घरों की रखवाली करना। चोर अक्सर tools चुरा लेते थे, या तांबे की तारें ले जाते थे।

बात है 31 अक्टूबर 1970 की — Halloween की रात।

उस रात पूरे इलाक़े में बच्चे पोशाकें पहनकर घूम रहे थे। Trick-or-treat। मैंने अपने थर्मस में coffee भरी, अपनी टॉर्च और एक लाठी ली, और Guinea Road पर अधूरे घर के सामने अपनी कुर्सी डाल कर बैठ गया। साढ़े दस बजे थे। हवा ठंडी थी।

मेरी कुर्सी एक खाली घर के बरामदे पर थी — अधूरा घर जिसकी छत आधी पड़ी थी और दीवारों पर अभी plaster नहीं हुआ था। बरामदे की लकड़ी की एक मोटी खंभा था जो मेरी बाईं तरफ़ था।

ग्यारह बजे के क़रीब, मुझे पीछे से कुछ हलचल लगी। मैंने टॉर्च मारी। कुछ नहीं। लोमड़ी होगी, मैंने सोचा। उस इलाक़े में लोमड़ियाँ बहुत थीं।

पंद्रह मिनट बाद, मैंने एक आवाज़ सुनी। कोई बरामदे की सीढ़ियाँ चढ़ रहा था। धीरे-धीरे। एक-एक क़दम।

मैंने अपनी कुर्सी से उठकर देखा।

एक आदमी खड़ा था। मेरे ठीक सामने। पाँच फ़ुट आठ इंच, क़रीब। वज़न शायद 175 पाउंड। उसकी पूरी पोशाक खरगोश की थी — सलेटी, काले और सफ़ेद रंग की। उसके सिर पर खरगोश के कान थे। उसका चेहरा एक खरगोश के मुखौटे से ढका हुआ था — सिर्फ़ आँखों के लिए दो छोटे छेद।

"क्या तुम यहाँ रहते हो?" मैंने पूछा। मेरी आवाज़ शांत थी। आख़िर मैं security guard था। मेरे पास लाठी थी। और मेरी car में एक handgun थी।

उसने जवाब नहीं दिया।

मैंने अपना हाथ उठाया कि उससे पहचान पूछूँ। तभी मैंने देखा। उसके दाहिने हाथ में एक कुल्हाड़ी थी। एक लंबे हत्थे वाली कुल्हाड़ी। बढ़ई की कुल्हाड़ी। उसका धार चमक रहा था टॉर्च की रोशनी में।

"मैं तुमसे बात कर रहा हूँ," मैंने कहा। "पहचान दो।"

उसने मुँह खोला। उसकी आवाज़ धीमी, ठंडी थी।

"तुम सब लोग trespass करते हो।"

और फिर उसने कुल्हाड़ी उठाई।

मेरे ठीक बगल में जो लकड़ी का खंभा था — बरामदे का खंभा — उसने उस पर कुल्हाड़ी मारी। ज़ोर से। एक बार। दो बार। तीन बार। उस खंभे में आठ गहरे ज़ख़्म पड़ गए। लकड़ी के टुकड़े उड़कर मेरी कमीज़ पर गिरे।

"तुम trespass कर रहे हो," वो दोहराया। उसकी आवाज़ अब और तेज़ थी। "अगर तुम एक क़दम और आगे बढ़े, तो मैं तुम्हारा सिर काट दूँगा।"

मैं पीछे हटा। धीरे-धीरे। कुर्सी से अपनी टॉर्च उठाई। एक हाथ से उसकी तरफ़ टॉर्च मारता रहा, दूसरे हाथ से अपने जेब की तरफ़ बढ़ा। मेरे पास car की चाबी थी।

"मैं अपनी कार से अपना ID निकालता हूँ," मैंने धीरे से कहा। "मैं security guard हूँ। मैं कोई trespasser नहीं।"

"तुम सब trespass करते हो।"

मैं एक-एक क़दम पीछे चलता हुआ बरामदे से नीचे उतरा। अपनी car तक पहुँचा। दरवाज़ा खोला। glove compartment से अपना handgun निकाला।

