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एपिसोड 1 — नए घर की शुरुआत
firoj saifi · Haunted Places · 5 मिनट
- Writer
- firoj saifi
- Story
- वो फ्लैट खाली नहीं था।
- Chapter
- 1 of 15
- Category
- Haunted Places
- Reading time
- 5 min
- Words
- 826
- Language
- Hindi (हिंदी)
- Price
- Free to read
ये मेरी कहानी है।
मेरा नाम नैना है, और कुछ महीने पहले तक मुझे लगता था कि भूत-प्रेत जैसी कोई चीज़ नहीं होती। मैं हमेशा हर अजीब घटना के पीछे कोई न कोई तर्क ढूँढ लिया करती थी।
लेकिन फिर मैं शिव रेजिडेंसी के फ्लैट नंबर 407 में रहने चली गई।
वो फ्लैट बाहर से जितना खूबसूरत और सस्ता था, अंदर से उतना ही रहस्यमयी था। वहाँ रहने के बाद मुझे महसूस हुआ कि कुछ घर सिर्फ ईंट-पत्थरों से नहीं बने होते… कुछ घर अपने अंदर राज़, डर और अधूरी कहानी छिपाए रखते हैं।
और सबसे डरावनी बात?
वो फ्लैट खाली नहीं था।
चलिए अब कहानी शुरू करते हैं
रात के करीब साढ़े दस बजे नैना अपनी कार से एक पुरानी-सी इमारत के सामने उतरती है।
बारिश तेज़ हो रही है।
इमारत का नाम है—शिव रेजिडेंसी।
नैना अपने फोन पर मकान-मालिक शर्मा जी का संदेश देखती है।
शर्मा जी: “चाबी गार्ड के पास है। फ्लैट 407। अगर रात हो जाए, तो भी चिंता मत करना।”
नैना छतरी संभालते हुए इमारत के भीतर प्रवेश करती है। लॉबी में पीली, टिमटिमाती रोशनी जल रही है। दीवारों पर नमी के काले धब्बे हैं और फर्श पर बारिश का पानी जमा है।
गार्ड उसे देखते ही अपनी कुर्सी से उठ जाता है।
गार्ड: “फ्लैट 407?”
नैना सिर हिलाती है।
गार्ड बिना कुछ कहे काउंटर के नीचे से एक पुरानी चाबी निकालता है। चाबी का गुच्छा उसकी हथेली में काँप रहा है।
नैना: “सब ठीक है?”
गार्ड उसकी ओर देखता है, फिर नज़रें झुका लेता है।
गार्ड: “जी… बस जल्दी ऊपर चली जाइए।”
नैना सीढ़ियों की ओर बढ़ती है। लिफ्ट बंद पड़ी है। हर मंज़िल पर बल्ब जलता-बुझता रहता है। तीसरी मंज़िल पार करते समय उसे ऊपर से किसी के धीरे-धीरे चलने की आवाज़ सुनाई देती है।
ठक… ठक… ठक…
नैना रुक जाती है।
आवाज़ भी रुक जाती है।
वह कुछ पल ऊपर देखती रहती है, फिर खुद को समझाकर चौथी मंज़िल की ओर बढ़ जाती है।
फ्लैट 407 का दरवाज़ा गलियारे के आखिरी छोर पर है। आसपास के सभी दरवाज़े बंद हैं। नैना चाबी लगाती है।
दरवाज़ा खुलते ही उसके चेहरे से गर्मी जैसे खिंच जाती है।
अंदर असामान्य ठंड है।
फ्लैट बहुत अच्छा है—साफ-सुथरा, सुसज्जित और अन्य फ्लैट्स की तुलना में आधे किराए पर उपलब्ध। फर्नीचर नया है, दीवारों पर ताज़ा पेंट है और खिड़कियों पर भारी पर्दे लगे हैं।
नैना अपना बैग नीचे रखती है और शर्मा जी को फोन करती है।
कुछ ही मिनटों में शर्मा जी सीढ़ियों से हाँफते हुए ऊपर आते हैं।
नैना: “इतना सस्ता क्यों है?”
शर्मा जी कुछ क्षण चुप रहते हैं। उनकी नज़र लिविंग रूम की दीवार पर टंगी एक खाली तस्वीर की फ्रेम पर टिक जाती है।
शर्मा जी: “पिछली लड़की अचानक चली गई थी।”
नैना: “कहाँ?”
