PretikaHaunted Placesवो फ्लैट खाली नहीं था।

एपिसोड 3 — पिछली लड़की

firoj saifi · Haunted Places · 5 मिनट

Writer
firoj saifi
Story
वो फ्लैट खाली नहीं था।
Chapter
3 of 15
Category
Haunted Places
Reading time
5 min
Words
894
Language
Hindi (हिंदी)
Price
Free to read

नैना शर्मा जी से फ्लैट की पिछली किरायेदार के बारे में पूछती है।
शर्मा जी पहले तो बात टालने की कोशिश करते हैं, लेकिन नैना लगातार सवाल करती रहती है। आखिरकार वह उन्हें अपने ऑफिस के छोटे-से कमरे में बैठाकर सारी बात बताने के लिए मजबूर कर देती है।
कुछ देर तक शर्मा जी खिड़की के बाहर देखते रहते हैं। बारिश की बूँदें शीशे पर फिसल रही थीं और कमरे में सिर्फ दीवार घड़ी की टिक-टिक सुनाई दे रही थी।
नैना: “आपने कहा था कि पिछली लड़की अचानक चली गई थी। लेकिन गार्ड ने कहा कि पहली रात सबको आवाज़ें सुनाई देती हैं। आखिर यहाँ हुआ क्या था?”
शर्मा जी की उँगलियाँ काँपने लगती हैं।
शर्मा जी: “उसका नाम मीरा था।”
नैना: “पूरा नाम?”
शर्मा जी: “मीरा सक्सेना। उम्र सत्ताईस साल। अकेली रहती थी। बहुत शांत लड़की थी। किसी से ज्यादा बात नहीं करती थी।”
नैना: “वह कब आई थी?”
शर्मा जी: “करीब छह महीने पहले।”
नैना ध्यान से उनकी ओर देखती है।
नैना: “और कब गायब हुई?”
शर्मा जी कुछ पल चुप रहते हैं।
शर्मा जी: “तीन महीने बाद।”
नैना: “मतलब वह तीन महीने तक यहाँ रही?”
शर्मा जी: “हाँ। शुरुआत में सब ठीक था। फिर उसने शिकायत करनी शुरू की कि रात में कोई उसके दरवाज़े पर दस्तक देता है। कभी छत से कदमों की आवाज़ आती थी, कभी बाथरूम के शीशे पर उँगलियों के निशान मिलते थे।”
नैना का चेहरा गंभीर हो जाता है।
नैना: “आपने उसकी मदद क्यों नहीं की?”
शर्मा जी नज़रें झुका लेते हैं।
शर्मा जी: “मैंने सोचा, वह तनाव में होगी। नई जगह थी। अकेली रहती थी। मैंने उसे दूसरा फ्लैट देने की बात भी कही थी, लेकिन उसने मना कर दिया।”
नैना: “क्यों?”
शर्मा जी: “कहती थी कि अगर वह फ्लैट छोड़कर गई, तो वह चीज़ उसके साथ चली जाएगी।”
कमरे में अचानक ठंड बढ़ती हुई महसूस होती है।
नैना अपनी बाँहों पर उभरे रोंगटे देखती है।
नैना: “फिर?”
शर्मा जी: “एक रात उसने मुझे फोन किया। बहुत डरी हुई थी। कह रही थी कि कमरे के अंदर कोई उसके नाम से पुकार रहा है। मैंने उसे दरवाज़ा खोलने से मना किया। लेकिन कुछ देर बाद फोन कट गया।”
नैना: “अगले दिन?”
शर्मा जी: “अगले दिन फ्लैट खुला मिला। उसका फोन, कपड़े, बैग… सब वहीं थे। बस मीरा नहीं थी।”
नैना: “पुलिस?”
शर्मा जी: “पुलिस आई थी। उन्होंने कहा कि शायद वह खुद कहीं चली गई होगी। कोई जबरदस्ती के निशान नहीं थे।”
नैना को अचानक अपने फ्लैट की अलमारी याद आती है।
वह उसी शाम वापस जाकर हर कमरे की तलाशी लेने लगती है। रसोई के ऊपर बने पुराने कैबिनेट, बेड के नीचे रखे डिब्बे और स्टोर रूम की धूल भरी अलमारियाँ—वह कुछ भी नहीं छोड़ती।
आखिरकार उसे बेडरूम की एक पुरानी लकड़ी की अलमारी के पीछे एक पतली-सी डायरी मिलती है।
