PretikaHaunted Placesवो फ्लैट खाली नहीं था।

एपिसोड 7 — मीरा

firoj saifi · Haunted Places · 6 मिनट

Writer
firoj saifi
Story
वो फ्लैट खाली नहीं था।
Chapter
7 of 15
Category
Haunted Places
Reading time
6 min
Words
1116
Language
Hindi (हिंदी)
Price
Free to read

सुबह होते ही नैना ने वीडियो कई बार देखा। हर बार वही दृश्य था—वह सो रही थी, कबीर उसके पास बैठा था और लाल रिबन वाली बच्ची उसके पीछे खड़ी थी।
लेकिन वीडियो में एक बात और थी।
कबीर का चेहरा धुंधला था।
नैना ने वीडियो रोककर स्क्रीन ज़ूम की। कबीर की जगह कुछ सेकंड के लिए एक काली परछाईं दिखाई दे रही थी।
नैना: “कबीर, ये तू है?”
कबीर ने फोन लिया और वीडियो देखा। उसके चेहरे पर चिंता उभर आई।
कबीर: “मुझे नहीं पता।”
नैना: “तुझे कुछ याद नहीं?”
कबीर: “मैं पूरी रात तेरे साथ था।”
नैना: “लेकिन वीडियो में तेरे पीछे कोई और खड़ा है।”
कबीर ने जवाब नहीं दिया।
नैना ने उसी समय शर्मा जी को फोन किया। कई बार घंटी जाने के बाद उन्होंने फोन उठाया।
शर्मा जी: “नैना जी, अभी बात करना ठीक नहीं होगा।”
नैना: “मुझे मीरा के बारे में सब कुछ जानना है। और कमरे नंबर 13 के बारे में भी।”
दूसरी तरफ कुछ देर सन्नाटा रहा।
शर्मा जी: “आपने कमरा देख लिया?”
नैना: “आपको पता था कि वह कमरा मौजूद है?”
शर्मा जी: “मैंने आपको वहाँ जाने से मना नहीं किया था।”
नैना: “आपने तो कहा था कि छत पर कुछ नहीं है।”
शर्मा जी की आवाज़ धीमी हो गई।
शर्मा जी: “कुछ बातें छिपाना और कुछ बातें भूल जाना… दोनों अलग चीज़ें हैं।”
नैना: “मीरा कहाँ है?”
शर्मा जी ने तुरंत फोन काट दिया।
नैना ने दोबारा कॉल किया, लेकिन फोन बंद था।
दोपहर तक नैना को तेज़ सिरदर्द होने लगा। उसे बार-बार वही सपना याद आ रहा था। लाल रिबन वाली बच्ची, कमरा नंबर 13 और उसका अपना वादा—
“मैं वापस आऊँगी।”
कबीर ने उसे आराम करने के लिए कहा, लेकिन नैना ने मना कर दिया।
नैना: “अगर मीरा सच में कमरे में कैद है, तो हमें उसे ढूँढना होगा।”
कबीर: “तूने खुद वीडियो में देखा है कि वह चीज़ किसी का भी चेहरा पहन सकती है।”
नैना: “इसलिए हमें उससे सवाल पूछने होंगे।”
शाम होते-होते फ्लैट में फिर वही ठंड फैलने लगी। खिड़कियाँ बंद थीं, फिर भी पर्दे हिल रहे थे। लिविंग रूम की दीवार पर लगी घड़ी 3:13 पर अटक गई।
नैना ने मीरा की डायरी उठाई।
आखिरी पन्ने पर पहले से लिखे शब्द बदल चुके थे।
“अगर वह सामने आए, तो उससे पूछना—तुम यहाँ मरी कैसे?”
नैना ने धीरे से पढ़ा।
कबीर: “ये पहले लिखा था?”
नैना: “नहीं।”
उसी समय बेडरूम का दरवाज़ा अपने आप खुल गया।