जब मैंने मुड़कर देखा — वो जा चुका था।

बरामदे का खंभा खड़ा था। उस पर आठ कुल्हाड़ी के ज़ख़्म।

और दूर — पेड़ों की तरफ़ — मुझे एक हल्की हँसी सुनाई दी। फिर वो भी ख़त्म हो गई।

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चार — पुलिस की फ़ाइल

Paul Phillips ने उसी रात पुलिस को फ़ोन किया। दूसरी बार Fairfax County पुलिस ने वही रिपोर्ट दर्ज की। एक आदमी। खरगोश की पोशाक। कुल्हाड़ी। एक ही जगह — Guinea Road।

दो अख़बार आए — Washington Post — 22 अक्टूबर और 31 अक्टूबर 1970। दोनों खबरें थीं। दोनों खबरों में "Bunny Man" का ज़िक्र था। पुलिस ने पूरे इलाक़े को छान मारा। हर पागलखाने (mental hospital) में फ़ोन गया कि क्या कोई मरीज़ भागा है। हर अस्पताल में पूछा गया। हर बढ़ई की दुकान में जाँच हुई कि क्या किसी ने हाल ही में long-handle कुल्हाड़ी ख़रीदी है।

कुछ नहीं मिला।

कुछ हफ़्तों बाद, खबरें ख़त्म हो गईं। पुलिस ने case को suspended file में डाल दिया। Bunny Man कभी पकड़ा नहीं गया। वो कभी पहचाना नहीं गया। उसकी पहचान आज तक रहस्य है।

लेकिन उन हफ़्तों में जो हुआ — वो ये था कि स्थानीय teenagers और बच्चे उस कहानी को आपस में सुनाने लगे। और कहानी बढ़ने लगी।

कोई कहता कि Bunny Man एक मानसिक रूप से बीमार आदमी था जो कई साल पहले Lorton Prison से भागा था। (असल में Lorton Prison 1916 तक खुली ही नहीं थी, लेकिन इस छोटी सी सच्चाई पर किसी का ध्यान नहीं गया।) कोई कहता कि उसका नाम Douglas Grifon था, और वो 1904 में पागल लोगों की एक bus से भाग निकला था जो दुर्घटना में पलट गई थी। कोई कहता कि उसे खरगोशों को मारकर खाना पसंद था। कोई कहता कि उसने teenagers को मार-मारकर रेलवे पुल पर लटका दिया था।

ये सब झूठ था। Fairfax County के archivist Brian Conley ने सालों तक 1872 से 1973 तक के सभी अख़बारों की हत्याओं की 550 से ज़्यादा रिपोर्ट्स खंगाली थीं। न Douglas Grifon नाम का कोई शख्स कहीं मिला, न उस bus दुर्घटना का कोई record था, न उस इलाक़े में कोई पागलखाना था।

लेकिन कहानी बढ़ती गई।

और बच्चे, teenager, फिर वयस्क, सब उस पुल — Colchester Overpass — को "Bunny Man Bridge" कहने लगे। हालाँकि असली घटना उस पुल से छह मील दूर हुई थी, उस पुल पर कुछ नहीं हुआ था। फिर भी — वो पुल कहानी का घर बन गया।

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पाँच — पुल पर एक रात

ये बात है 1986 की। उस वक़्त मैं — मेरा नाम Sarah Mitchell है — सोलह साल की एक teenager थी। मेरे चार दोस्त थे: Kevin, Mark, Jennifer, और Brian। हम पाँचों एक ही high school में थे। उस साल Halloween पर हमने तय किया कि हम Bunny Man Bridge पर जाएँगे। आधी रात को।

कहानी हमने सब सुनी थी। हमारे शहर के हर बच्चे ने सुनी थी। कहानी कहती थी कि अगर कोई Halloween की आधी रात को उस पुल के नीचे जाता है, और तीन बार "Bunny Man" कहता है — तो वो आता है। और जो जाते हैं, उनकी लाशें अगली सुबह पुल से लटकी हुई मिलती हैं।

हमें यक़ीन नहीं था। हम teenagers थे। हम बहुत बहादुर थे। हमारे लिए ये एक मज़ाक था।

Kevin अपने पिता की Chevrolet लेकर आया। पाँचों उसमें ठुँसकर बैठे। Brian के पास कैमरा था। Jennifer के पास walkie-talkie थी जो उसके भाई की थी। Mark के पास एक six-pack बीयर थी जो उसने अपने बाप के garage से चुराई थी। और मैं — मैं अपने बैग में एक crucifix लेकर आई थी, मेरी दादी का। मुझे लगा था कि अगर कुछ हुआ — किसी भी तरह — तो ये मेरी रक्षा करेगा।