डायरी के कवर पर धूल जमी है। किनारे नमी से फूल चुके हैं। पहले पन्ने पर सिर्फ एक नाम लिखा है—
मीरा।
नैना डायरी खोलती है।
पहले कुछ पन्नों में मीरा ने अपने नए घर, नौकरी और रोज़मर्रा की बातों के बारे में लिखा है।
“आज फ्लैट में शिफ्ट हुई। जगह अच्छी है। किराया बाकी इलाकों से बहुत कम है, लेकिन शायद मालिक को जल्दी किरायेदार चाहिए।”
अगले पन्ने पर लिखा है—
“रात को ऊपर से किसी के चलने की आवाज़ आई। शर्मा जी ने कहा कि छत पर कोई नहीं रहता। शायद पाइपलाइन या पानी की टंकी की आवाज़ होगी।”
फिर कुछ पन्ने खाली हैं।
उसके बाद लिखावट बदल जाती है। अक्षर टेढ़े-मेढ़े हैं, जैसे लिखते समय मीरा के हाथ काँप रहे हों।
“पहली रात मुझे लगा कि कोई घर में है।”
अगला पन्ना—
“दूसरी रात उसने मेरा नाम लिया।”
नैना की साँस अटक जाती है।
वह आगे पढ़ती है।
“वह मेरे कमरे में नहीं आती। वह सिर्फ दरवाज़े के बाहर खड़ी रहती है। मैं उसकी परछाईं देख सकती हूँ, लेकिन जब दरवाज़ा खोलती हूँ तो वहाँ कोई नहीं होता।”
एक और पन्ने पर लिखा है—
“आज उसने मेरी आवाज़ में मेरी माँ को पुकारा। मैं जानती हूँ कि वह मेरी माँ नहीं थी। मेरी माँ को मरे हुए आठ साल हो चुके हैं।”
नैना डायरी को कसकर पकड़ लेती है।
अगले पन्ने पर कई बार एक ही वाक्य लिखा हुआ है—
“आईने में मत देखना।”
नीचे लाल स्याही से लिखा है—
“वह चेहरा नहीं चुराती। वह यादें चुराती है।”
नैना घबराकर डायरी बंद करने ही वाली होती है कि आखिरी पन्ने पर उसकी नज़र पड़ती है।
वहाँ केवल एक वाक्य लिखा है—
“अगर वह तुम्हें अपना चेहरा दिखा दे, तो समझना कि अगली बारी तुम्हारी है।”
नैना कुछ देर तक उस पन्ने को देखती रहती है।
तभी पीछे से शीशा टूटने की आवाज़ आती है।
वह झटके से पलटती है।
बेडरूम की दीवार पर लगा आईना फर्श पर गिरा हुआ है। काँच के टुकड़े पूरे कमरे में बिखरे हैं।
नैना धीरे-धीरे उसके पास जाती है।
टूटे हुए शीशे के एक बड़े टुकड़े पर धुंध जम रही है।
फिर उस धुंध पर किसी अदृश्य उँगली से अक्षर बनने लगते हैं।
एक-एक करके शब्द उभरते हैं—
“मैंने अपना चेहरा देख लिया था।”
नैना पीछे हटती है।
उसी समय उसके फोन पर एक संदेश आता है।
नंबर अनजान है।
संदेश में लिखा है—
“अब तुम्हारी बारी है।”
नैना काँपते हाथों से कबीर को फोन करती है।
फोन बजता रहता है, लेकिन कबीर कॉल नहीं उठाता।
तभी टूटे हुए आईने के पीछे से बहुत धीमी आवाज़ आती है—
“नैना…”
वह आवाज़ बिल्कुल उसकी अपनी आवाज़ जैसी है।
नैना धीरे-धीरे शीशे के टुकड़े की ओर देखती है।
उसमें उसका चेहरा दिखाई दे रहा है।
लेकिन प्रतिबिंब की आँखें बंद हैं।
नैना की आँखें खुली हुई हैं।
प्रतिबिंब धीरे-धीरे मुस्कुराता है।
और उसके होंठों से आवाज़ निकलती है—
“तुमने डायरी पढ़ ली।”
नैना चीखते हुए पीछे हटती है।
कमरे की सारी लाइटें एक साथ बंद हो जाती हैं।
अंधेरे में डायरी के पन्ने अपने आप पलटने लगते हैं।
आखिरी पन्ने पर अब एक नई पंक्ति लिखी जा चुकी है—
“मीरा अभी भी यहीं है।”
एपिसोड समाप्त।

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