Pretika › Haunted Places › वो फ्लैट खाली नहीं था।

एपिसोड 4 — आईना

firoj saifi · Haunted Places · 6 मिनट

नैना पूरी रात लिविंग रूम में बैठी रहती है। उसने बेडरूम का दरवाज़ा बाहर से बंद कर दिया है और उसके सामने सोफे को खिसकाकर लगा दिया है। फिर भी उसे बार-बार अंदर से किसी के धीरे-धीरे चलने की आवाज़ सुनाई देती रहती है।
ठक… ठक… ठक…
कभी आवाज़ फर्श पर आती।
कभी अलमारी के अंदर से।
और कभी ऐसा लगता, जैसे कोई उसके ठीक पीछे खड़ा होकर साँस ले रहा हो।
सुबह होते ही नैना शर्मा जी को फोन करती है।
नैना: “मैं आज ही फ्लैट छोड़ रही हूँ। मुझे अपना सामान निकालने के लिए मजदूर चाहिए।”
शर्मा जी कुछ पल चुप रहते हैं।
शर्मा जी: “आपने कुछ देखा है?”
नैना: “मैंने इतना देखा है कि अब यहाँ एक मिनट भी नहीं रहना चाहती।”
शर्मा जी: “अगर आप जाना चाहती हैं, तो जा सकती हैं। लेकिन…”
नैना: “लेकिन क्या?”
शर्मा जी: “जो चीज़ वहाँ है, वह हमेशा फ्लैट के अंदर नहीं रहती।”
नैना का गला सूख जाता है।
नैना: “आपको पहले से सब पता था?”
शर्मा जी जवाब नहीं देते।
नैना फोन काट देती है और तुरंत कबीर को बुलाती है। कबीर आते ही उसके चेहरे की हालत देखकर मज़ाक करना बंद कर देता है।
कबीर: “तूने रात को सोया भी है?”
नैना: “नहीं। और मुझे लगता है कि मीरा के साथ जो हुआ, उसका जवाब इसी घर में है।”
कबीर: “तू अभी भी इस सबकी जाँच करना चाहती है?”
नैना: “हाँ। क्योंकि अगर मैं बिना जाने चली गई, तो शायद यह डर मेरे साथ भी जाएगा।”
कबीर कुछ देर उसे देखता रहता है।
कबीर: “ठीक है। लेकिन आज रात हम दोनों साथ रहेंगे।”
नैना सामान पैक करने लगती है। कपड़ों के बीच उसे एक पुरानी तस्वीर मिलती है। तस्वीर के किनारे मुड़े हुए हैं और पीछे तारीख लिखी है—
12 जुलाई, पाँच साल पहले।
तस्वीर में मीरा खड़ी है। उसके पीछे वही फ्लैट दिखाई दे रहा है—वही दीवारें, वही खिड़की और वही भारी पर्दे।
नैना तस्वीर को ध्यान से देखती है।
खिड़की के शीशे में एक दूसरी लड़की खड़ी दिखाई दे रही है।
उसका चेहरा धुंधला है, लेकिन कपड़े साफ दिखाई दे रहे हैं।
नैना तस्वीर को ज़ूम करती है।
उसके हाथ से तस्वीर लगभग छूट जाती है।
पीछे खड़ी लड़की के बाल, कपड़े और चेहरा बिल्कुल नैना जैसा है।
कबीर: “क्या हुआ?”
नैना तस्वीर उसकी ओर बढ़ा देती है।
कबीर कुछ सेकंड तक उसे देखता रहता है।
फिर वह तस्वीर को अपने फोन में स्कैन करता है।
कबीर: “पीछे वाली लड़की तू है।”
नैना: “ये असंभव है। तस्वीर पाँच साल पुरानी है।”
कबीर: “शायद चेहरा मिलता-जुलता हो।”
नैना: “नहीं। ये वही जैकेट है जो मेरे पास है। और ये बालों की क्लिप भी… मैंने इसे पिछले साल खरीदा था।”
कबीर तस्वीर को फिर से देखता है।
इस बार खिड़की में खड़ी लड़की का चेहरा पहले से ज्यादा साफ दिखाई देता है।
उसकी आँखें सीधे कैमरे की ओर हैं।
और उसके होंठों पर हल्की मुस्कान है।
कबीर तस्वीर फोन से हटाने की कोशिश करता है, लेकिन स्क्रीन फ्रीज़ हो जाती है।
कुछ सेकंड बाद तस्वीर अपने आप बदल जाती है।
अब उसमें मीरा अकेली नहीं है।
उसके पीछे नैना खड़ी है।
और नैना के पीछे एक तीसरी लड़की।
कबीर घबराकर फोन बंद कर देता है।
कबीर: “इसे अभी फेंक दे।”
नैना तस्वीर को मोड़कर कूड़ेदान में डाल देती है।
लेकिन कुछ ही पल बाद कूड़ेदान के अंदर से कागज़ खुरचने की आवाज़ आने लगती है।
दोनों एक-दूसरे को देखते हैं।
