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"ब्लैक हॉस्टल"
FARHA KHAN · Serial Horror · 5 मिनट
- Writer
- FARHA KHAN
- Story
- "ब्लैक हॉस्टल"
- Chapter
- Single story
- Category
- Serial Horror
- Reading time
- 5 min
- Words
- 860
- Language
- Hindi (हिंदी)
- Price
- Free to read
"ब्लैक हॉस्टल"
"वह जगह शापित है।। अक्सर वहां कही गई बातें सच हो जाया करती हैँ।। उदाहरण के तोर पर जैसे....."
उन सब दोस्तों की निगाह एक साथ लेपटॉप की स्क्रीन पर चिपकी हुई थी।।
सब ही गूगल पर उस शापित हॉस्टल की हिस्ट्री पढ़ रहे थे।
"जैसे आपने अगर कह दिया कि चाँद नहीं निकलेगा तो कूछ लोगो का कहना है कि वह सब सच हुआ है। चाँद उस रात वाक़ई नहीं निकला भले ही रात पूनम की रात हो।"
"अरे यार सब बस् डराने के लिए लिखा होता है।। कुछ होता नहीं है ओर बस बातें इतनी बड़ी बड़ी।" दिलजीत ने सिर झटकते हुए कोफ्त से कहा।। सबकी नज़रें एक साथ उसकी तरफ घूमी।। अब तक की खामोशी मे उठने वाली दिलजीत की पहली आवाज़ थी।।
इसलिए सब ही थोड़ा हिच्छुक गये थे।।
"तो यही तो हम चाहते हैँ।। कुछ हो या ना हो मगर लोग डरें।" सलमान ने खुशी से कहा।।
वह लोग एक यूट्यूब चैनल चलाते थे।। उनका चैनल अब तक काफी हिट हो चुका था।। वह अक्सर ऐसी जगहों पर जाते जिसके बारें में अफवाहें फैली होती और खुद से ही कहानी बना कर उन अफवाहों को सच कर देते।
सब दोस्त मिलकर कोई ना कोई किरदार निभा देते थे।। फिर खुद ही भागते हुए निकल आते।।
इस तरह उन्हें काफी लाइक्स और कमैंट्स मिलते।। उनके चैनल की फॉलोविंग थ्री मिलियन से भी काफी ऊपर जा चुकी थी लेकिन इस बार वह कुछ ऐसा ढूंढ रहे थे जिसके बारे में बच्चा बच्चा अफवाह से डरता हो।।
"उस वक्त मैं बी ए फर्स्ट ईयर में था जब मुझे एक अंकल ने बताया था कि इस हॉस्टल को 1983 में बंद कर दिया गया था क्योंकि इसमें हर बात सच हो जाती थी। कुछ लोग इसे अच्छा मानते थे तो कुछ लोगों के लिए परेशानी भी क्रिएट होती थी।। जैसे कि किसी ने कुछ अच्छा मांग लिया तो उसे भी पूरा किया जाता था और अगर किसी के मुंह कुछ ऐसी वैसी बात निकल गई तो उसे भी यह हॉस्टल कुछ ही देर में कर दिखाता था।।" सिकंदर ने याद करते हुए कहा ।
"अच्छा तो फिर तो अच्छा है।।मै भी जाकर एक गर्लफ्रेंड मांग लेता हूं।" बहज़ाद ने भी अपनी हसरत का इज़हार किया था।।
स्लम
दिलजीत ने उसे एक ज़ोर का रहपट रसीद किया था।
"किसी पीर फकीर की दरगाह जा रहा है?? जहां गर्लफ्रेंड नाम की मन्नत चाहिए तुझे।। अबे यह हमारे फ्यूचर का सवाल है।।। करियर बनाना है हमने इसमें।।" वह उसे आँखें खोलने का ज्ञान देते हुए बोला।।