अंदर अंधेरा था।
फर्श पर पानी फैला हुआ था।
नैना ने टॉर्च जलाई।
पानी के बीच एक लड़की खड़ी थी।
उसके बाल चेहरे पर चिपके हुए थे। कपड़े पुराने और भीगे हुए थे। चेहरा सफेद था और आँखों के नीचे गहरे काले निशान थे।
नैना का गला सूख गया।
कबीर: “पीछे हट।”
लड़की ने धीरे-धीरे अपना चेहरा उठाया।
वह मीरा थी।
नैना ने काँपते हुए पूछा—
नैना: “तुम मीरा हो?”
मीरा ने कुछ नहीं कहा।
नैना ने डायरी का वाक्य याद किया।
नैना: “तुम यहाँ मरी कैसे?”
मीरा की आँखों में अचानक डर उभर आया।
उसने होंठ खोले, लेकिन आवाज़ नहीं निकली।
कबीर ने नैना का हाथ पकड़ लिया।
कबीर: “ये मीरा नहीं है।”
मीरा ने धीरे-धीरे अपना सिर घुमाया।
उसकी गर्दन से हड्डी टूटने जैसी आवाज़ आई।
फिर उसने नैना की ओर देखकर कहा—
“मैं तुम्हें नुकसान नहीं पहुँचाना चाहती।”
नैना पीछे नहीं हटी।
नैना: “फिर तुम यहाँ क्यों हो?”
मीरा की आँखों से काला पानी बहने लगा।
मीरा: “क्योंकि मैं यहाँ मरी नहीं थी।”
कमरे की दीवारों पर अचानक कई हाथों के निशान उभर आए।
कबीर ने टॉर्च घुमाई, लेकिन कमरे में मीरा के अलावा कोई नहीं था।
नैना: “तुम्हारे साथ क्या हुआ?”
मीरा ने अपनी छाती पर हाथ रखा।
मीरा: “उन्होंने मुझे कमरे में बंद किया था। कहा था कि अगर मैं बाहर आई, तो वह मेरे अंदर आ जाएगी।”
नैना: “कौन?”
मीरा ने सीधे नैना की ओर देखा।
मीरा: “शालिनी।”
कमरे की हवा अचानक भारी हो गई।
कबीर ने फुसफुसाकर पूछा—
कबीर: “शालिनी कौन है?”
मीरा ने जवाब नहीं दिया। वह धीरे-धीरे नैना के करीब आई।
मीरा: “तुम उसे जानती हो।”
नैना: “मैंने उसे कभी नहीं देखा।”
मीरा ने हाथ उठाकर नैना के माथे को छुआ।
नैना की आँखों के सामने अचानक एक पुराना दृश्य उभरा।
वह छोटी बच्ची थी। उसके हाथ में लाल रिबन था। उसके सामने एक और लड़की खड़ी थी—शायद मीरा, लेकिन वह भी बच्ची थी।
उन दोनों के पीछे एक औरत खड़ी थी।
उसके चेहरे पर सफेद घूँघट था।
औरत ने नैना से कहा था—
“अगर तुमने इसे बाहर निकाला, तो तुम्हारी यादें मिटा दूँगी।”
नैना ने बच्ची का हाथ छोड़ दिया था।
फिर कमरे का दरवाज़ा बंद हो गया था।
नैना चीखते हुए वर्तमान में लौट आई।
मीरा उसके सामने खड़ी थी।
मीरा: “तुम उस रात यहाँ थीं।”
नैना: “मुझे कुछ याद नहीं।”
मीरा: “यादें मिटाई गई थीं।”
कबीर ने मीरा की ओर देखा।
कबीर: “तुम हमें सच क्यों बता रही हो?”
मीरा ने उसकी ओर देखा।
कुछ पल के लिए उसके चेहरे पर अजीब-सी मुस्कान आई।
मीरा: “क्योंकि अब समय कम है।”
नैना: “किसका समय?”
मीरा ने फर्श की ओर इशारा किया।