रात साढ़े ग्यारह बजे हम पुल पर पहुँचे। पुल — सच कहूँ तो — दिन में देखने में बिल्कुल सामान्य था। एक छोटा सा concrete arch, single lane road, पुराने पत्थर। लेकिन उस रात, उस अंधेरे में, headlights बंद करते ही, वो जगह कुछ और लग रही थी।

पुल के नीचे से road निकलती थी, और दोनों तरफ़ घना जंगल था। पुल के अंदर graffiti थी — पुराने नाम, गालियाँ, खरगोश की drawings। आसमान में बादल थे, चाँद नहीं था। सिर्फ़ एक हल्की हवा की आवाज़ थी, और दूर कहीं एक रेलगाड़ी जा रही थी।

Kevin ने कार पुल के एक तरफ़ रोक दी। हम सब उतरे। ठंड कुछ ज़्यादा थी। मेरे साँस की भाप मेरे चेहरे के सामने बन रही थी।

"तो," Mark ने हँसते हुए कहा, बीयर खोलते हुए। "कौन कहेगा पहले?"

Brian ने अपना कैमरा निकाला। Flash check की। फ़्लैश चमका। एक सेकंड के लिए पुल के अंदर सब साफ़ दिखा। पुराना concrete। कुछ पुराने मकड़ी के जाले। एक ख़ाली बीयर की बोतल।

"मैं कहूँगा," Kevin बोला। उसने अपनी आवाज़ थोड़ी गहरी की। बहादुरी दिखाने के लिए।

"Bunny Man," उसने कहा।

एक छोटा सा pause।

"Bunny Man।"

Jennifer ने मेरा हाथ पकड़ लिया। उसके हाथ ठंडे थे।

"Bunny Man।"

तीसरी बार के बाद — कुछ नहीं हुआ। कोई आवाज़ नहीं। कोई आकृति नहीं। हम पाँचों एक-दूसरे को देखकर हँस पड़े। बेवक़ूफ़ी थी। हम जानते थे। ये एक कहानी थी। बस एक कहानी।

Brian ने एक तस्वीर खींची। पुल के अंदर की। फ़्लैश चमका।

और उस तस्वीर ने सब बदल दिया।

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छह — तस्वीर

उस वक़्त digital cameras नहीं होते थे। film camera था। तस्वीर देखने के लिए हमें film develop करवानी पड़ती थी। तीन दिन बाद Brian Walmart गया, उसकी film develop करवाई। बाक़ी तस्वीरें normal थीं — हमारे चेहरे, कार, बीयर की बोतलें। एक हमारे school की तस्वीर थी। और एक — पुल के अंदर वाली।

उस तस्वीर में, पुल के दूसरे सिरे पर — जहाँ हम पाँचों खड़े थे, उसके बिल्कुल पीछे — एक आकृति थी। पुल के अंदर के अंधेरे में। पाँच फ़ुट आठ इंच के क़रीब। पतला सा शरीर। उसके सिर पर — flash की रोशनी में साफ़ दिखता था — दो लंबे खड़े हुए कान।

Brian ने वो तस्वीर हम सबको स्कूल में दिखाई। हम सब उसे ध्यान से देख रहे थे।

Jennifer ने धीरे से कहा, "ये कोई pareidolia है। तुम जानते हो — जब दिमाग़ अंधेरे में चेहरे देख लेता है। ये बस shadows हैं।"

Kevin ने कहा, "लेकिन ये…"

Mark ने तस्वीर झपटी। उसने ध्यान से देखा। फिर वो बोला, धीरे से, "देखो उसके हाथ में।"

हमने देखा।

उस आकृति के दाहिने हाथ में, एक लंबा सा हत्था था। नीचे एक धातु का सिरा।

एक कुल्हाड़ी।

मेरे पेट में मरोड़ उठी।

"लेकिन हम वहाँ खड़े थे," Kevin ने कहा। उसकी आवाज़ अब उतनी मज़बूत नहीं थी। "वो हमारे ठीक पीछे होता तो… हम उसे देख लेते। है ना?"

