Pretika › Haunted Places › वो फ्लैट खाली नहीं था।
एपिसोड 6 — सपना
firoj saifi · Haunted Places · 6 मिनट
उस रात के बाद नैना ने तय किया कि वह फ्लैट में अकेली नहीं सोएगी। कबीर उसे अपने घर ले जाना चाहता था, लेकिन नैना ने मना कर दिया। उसे डर था कि अगर वह फ्लैट से बाहर गई, तो शायद वह शक्ति उसके साथ चली जाएगी।
दोनों ने लिविंग रूम में सोफे के पास गद्दा बिछा लिया। मुख्य दरवाज़े के सामने कबीर ने एक भारी मेज़ लगा दी और सभी आईनों पर चादरें डाल दीं।
कबीर: “सुबह होते ही हम यहाँ से निकलेंगे। कोई बहस नहीं।”
नैना: “अगर सुबह तक सब ठीक रहा तो।”
कबीर ने उसकी ओर देखा।
कबीर: “तूने ये बात मज़ाक में कही है?”
नैना ने जवाब नहीं दिया।
रात करीब दो बजे कबीर की आँख लग गई। नैना भी थकान के कारण सो गई।
कुछ देर बाद उसने खुद को उसी फ्लैट के गलियारे में खड़ा पाया।
गलियारा पहले से कहीं लंबा था। दीवारों पर लगी सारी तस्वीरों में उसका चेहरा था। कहीं वह बच्ची थी, कहीं जवान, कहीं बूढ़ी। हर तस्वीर में उसकी आँखें कैमरे की ओर देख रही थीं।
गलियारे के आखिरी छोर पर मीरा खड़ी थी।
उसके कपड़े भीगे हुए थे और बाल चेहरे से चिपके थे।
मीरा: “तुम मुझे बचाने आई हो?”
नैना ने आगे बढ़ने की कोशिश की, लेकिन उसके पैर फर्श से चिपक गए।
नैना: “हाँ।”
मीरा ने सिर झुका लिया।
मीरा: “तो पहले खुद को बचाओ।”
नैना: “तुम कौन हो?”
मीरा ने धीरे-धीरे अपना चेहरा उठाया।
उसकी आँखें पूरी तरह काली थीं।
मीरा: “तुम्हें सच में याद नहीं?”
गलियारे की दीवारें हिलने लगीं। दूर कहीं किसी बच्ची के रोने की आवाज़ आई।
नैना ने पीछे मुड़कर देखा।
लाल रिबन वाली बच्ची उसके पीछे खड़ी थी।
बच्ची ने नैना का हाथ पकड़ लिया।
उसका हाथ बर्फ जैसा ठंडा था।
बच्ची: “तुमने कहा था कि तुम वापस आओगी।”
नैना ने हाथ छुड़ाने की कोशिश की।
नैना: “मैं तुम्हें नहीं जानती।”
बच्ची मुस्कुराई।
बच्ची: “यही तो उसने चाहा था।”
अचानक गलियारे की सारी लाइटें बुझ गईं।
अंधेरे में मीरा की आवाज़ गूँजी—
“आज रात दरवाज़ा मत खोलना।”
नैना की नींद खुल गई।
वह पसीने से भीगी हुई थी। कमरे में अंधेरा था और कबीर सोफे पर गहरी नींद में था।
नैना ने घड़ी देखी।
समय था—2:58।
उसने पानी पीने के लिए उठना चाहा, तभी उसे अपने हाथ पर जलन महसूस हुई।
कलाई पर तीन लंबी खरोंचें थीं।
खरोंचों से खून की पतली रेखा निकल रही थी।
नैना ने घबराकर बाथरूम की ओर देखा। चादर से ढका आईना हल्के-हल्के हिल रहा था।
वह धीरे से उठी और बाथरूम के पास गई।
दरवाज़ा बंद था।
अंदर से पानी टपकने की आवाज़ आ रही थी।
नैना ने दरवाज़ा नहीं खोला। उसने पास रखे छोटे आईने पर पड़ी चादर का कोना उठाया।
शीशे पर भाप जमी हुई थी।
उस भाप पर धीरे-धीरे शब्द उभर रहे थे—
“आज रात 3:13 बजे दरवाज़ा मत खोलना।”
नैना पीछे हट गई।
उसी समय कबीर की नींद खुली।
कबीर: “क्या हुआ?”
नैना ने उसे शीशा दिखाया।
कबीर कुछ पल तक उसे देखता रहा।
कबीर: “ये तूने लिखा है?”
नैना: “तुझे सच में लगता है कि मैं अपने हाथ पर खरोंच लगाकर ये सब लिखूँगी?”