पानी धीरे-धीरे फैलते हुए कमरे के बीच तक आ चुका था। पानी में नैना का प्रतिबिंब दिखाई दे रहा था।
लेकिन प्रतिबिंब में नैना अकेली नहीं थी।
उसके पीछे एक और लड़की खड़ी थी।
वह लड़की शालिनी जैसी दिख रही थी।
मीरा ने फुसफुसाकर कहा—
“वह तुम्हें ढूँढ रही है।”
अचानक मीरा का चेहरा बदलने लगा।
उसकी त्वचा पर दरारें उभर आईं।
आँखें गहरी हो गईं।
कुछ ही सेकंड में उसके चेहरे पर शालिनी का चेहरा दिखाई देने लगा।
कबीर ने नैना को पीछे खींच लिया।
कबीर: “ये मीरा नहीं है!”
लेकिन बदला हुआ चेहरा मुस्कुरा रहा था।
शालिनी: “तुम दोनों हमेशा देर से समझते हो।”
नैना ने काँपते हुए पूछा—
नैना: “तुमने मीरा के साथ क्या किया?”
शालिनी ने सिर झुकाया।
शालिनी: “मीरा ने खुद को बचाने की कोशिश की। लेकिन उसने तुम्हें बचाने की कोशिश नहीं की।”
नैना: “झूठ!”
शालिनी: “तुम्हें सच में लगता है कि उस रात तुमने बच्ची का हाथ खुद छोड़ा था?”
नैना का चेहरा पीला पड़ गया।
शालिनी ने धीरे से हाथ उठाया।
कमरे की दीवार पर एक पुरानी तस्वीर उभर आई।
तस्वीर में छोटी नैना कमरे नंबर 13 के बाहर खड़ी थी।
उसके साथ लाल रिबन वाली बच्ची थी।
और उनके पीछे शालिनी खड़ी थी।
तस्वीर के नीचे तारीख लिखी थी—
17 अगस्त, बीस साल पहले।
नैना ने तस्वीर को देखते हुए फुसफुसाया—
“मैं यहाँ पहले आ चुकी हूँ…”
शालिनी मुस्कुराई।
“तुम सिर्फ यहाँ आई नहीं थीं। तुमने दरवाज़ा खोला था।”
अचानक कमरे की सारी लाइटें बंद हो गईं।
अंधेरे में मीरा की आवाज़ सुनाई दी—
“नैना, मेरी तरफ मत देखना!”
लेकिन शालिनी की आवाज़ उसके ठीक पीछे से आई—
“अब मेरी तरफ देखो।”
नैना ने धीरे-धीरे पलटने की कोशिश की।
कबीर ने उसका चेहरा अपनी ओर कर दिया।
कबीर: “मत देख!”
अंधेरे में किसी ने कबीर को जोर से दीवार से टकरा दिया।
नैना चीख उठी।
जब लाइट वापस आई, तो कबीर फर्श पर पड़ा था।
मीरा गायब थी।
कमरे की दीवार पर सिर्फ एक वाक्य लिखा था—
“B-13 की चाबी ढूँढो।”
नैना ने फर्श पर देखा।
पानी के बीच एक पुरानी चाबी पड़ी थी।
चाबी पर उकेरा हुआ था—
B-13
कबीर धीरे-धीरे उठने की कोशिश कर रहा था।
कबीर: “ये बेसमेंट का नंबर है…”
नैना ने चाबी उठा ली।
उसी समय फ्लैट के बाहर से किसी ने दरवाज़े पर दस्तक दी।
ठक… ठक… ठक…
फिर शर्मा जी की आवाज़ आई—
“नैना जी… दरवाज़ा खोलिए। अब आपको सब सच बताने का समय आ गया है।”
नैना और कबीर ने एक-दूसरे को देखा।
दरवाज़े के नीचे से फिर काला पानी अंदर आने लगा।
और पानी में इस बार एक चेहरा दिखाई दे रहा था।
वह चेहरा नैना का था।
लेकिन उसकी आँखें शालिनी जैसी थीं।
एपिसोड समाप्त।

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