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एपिसोड 2 — आवाज़
firoj saifi · Haunted Places · 2 मिनट
नैना पूरी रात सो नहीं पाती।
सुबह उसे लगता है कि शायद रात का अनुभव भय के कारण हुआ होगा।
वह ऑफिस जाती है।
लेकिन ऑफिस में उसे बार-बार एक ही बात परेशान करती रहती है—
उस लड़की को उसका नाम कैसे पता था?
शाम को लौटने पर फ्लैट बिल्कुल सामान्य लगता है।
नैना अपने दोस्त कबीर को बुलाती है।
कबीर मज़ाक करता है—
कबीर: “भूत-वूत कुछ नहीं होता। तू हॉरर फिल्में कम देखा कर।”
रात में दोनों लिविंग रूम में बैठे होते हैं।
अचानक ऊपर से फिर आवाज़ आती है।
ठक… ठक… ठक…
कबीर ऊपर देखता है।
कबीर: “ये क्या है?”
नैना चुप रहती है।
फिर आवाज़ आती है।
इस बार तीन बार नहीं।
तेरह बार।
ठक… ठक… ठक… ठक…
कबीर का चेहरा बदल जाता है।
दोनों बाहर निकलते हैं।
छत पर कोई नहीं है।
लेकिन छत के एक कोने में उन्हें लोहे का एक पुराना दरवाज़ा मिलता है।
उस पर ताला लगा है।
दरवाज़े के नीचे से ठंडी हवा आ रही है।
कबीर ताले को छूता है।
अंदर से किसी लड़की की आवाज़ आती है—
“मुझे बाहर निकालो…”
दोनों स्तब्ध रह जाते हैं।
अगले ही पल आवाज़ बदल जाती है।
अब वही आवाज़ कहती है—
“नैना को अकेला मत छोड़ना।”
- Writer
- firoj saifi
- Story
- वो फ्लैट खाली नहीं था।
- Chapter
- 2 of 20
- Category
- Haunted Places
- Reading time
- 2 min
- Words
- 202
- Language
- Hindi (हिंदी)
- Price
- Free to read
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