"और तुम सिकंदर चुप कर जाओ।। यह कहानियां बनाना बंद करो।। चुपचाप चलो। हमेशा की तरह हम लोग एक्टिंग कर लेंगे।। पीछे से भूत बनकर भागने की एक्टिंग में हम अब माहिर हो चुके हैं।।" सलमान ने उसे तलाड़ते हुए कहा।।
"यह कहानी मै नहीं बना रहा हूं..इसमें बहुत कुछ सच है।।" सिकंदर ने यक़ीन दिलाने वाले अंदाज़ में कहा।।
हुमैमा और सारा को उनसे प्लान से मतलब नहीं था।। वह महज़ अपनी सेल्फीज़ लेने में मसरूफ थीं।अभी ऐसे बनी हुई थी गोया उन्हें कुछ नहीं लेना देना और सबसे पहले बैग तैयार करके वही सबसे पहले आएंगी।।
वैसे भी लंबा सा चोगा पहने बाल खोले..चुड़ैल के सीन उन्हें ही करने पड़ते थे।। हर वीडियो में।।
क्यों की अभी तक कुछ ऐसा मिला नहीं था जिसकी तलाश में वह लोग अलग अलग जगहों पर जाते थे।।
लेकिन यह ब्लैक हॉस्टल कुछ अलग कहानी कह रहा था।। इसमें कई अफवाहें थीं जो लोगों को मुतास्सिर करती थीं।। पता नहीं आज तक वहां कोई गया था या नहीं?? मगर सिकंदर को तो बहुत तेज़ गट्स फीलिंग्स थीं कि पक्का वहां उन्हें कुछ न कुछ अपने चैनल के लिए मिलेगा जिससे उनका चैनल यूट्यूब के नंबर वन चैनल बनेगा।।
"चलो फिर चलते हैं।। देखते हैं इस सिकंदर के बच्चे ने क्या रख छोड़ा है हमारे लिए उस ब्लैक हॉस्टल में।।" सलमान ने लाइक का साइन बनाते हुए हाथ उठाया था।। उसका वोट मिलते ही सिकंदर को कुछ राहत हुई।।
"गायज़...इस हॉस्टल पर बहुत बड़ा साया है।। दो भाइयों की जायदाद को लेकर लड़ाई हुई थी और सुना है एक भाई ने दूसरे पर ब्लैक मैजिक करा दिया था।। उसके बाद बहुत कहानी खराब हुई।। लोग वहां रात भर उठ कर भागते रहते और ज़ोर ज़ोर से चिल्लाकर कहते।। आग लगी है..आग लगी है" सिकंदर ने अपने अंकल की बताई हुई कहानी को आगे बताते हुए सबको देखा था।। शायद वह यही देख रहा था कि कौन उसकी बात का यक़ीन कर रहा है कौन नहीं।।
"तो वह आग किसी को दिखाई नहीं देती थी??" हुमैमा ने पहली बार उनके बीच दख़ल दिया था।।
"नहीं...।। वह आग सिर्फ़ महसूस होती थी।। उन लोगों को जो वहां रहते थे।। जल्द ही लोग उस हॉस्टल को छोड़कर भाग गए और हॉस्टल में ताला लग गया।। ब्लैक मैजिक की बात आम हो गई और तभी उस हॉस्टल का नाम ब्लैक मैजिक रखा गया था।।" वह पुरअसरार(रहस्यमई) अंदाज़ में बोल रहा था।।
"यह सब भूलना मत।। यह सब तुझे इस ब्लैक मैजिक की वीडियो में भी बोलना है।" दिलजीत ज़ोर से हंसते हुए बोला।।
बाकी सब भी हंस पड़े थे मगर सिकंदर के चेहरे का जाविया बिगड़ गया था।।
वह लोग उसकी बातों को झूठ समझ रहे थे खैर उसे कौन सा उन्हें यक़ीन दिलाकर मेडल लेना था।। उसे तो उनका साथ चाहिए था इस हॉस्टल तक जाने का।।
और वह उसे मिल गया था।।