कबीर धीरे से कूड़ेदान उठाता है और उसे बालकनी से नीचे फेंक देता है।
नीचे गिरने की आवाज़ आती है।
फिर अचानक फोन बजता है।
नैना की स्क्रीन पर एक फोटो आती है।
वही तस्वीर।
लेकिन अब तस्वीर में खिड़की के पास खड़ी लड़की ने अपना चेहरा कैमरे के बिल्कुल करीब ला दिया है।
उसके नीचे संदेश लिखा है—
“तुम मुझे पहचानती हो।”
नैना फोन बंद कर देती है।
शाम होते-होते दोनों ने फ्लैट छोड़ने का फैसला कर लिया। नैना कपड़े पैक कर रही थी और कबीर कमरे की जाँच कर रहा था।
तभी बाथरूम से पानी गिरने की आवाज़ आई।
नल बंद था, फिर भी सिंक में पानी भर रहा था।
कबीर ने नल घुमाकर देखा। पानी रुक गया।
लेकिन बाथरूम के शीशे पर भाप जम चुकी थी।
उस भाप पर धीरे-धीरे शब्द उभरने लगे—
“आईने में देखो।”
कबीर: “नैना, इधर मत आना।”
लेकिन नैना पहले ही बाथरूम के दरवाज़े तक पहुँच चुकी थी।
शीशे में उसका चेहरा दिखाई दे रहा था।
कुछ सेकंड तक सब सामान्य रहा।
फिर उसका प्रतिबिंब मुस्कुराया।
नैना नहीं मुस्कुरा रही थी।
प्रतिबिंब ने धीरे-धीरे अपना हाथ उठाया।
नैना ने हाथ नहीं उठाया।
प्रतिबिंब ने शीशे पर उँगली रखी और लिखा—
“मीरा अभी गई नहीं है।”
नैना पीछे हट गई।
नैना: “कबीर… ये मेरे साथ क्या हो रहा है?”
कबीर उसका हाथ पकड़कर उसे बाथरूम से बाहर खींचता है।
उसी समय शीशे के अंदर से किसी ने जोर से हथेली मारी।
धड़ाम!
शीशे पर दरारें फैल गईं।
दरारों के बीच एक चेहरा उभर आया।
वह चेहरा मीरा का था।
मीरा के होंठ हिले—
“तुम बाहर नहीं जा सकती।”
अचानक फ्लैट का मुख्य दरवाज़ा अपने आप बंद हो गया।
कबीर दौड़कर उसे खोलने की कोशिश करता है, लेकिन कुंडी हिलती तक नहीं।
नैना की नज़र दीवार पर लगी घड़ी पर जाती है।
घड़ी की सुइयाँ उल्टी दिशा में घूम रही थीं।
फिर घड़ी रुक गई।
समय था—
3:13।
बाथरूम के अंदर से मीरा की आवाज़ आई—
“अगर तुमने अपना चेहरा देख लिया… तो दरवाज़ा तुम्हें पहचानना बंद कर देगा।”
नैना ने काँपते हुए शीशे की ओर देखा।
इस बार प्रतिबिंब में वह अकेली नहीं थी।
उसके पीछे मीरा खड़ी थी।
और मीरा के पीछे शालिनी।
शालिनी ने अपना हाथ नैना के कंधे पर रखा।
नैना ने पलटकर देखा।
पीछे कोई नहीं था।
लेकिन शीशे में शालिनी अब भी खड़ी थी।
वह धीरे से मुस्कुराई और बोली—
“तुम्हें याद नहीं… लेकिन तुम पहले भी यहाँ आ चुकी हो।”
शीशा अचानक पूरी तरह टूट गया।
फर्श पर काँच के टुकड़े बिखर गए।
हर टुकड़े में नैना का अलग-अलग चेहरा दिखाई दे रहा था।
कहीं वह बच्ची थी।
कहीं बूढ़ी।
कहीं उसकी आँखें काली थीं।
और एक टुकड़े में वह खून से सनी हुई खड़ी थी।
कबीर ने उसे अपनी ओर खींच लिया।
कबीर: “इनमें मत देख!”
लेकिन देर हो चुकी थी।
एक काँच के टुकड़े में नैना ने एक छोटी बच्ची को देखा।
बच्ची कमरे नंबर 13 के बाहर खड़ी थी।
उसके हाथ में एक लाल रिबन था।
बच्ची ने नैना की ओर देखकर कहा—
“तुमने मुझे यहाँ छोड़ा था।”
नैना का सिर घूमने लगा।
उसे लगा जैसे कोई पुरानी याद उसके दिमाग के बंद दरवाज़े पर दस्तक दे रही हो।
ठक… ठक… ठक…
फिर वही आवाज़ पूरे फ्लैट में गूँजने लगी।
एपिसोड समाप्त।

Writer
firoj saifi
Story
वो फ्लैट खाली नहीं था।
Chapter
4 of 20
Category
Haunted Places
Reading time
6 min
Words
1099
Language
Hindi (हिंदी)
Price
Free to read

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