शर्मा जी उसकी ओर देखते हैं।
उनके चेहरे पर एक पल के लिए डर उभरता है।
शर्मा जी: “पता नहीं।”
नैना हल्का-सा हँसती है।
नैना: “मतलब?”
शर्मा जी: “उसने किराया दिया, सामान छोड़ा… और फिर कभी वापस नहीं आई।”
नैना: “पुलिस को बताया?”
शर्मा जी जवाब देने के बजाय दरवाज़े की ओर बढ़ जाते हैं।
शर्मा जी: “आपको जो चाहिए, गार्ड से कह दीजिएगा। और… रात में छत पर मत जाइएगा।”
नैना चौंकती है।
नैना: “क्यों?”
शर्मा जी उसकी ओर देखे बिना कहते हैं—
शर्मा जी: “वहाँ कुछ नहीं है।”
वह जल्दी से वहाँ से चला जाता है।
नैना कुछ देर दरवाज़े पर खड़ी रहती है। फिर उसे बंद करके अपना सामान खोलने लगती है।
रात गहराती जाती है।
करीब ग्यारह बजे बिजली एक बार झपकती है। नैना रुककर छत की ओर देखती है।
तभी ऊपर से किसी के चलने की आवाज़ आती है।
ठक… ठक… ठक…
नैना धीरे-धीरे सिर उठाती है।
आवाज़ उसके ठीक ऊपर से आ रही है।
वह कुछ देर इंतज़ार करती है।
फिर वही आवाज़ दोबारा सुनाई देती है।
ठक… ठक… ठक…
नैना बाहर निकलकर गार्ड के पास जाती है।
नैना: “ऊपर कौन रहता है?”
गार्ड उसे अजीब नज़र से देखता है।
गार्ड: “मैडम… आपके ऊपर तो छत है।”
नैना: “लेकिन मुझे किसी के चलने की आवाज़ आ रही है।”
गार्ड कुछ पल चुप रहता है। फिर धीमे स्वर में कहता है—
गार्ड: “पहली रात सबको आती है।”
नैना की मुस्कान गायब हो जाती है।
नैना: “क्या?”
गार्ड तुरंत नज़रें फेर लेता है।
गार्ड: “कुछ नहीं मैडम। आप अंदर जाइए।”
रात 2:13 बजे नैना सो रही होती है।
अचानक—
ठक… ठक… ठक…
उसके कमरे के दरवाज़े पर दस्तक होती है।
नैना की आँख खुलती है।
कमरे में अँधेरा है। बाहर बारिश की आवाज़ अब धीमी हो चुकी है।
फिर दस्तक होती है।
ठक… ठक… ठक…
नैना धीरे से उठती है और दरवाज़े के पास जाती है।
नैना: “कौन?”
कोई जवाब नहीं आता।
वह कुछ सेकंड वहीं खड़ी रहती है।
फिर बहुत धीमी आवाज़ सुनाई देती है—
“नैना…”
उसका शरीर सिहर उठता है।
वह दरवाज़े की कुंडी पकड़ती है और धीरे-धीरे दरवाज़ा खोलती है।
बाहर कोई नहीं है।
गलियारा खाली है।
लेकिन फर्श पर पानी से बने गीले पैरों के निशान हैं।
वे निशान दरवाज़े से शुरू होकर…
सीधे उसके बेडरूम तक जाते हैं।
नैना पीछे हटती है।
उसका फोन अचानक बज उठता है।
स्क्रीन पर एक अनजान नंबर से संदेश आया है—
“तुम्हें यहाँ नहीं आना चाहिए था।”
नैना काँपते हाथों से उस नंबर पर कॉल करती है।
फोन बजता है।
एक बार।
दो बार।
तीसरी बार।
और उसी समय…
उसके पीछे बेडरूम के अंदर से एक लड़की की धीमी आवाज़ आती है—
“नैना…”
नैना धीरे-धीरे पलटती है।
कमरे में कोई दिखाई नहीं देता।
लेकिन बेड के नीचे से पानी की एक पतली धारा बाहर आ रही है।
फोन अब भी बज रहा है।
और कॉल की घंटी…
उसी बेड के नीचे से सुनाई दे रही है।
एपिसोड समाप्त।