किसी ने जवाब नहीं दिया।

उस तस्वीर को Brian ने अपनी डायरी में रख लिया। हम पाँचों ने तय किया कि हम कभी उस पुल पर नहीं जाएँगे। कभी नहीं।

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सात — आज की बात

ये बात आज से लगभग चालीस साल पहले की है। अब मैं अड़तालीस साल की हूँ। मेरी अपनी बेटी है, सोलह साल की — Megan। उसका नाम मैंने अपनी एक स्कूल की दोस्त के नाम पर रखा था जो college के दौरान एक हादसे में चली गई थी।

Megan भी अब उसी उम्र में है जिसमें मैं तब थी। और पिछले Halloween, उसने मुझसे पूछा कि क्या वो अपनी सहेलियों के साथ Bunny Man Bridge जा सकती है। उसकी आँखों में वही चमक थी जो मेरी आँखों में चालीस साल पहले थी। बहादुरी, मज़ा, और एक हल्का सा डर।

मैंने उसे साफ़ कहा, "नहीं।"

उसने नाराज़ होकर पूछा, "क्यों, माँ?"

मैंने उसे बस इतना कहा, "क्योंकि कुछ कहानियाँ कहानी नहीं होतीं। और कुछ जगहें खाली नहीं होतीं।"

उसने नाराज़गी से पैर पटका, अपने कमरे में चली गई। मैंने उसके दरवाज़े के बाहर खड़े होकर सुना। वो अपने दोस्तों को message कर रही थी कि उसकी माँ "बहुत old-fashioned" है।

मैंने उसे माफ़ कर दिया। टीन-एज में मेरी माँ ने भी मुझे उस रात रोका था। मैं नहीं रुकी थी।

उस रात मैं अपने attic में गई। अपना पुराना ट्रंक खोला। उसके सबसे नीचे एक पुराना envelope रखा था। उसमें वो तस्वीर थी, जो Brian ने 1986 के Halloween की रात ली थी। मेरी देखभाल में आख़िर उसे रहना पड़ा था — Brian की मौत 2009 में हो गई। दिल का दौरा। उसकी पत्नी ने मुझे उसका बक्सा दिया था। उसमें ये एक चीज़ मेरे काम की थी।

मैंने तस्वीर निकाली। चाँदनी में देखी।

और मेरी पीठ में, एक बार फिर, एक बहुत ठंडी लहर दौड़ गई।

उस तस्वीर में जो आकृति थी, चालीस साल पुरानी फ़ोटो में — अब मुझे एक चीज़ दिखी जो शायद हम सब ने नज़रअंदाज़ की थी।

उसका मुखौटा। मुखौटे के दो छेदों से जो आँखें झाँक रही थीं — वो सीधे कैमरे की तरफ़ थीं।

और मुखौटे के मुँह वाले हिस्से पर — एक हल्की सी मुस्कान थी।

Fairfax County पुलिस के पास आज भी वो दो रिपोर्ट्स खुली पड़ी हैं — Robert Bennett की और Paul Phillips की। 1970 की दोनों फ़ाइलें "unsolved" हैं। Bunny Man कभी पकड़ा नहीं गया। उसकी पहचान कभी नहीं हो पाई।

और हर साल, Halloween की रात, सैकड़ों teenagers आज भी उस पुल पर पहुँचते हैं। 2003 में एक रात अकेले 200 लोग वहाँ पहुँचे थे — Pennsylvania तक से लोग आए थे। पुलिस को traffic checkpoints लगाने पड़े थे।

उन सैकड़ों में से ज़्यादातर सुबह घर लौट जाते हैं — हँसते हुए, थोड़े डरे हुए, थोड़े गर्व से कि उन्होंने हिम्मत दिखाई।

लेकिन कभी-कभी कोई लौटता नहीं है। उनकी कारें पुल के पास मिलती हैं। खाली। पुलिस missing person की रिपोर्ट दर्ज करती है।

फ़ाइलें खुलती हैं। फ़ाइलें बंद होती हैं।

और पुल वहीं है। आज भी। 1906 का बना हुआ। उसकी दीवारों पर graffiti, और एक नाम जो हर साल नया लिखा जाता है — काले spray paint में, बार-बार।

"Bunny Man was here."

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लेखक की टिप्पणी — Bunny Man की कहानी अक्टूबर 1970 की दो असली पुलिस रिपोर्ट्स पर आधारित है — Air Force cadet Robert Bennett और security guard Paul Phillips के असली अनुभव। दोनों रिपोर्ट्स आज भी Fairfax County पुलिस की suspended files में हैं। Bunny Man कभी पकड़ा नहीं गया।

कहानी के पात्र काल्पनिक हैं। लेकिन डर — असली है।

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