PretikaHaunted Placesवो फ्लैट खाली नहीं था।

एपिसोड 5 — बंद कमरा

firoj saifi · Haunted Places · 6 मिनट

Writer
firoj saifi
Story
वो फ्लैट खाली नहीं था।
Chapter
5 of 15
Category
Haunted Places
Reading time
6 min
Words
1024
Language
Hindi (हिंदी)
Price
Free to read

कबीर ने नैना को समझाने की बहुत कोशिश की कि उन्हें तुरंत फ्लैट छोड़ देना चाहिए। उसका चेहरा अब पहले जैसा निश्चिंत नहीं था। वह बार-बार मुख्य दरवाज़े की ओर देख रहा था, जैसे उसे डर हो कि कोई अदृश्य चीज़ उनके पीछे खड़ी है।
कबीर: “नैना, हम पुलिस को बताएँगे। शर्मा जी से पूछताछ करवाएँगे। लेकिन इस इमारत में रुकना ठीक नहीं है।”
नैना: “अगर हम अभी चले गए, तो मीरा का क्या होगा?”
कबीर: “मीरा गायब है। हमें नहीं पता वह ज़िंदा है या नहीं।”
नैना: “इसीलिए तो पता लगाना ज़रूरी है।”
नैना ने मीरा की डायरी मेज़ पर रखी। उसने उन पन्नों पर निशान लगाए थे, जहाँ मीरा ने छत के बंद कमरे का ज़िक्र किया था। डायरी के एक पन्ने पर लिखा था—
“ऊपर वाला कमरा सिर्फ बाहर से बंद है। अंदर जाने का रास्ता फ्लैट से नहीं, बल्कि छत की पानी की टंकी के पीछे से खुलता है।”
कबीर ने पन्ना पढ़कर भौंहें सिकोड़ लीं।
कबीर: “तूने ये पहले क्यों नहीं बताया?”
नैना: “क्योंकि मुझे खुद यकीन नहीं था कि ये सच है।”
कबीर: “और अब?”
नैना ने टूटे हुए आईने की ओर देखा। फर्श पर पड़े काँच के टुकड़ों में से एक में अभी भी मीरा का चेहरा दिखाई दे रहा था।
नैना: “अब मुझे लगता है कि मीरा ने जानबूझकर ये डायरी छोड़ी थी।”
दोनों टॉर्च लेकर छत पर पहुँचते हैं। रात के करीब साढ़े ग्यारह बज चुके थे। बारिश रुक गई थी, लेकिन छत पर पानी जमा था। हवा में सीलन और लोहे की गंध थी।
पानी की टंकी के पीछे सचमुच एक संकरा रास्ता था। वहाँ झाड़ियाँ और पुराने पाइप पड़े थे। कबीर ने टॉर्च नीचे की ओर की तो उसे जंग लगा लोहे का एक छोटा-सा दरवाज़ा दिखाई दिया।
दरवाज़े पर वही ताला लगा था, जिसे उन्होंने पिछली रात देखा था।
कबीर: “ये तो बाहर से बंद है।”
नैना ने डायरी का आखिरी हिस्सा फिर से पढ़ा।
नैना: “मीरा ने लिखा था कि ताला असली नहीं है।”
कबीर: “मतलब?”
नैना ने ताले को ध्यान से देखा। वह दरवाज़े में लगा हुआ था, लेकिन उसकी कुंडी दीवार से जुड़ी नहीं थी। कबीर ने जोर से खींचा तो ताला हाथ में आ गया।
दरवाज़ा खुलते ही भीतर से बर्फ जैसी ठंडी हवा बाहर आई।
कमरा बहुत छोटा था, लेकिन उसकी दीवारें असामान्य रूप से मोटी थीं। अंदर धूल से ढकी लकड़ी की अलमारियाँ, पुराने बिजली के तार, टूटे हुए बल्ब और कई लोहे के बक्से रखे थे।
दीवार पर काले रंग से तेरह नाम लिखे थे।
पहले बारह नामों पर लाल रेखा खींची हुई थी।
तेरहवाँ नाम खाली था।
नैना धीरे-धीरे दीवार के पास गई।
नैना: “ये लोग कौन हैं?”
कबीर ने अलमारी से एक पुरानी फाइल निकाली। फाइल के कागज़ नमी से चिपके हुए थे। उसने पहला पन्ना खोला।
उसमें इमारत के पुराने किरायेदारों की सूची थी। कई नामों के आगे तारीखें लिखी थीं। कुछ के आगे “लापता”, कुछ के आगे “मृत” और कुछ के आगे सिर्फ एक काला निशान बना था।
कबीर ने एक नाम पढ़ा—
कबीर: “सविता मेहरा… 2004। फिर रेखा वर्मा… 2007। ये लोग गायब हुए थे?”
नैना ने दीवार की ओर देखा।
नैना: “इन सभी का संबंध फ्लैट 407 से है।”
अचानक कमरे के कोने में रखा पुराना कैमरा अपने आप चालू हो गया।
उसकी लाल बत्ती जल उठी।
