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एपिसोड 15 — तेरह नाम
firoj saifi · Haunted Places · 3 मिनट
बेसमेंट की दीवार पर अब तेरह नाम साफ दिखाई दे रहे थे।
नैना ने टॉर्च ऊपर की।
बारह नाम पुराने थे।
तेरहवाँ नया।
नैना।
लेकिन उसके ऊपर एक और नाम लिखा था—
शालिनी।
नैना ने कहा—
“अगर शालिनी भी यहाँ है, तो ये तेरह नाम कौन हैं?”
कबीर ने कहा—
“शायद ये शिकार नहीं हैं।”
“तो?”
“दरवाज़े की कीमत हैं।”
नैना ने दीवार को ध्यान से देखा।
हर नाम के सामने एक निशान था।
मीरा — बंद।
अनु — बंद।
शालिनी — आधा खुला।
कबीर — काला निशान।
और नैना के सामने कोई निशान नहीं था।
“मेरा निशान खाली क्यों है?”
कबीर ने कहा—
“क्योंकि तेरा चुनाव अभी पूरा नहीं हुआ।”
अचानक पीछे से कदमों की आवाज़ आई।
मीरा दिखाई दी।
“तुम्हें यहाँ नहीं होना चाहिए था।”
नैना ने पूछा—
“तुम कौन हो?”
मीरा मुस्कुराई।
“मैं मीरा हूँ।”
कबीर ने कहा—
“इस बार सच बोल।”
मीरा ने उसकी तरफ देखा।
“तुम्हें अब भी लगता है कि मैं नकली हूँ?”
कबीर चुप रहा।
मीरा ने नैना को एक पुरानी लोहे की छड़ दी।
“इन नामों को मिटाओ।”
नैना ने पूछा—
“क्यों?”
“क्योंकि जब तक ये नाम दीवार पर हैं, वो इस जगह से जुड़ी रहेगी।”
“कौन?”
मीरा ने कहा—
“वही।”
अचानक कमरे में ठंडी हवा चली।
मीरा का चेहरा डर से भर गया।
“जल्दी करो।”
नैना ने पहला नाम मिटाया।
मीरा।
दीवार से एक चीख निकली।
फिर कमरे में एक लड़की की आत्मा दिखाई दी।
वह कुछ पल मुस्कुराई।
और गायब हो गई।
नैना ने दूसरा नाम मिटाया।
फिर तीसरा।
हर नाम मिटने के साथ कमरे का तापमान बदलता गया।
कुछ आत्माएँ मुक्त हुईं।
लेकिन जब नैना ने बारहवाँ नाम मिटाने की कोशिश की, दीवार से काली आग निकलने लगी।
कबीर ने उसे पीछे खींचा।
“रुक!”
शालिनी की आवाज़ आई—
“आखिरी नाम मत मिटाना।”
नैना ने पलटकर देखा।
शालिनी दीवार के सामने खड़ी थी।
“क्यों?”
“क्योंकि वो नाम तुम्हारा है।”
“और अगर मैंने मिटा दिया?”
“दरवाज़ा बंद हो जाएगा।”
नैना ने पूछा—
“तो समस्या क्या है?”
शालिनी ने कहा—
“तुम्हें भी उसके साथ बंद होना पड़ेगा।”
कबीर तुरंत बोला—
“नहीं।”
नैना ने उसकी तरफ देखा।
“अगर यही एक रास्ता है…”
“मैं तुझे फिर नहीं खो सकता।”
नैना की आँखें भर आईं।
“तू पहले ही मर चुका है।”
कबीर मुस्कुराया।
“लेकिन तू जिंदा है।”
शालिनी ने कहा—
“तुम दोनों के पास ज्यादा समय नहीं है।”
दीवार हिलने लगी।
काली परछाईं बाहर आने लगी।
नैना ने लोहे की छड़ उठाई।
“मैं इसे खत्म करूँगी।”
कबीर ने कहा—
“तुझे नहीं पता इसके बाद क्या होगा।”
“मुझे पता है।”
नैना ने अपना नाम देखा।
नैना।
उसने छड़ उठाई।
लेकिन तभी शालिनी ने उसका हाथ पकड़ लिया।
“अभी नहीं।”
“क्यों?”
“क्योंकि पहले तुम्हें उसकी असली कहानी जाननी होगी।”
नैना ने पूछा—
“किसकी?”
शालिनी ने कहा—
“कबीर की।”
नैना ने धीरे-धीरे कबीर की तरफ देखा।
कबीर का चेहरा अचानक गंभीर हो गया।
शालिनी बोली—
“वो सिर्फ तुम्हें बचाने नहीं आया।”
नैना ने पूछा—
“फिर?”
“उसकी मौत भी उसी रात तय हो गई थी।”
कबीर ने आँखें बंद कर लीं।
शालिनी ने कहा—
“क्योंकि कमरे नंबर 13 में मरने वाला कोई भी व्यक्ति… अगले दरवाज़े का रक्षक बन जाता है।”
नैना की आँखें फैल गईं।
कबीर ने धीरे से कहा—
“अब तू समझ गई।”
अचानक पीछे से दरवाज़ा बंद हो गया।
काली परछाईं चीखी।
और कमरे में सिर्फ एक आवाज़ गूँजी—
“कबीर को मुझे दे दो।”
एपिसोड समाप्त।
- Writer
- firoj saifi
- Story
- वो फ्लैट खाली नहीं था।
- Chapter
- 15 of 20
- Category
- Haunted Places
- Reading time
- 3 min
- Words
- 550
- Language
- Hindi (हिंदी)
- Price
- Free to read
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