कबीर ने उसकी कलाई देखी। उसका चेहरा गंभीर हो गया।
कबीर: “ठीक है। 3:13 तक हम दोनों जागेंगे।”
वे लिविंग रूम में बैठ गए। कबीर ने फोन पर समय देखा। नेटवर्क गायब था। बाहर पूरी इमारत असामान्य रूप से शांत थी।
3:10।
3:11।
3:12।
घड़ी की सेकंड वाली सुई अचानक रुक गई।
फिर दरवाज़े पर दस्तक हुई।
ठक… ठक… ठक…
कबीर ने नैना की ओर देखा।
दोनों चुप रहे।
कुछ सेकंड बाद बाहर से कबीर की आवाज़ आई—
“नैना, दरवाज़ा खोल।”
नैना का चेहरा बदल गया।
कबीर उसके सामने बैठा था।
बाहर वही आवाज़ फिर आई—
“नैना, जल्दी कर। मैं बाहर हूँ।”
कबीर ने फुसफुसाकर कहा—
कबीर: “दरवाज़े के पास मत जाना।”
नैना ने सिर हिलाया।
बाहर से आवाज़ तेज़ हो गई।
“नैना! मुझे पता है तुम अंदर हो!”
कबीर ने अपना फोन निकाला और रिकॉर्डिंग शुरू कर दी। बाहर की आवाज़ अब बिल्कुल असली लग रही थी—वही लहजा, वही साँस लेने का तरीका।
फिर आवाज़ अचानक बदल गई।
अब वह मीरा की थी।
“नैना… मैं हूँ।”
नैना की आँखों में आँसू आ गए।
नैना: “अगर तुम मीरा हो, तो अपना नाम बताओ।”
बाहर कुछ पल सन्नाटा रहा।
फिर धीमी हँसी सुनाई दी।
“तुम्हें मेरा नाम पहले से पता है।”
कबीर ने नैना का हाथ पकड़ लिया।
दरवाज़े के नीचे से काला पानी अंदर रिसने लगा।
पानी धीरे-धीरे फर्श पर फैलता हुआ उनके पैरों तक पहुँचने लगा।
कबीर ने मेज़ हटाकर दरवाज़े की कुंडी जाँचने की कोशिश की।
तभी बाहर से एक बच्ची की आवाज़ आई—
“दीदी, दरवाज़ा खोलो।”
नैना का शरीर काँप उठा।
उसके दिमाग में अचानक एक दृश्य चमका।
वह छोटी बच्ची का हाथ पकड़े कमरे नंबर 13 के सामने खड़ी थी।
बच्ची रो रही थी।
नैना उससे कह रही थी—
“डरो मत। मैं अभी वापस आती हूँ।”
फिर उसने बच्ची को कमरे के अंदर बंद कर दिया था।
नैना ने सिर पकड़ लिया।
नैना: “मैंने उसे अंदर बंद किया था…”
कबीर: “किसे?”
नैना: “उस बच्ची को। मैंने उसे कमरे में बंद किया था।”
बाहर से आवाज़ आई—
“तुम वापस नहीं आई थीं।”
दरवाज़े की कुंडी धीरे-धीरे घूमने लगी।
कबीर ने पूरी ताकत से उसे पकड़ लिया।
कबीर: “नैना, मेरी तरफ देख। जो भी सुन रही है, उस पर भरोसा मत कर।”
नैना ने उसकी ओर देखा।
लेकिन अगले ही पल कबीर का चेहरा बदलने लगा।
उसकी आँखें काली हो गईं।
उसके होंठों से वही आवाज़ निकली—
“दरवाज़ा खोल दो, नैना।”
नैना चीखते हुए पीछे हट गई।
कबीर ने पलक झपकी।
उसका चेहरा फिर सामान्य था।
कबीर: “क्या हुआ?”
नैना कुछ बोल नहीं पाई।
घड़ी ने 3:13 बजाए।
दरवाज़े पर दस्तक बंद हो गई।
कुछ सेकंड तक पूरी तरह सन्नाटा रहा।
फिर बाथरूम के अंदर से शीशा टूटने की आवाज़ आई।
कबीर टॉर्च लेकर वहाँ पहुँचा।
चादर फर्श पर पड़ी थी।
आईने पर एक नया संदेश लिखा था—
“तुमने दरवाज़ा नहीं खोला। अब मैं अंदर हूँ।”
नैना ने धीरे-धीरे पीछे देखा।
लिविंग रूम के अंधेरे कोने में कोई खड़ा था।
वह आकृति बिल्कुल नैना जैसी दिख रही थी।
उसने सिर झुकाकर मुस्कुराया।
फिर फुसफुसाई—
“अगली बार सपना नहीं होगा।”
अचानक लाइट जल उठी।
कोने में कोई नहीं था।
लेकिन नैना के फोन पर एक वीडियो रिकॉर्डिंग सेव हो चुकी थी।
वीडियो में वह सोते हुए दिखाई दे रही थी।
उसके बगल में कबीर बैठा था।
और उसके पीछे लाल रिबन वाली बच्ची खड़ी थी।
बच्ची कैमरे की ओर देखकर कह रही थी—
“वह जाग गई है।”
एपिसोड समाप्त।
- Writer
- firoj saifi
- Story
- वो फ्लैट खाली नहीं था।
- Chapter
- 6 of 20
- Category
- Haunted Places
- Reading time
- 6 min
- Words
- 1074
- Language
- Hindi (हिंदी)
- Price
- Free to read
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