कबीर ने कैमरा उठाया। स्क्रीन पर धुंधली रिकॉर्डिंग चल रही थी। वीडियो में मीरा उसी कमरे के बीचोंबीच बैठी थी। उसके चेहरे पर थकान और डर साफ दिखाई दे रहा था।
मीरा: “अगर कोई यह वीडियो देख रहा है, तो मुझे ढूँढने की कोशिश मत करना…”
वह कुछ पल चुप रही। फिर उसने कैमरे के पीछे देखा।
उसकी आँखें फैल गईं।
मीरा: “वो आ गई।”
कैमरा उसके हाथ से छूटकर फर्श पर गिर गया। स्क्रीन कुछ सेकंड तक अंधेरी रही।
फिर वीडियो में फर्श दिखाई दिया।
मीरा के पैरों के पास पानी फैल रहा था।
पानी धीरे-धीरे कैमरे की ओर बढ़ा।
उसके बाद स्क्रीन पर एक परछाईं दिखाई दी।
वह परछाईं मीरा के पीछे खड़ी थी, लेकिन उसका सिर असामान्य रूप से झुका हुआ था।
मीरा की आवाज़ फिर सुनाई दी—
“अगर तुम नैना हो… तो मेरी बात ध्यान से सुनना।”
नैना का चेहरा सफेद पड़ गया।
कबीर ने वीडियो रोकने की कोशिश की, लेकिन कैमरा बंद नहीं हुआ।
मीरा: “तुम्हें याद नहीं होगा, लेकिन तुम पहले भी यहाँ आ चुकी हो। उस रात तुम अकेली नहीं थीं। तुम्हारे साथ एक छोटी लड़की थी।”
नैना के सिर में अचानक तेज़ दर्द उठने लगा।
उसे लाल रिबन वाली बच्ची दिखाई दी।
बच्ची कमरे नंबर 13 के बाहर खड़ी थी।
मीरा: “उस लड़की को कमरे से बाहर मत आने देना। अगर वह बाहर आ गई, तो वह तुम्हारा चेहरा पहन लेगी।”
वीडियो में मीरा अचानक कैमरे के बहुत करीब आ गई।
उसकी आँखों में आँसू थे।
मीरा: “और अगर मैं तुम्हारे सामने आऊँ… तो पहले मेरा नाम पूछना। अगर मैं जवाब न दे पाऊँ, तो समझना कि मैं मीरा नहीं हूँ।”
वीडियो अचानक रुक गया।
कमरे में सन्नाटा छा गया।
कबीर ने कैमरा नीचे रख दिया।
कबीर: “ये रिकॉर्डिंग कब की है?”
नैना ने कैमरे के पीछे लगी तारीख देखी।
नैना: “तीन महीने पहले।”
उसी समय दीवार पर लिखे खाली तेरहवें स्थान के नीचे काली स्याही फैलने लगी।
धीरे-धीरे अक्षर उभरने लगे।
नैना।
नैना पीछे हट गई।
नैना: “नहीं…”
कबीर ने उसका हाथ पकड़ लिया।
कबीर: “हमें अभी यहाँ से निकलना होगा।”
दरवाज़ा अचानक अपने आप बंद हो गया।
कबीर ने कुंडी घुमाई, लेकिन वह जाम थी।
कमरे के अंदर तापमान और गिर गया।
फिर दीवार के पीछे से किसी के नाखून रगड़ने की आवाज़ आने लगी।
खर्र… खर्र… खर्र…
नैना ने टॉर्च दीवार पर डाली।
दीवार पर लिखे बारह कटे हुए नामों के नीचे अब छोटे-छोटे गीले हाथों के निशान बन रहे थे।
एक निशान।
फिर दूसरा।
फिर तीसरा।
कबीर ने पूरी ताकत से दरवाज़े पर लात मारी।
दरवाज़ा नहीं खुला।
अचानक कैमरा फिर चालू हो गया।
इस बार स्क्रीन पर वही कमरा दिखाई दे रहा था।
लेकिन वीडियो में नैना और कबीर दोनों कमरे के बीच खड़े थे।
नैना ने स्क्रीन की ओर देखा।
वीडियो में उनके पीछे एक लड़की खड़ी थी।
उसका चेहरा नैना जैसा था।
कबीर ने धीरे से कहा—
कबीर: “नैना… हमारे पीछे मत देखना।”
लेकिन स्क्रीन पर खड़ी लड़की मुस्कुरा रही थी।
उसने अपना हाथ उठाया और कैमरे की ओर इशारा किया।
फिर कैमरे से एक फुसफुसाहट सुनाई दी—
“तेरहवाँ नाम पूरा करो।”
अगले ही पल कमरे की सारी लाइटें बुझ गईं।
अंधेरे में किसी ने नैना के कान के पास आकर कहा—
“तुम मुझे पहले भी छोड़कर गई थीं।”
नैना चीख उठी।
कबीर ने उसका हाथ पकड़कर दरवाज़े की ओर खींचा।
उसी समय दरवाज़ा अपने आप खुल गया।
बाहर कोई नहीं था।
लेकिन फर्श पर गीले पैरों के निशान बने हुए थे।
वे निशान कमरे से बाहर नहीं जा रहे थे।
वे सीधे नैना के पैरों तक आकर रुक गए थे।
एपिसोड समाप्त।

← पिछला भाग  ·  अगला भाग →

वो फ्लैट खाली नहीं था। · सभी भाग →