Pretika › Haunted Places › वो फ्लैट खाली नहीं था।
एपिसोड 8 — B-13
firoj saifi · Haunted Places · 3 मिनट
- Writer
- firoj saifi
- Story
- वो फ्लैट खाली नहीं था।
- Chapter
- 8 of 15
- Category
- Haunted Places
- Reading time
- 3 min
- Words
- 528
- Language
- Hindi (हिंदी)
- Price
- Free to read
दरवाज़े के बाहर शर्मा जी की आवाज़ अब भी आ रही थी।
“नैना जी… दरवाज़ा खोलिए।”
नैना ने दरवाज़े की तरफ देखा।
कबीर अभी भी फर्श पर बैठा था। उसके माथे पर चोट थी, लेकिन उसकी आँखें लगातार दरवाज़े के नीचे से अंदर आते काले पानी पर टिकी थीं।
कबीर ने धीमी आवाज़ में कहा—
“दरवाज़ा मत खोलना।”
नैना ने चाबी कसकर पकड़ ली।
“लेकिन बाहर शर्मा जी हैं।”
कबीर ने उसकी तरफ देखा।
“शर्मा जी होते… तो पानी अंदर नहीं आता।”
नैना के चेहरे का रंग उड़ गया।
दरवाज़े के नीचे से आता काला पानी अब उनके पैरों तक पहुँच चुका था। उसमें से सड़ी हुई मिट्टी और लोहे जैसी गंध आ रही थी।
बाहर फिर दस्तक हुई।
ठक… ठक… ठक…
“नैना जी… मैं जानता हूँ कि आप अंदर हैं।”
नैना ने कोई जवाब नहीं दिया।
कुछ सेकंड बाद आवाज़ बदल गई।
अब वह शर्मा जी की नहीं थी।
वह नैना की माँ की आवाज़ थी।
“नैना… दरवाज़ा खोल बेटा।”
नैना के हाथ से चाबी लगभग गिर गई।
“माँ…”
कबीर तुरंत उसके सामने आ गया।
“ये तेरी माँ नहीं है।”
नैना की आँखों में आँसू आ गए।
“लेकिन आवाज़ बिल्कुल वही है।”
“यही तो वो चाहती है।”
अचानक दरवाज़े पर जोरदार चोट हुई।
धड़ाम!
दरवाज़ा थोड़ा हिला।
कबीर ने नैना का हाथ पकड़ा।
“हमें यहाँ से निकलना होगा।”
नैना ने चारों तरफ देखा।
“कहाँ?”
कबीर ने B-13 की चाबी दिखाई।
“बेसमेंट।”
दोनों पीछे के रास्ते से फ्लैट से बाहर निकले।
सीढ़ियों पर अंधेरा था।
लिफ्ट काम नहीं कर रही थी।
नीचे जाते समय नैना ने महसूस किया कि उनके पीछे कोई चल रहा है।
धीमे कदम।
छप… छप… छप…
नैना ने पीछे देखा।
कोई नहीं था।
लेकिन सीढ़ियों पर गीले पैरों के निशान बने हुए थे।
वे निशान उनके पीछे-पीछे नीचे आ रहे थे।
बेसमेंट में पहुँचते ही कबीर रुक गया।
सामने दीवार पर कई पुराने नंबर लिखे थे।
B-01…
B-02…
B-03…
आखिर में एक जंग लगा लोहे का दरवाज़ा था।
उस पर लिखा था—
B-13
नैना ने चाबी ताले में लगाई।
चाबी घूम गई।
क्लिक!
दरवाज़ा खुला।
अंदर इतनी ठंड थी कि नैना की साँस दिखाई देने लगी।
कमरे में पुरानी अलमारियाँ थीं।
दीवारों पर तस्वीरें लगी थीं।
नैना ने टॉर्च ऊपर की।
एक तस्वीर।
फिर दूसरी।
फिर तीसरी।
सभी तस्वीरों में लड़कियाँ थीं।
कुछ बहुत छोटी थीं।
कुछ किशोर उम्र की।
कुछ जवान।
हर तस्वीर के नीचे एक तारीख लिखी थी।
कबीर ने एक तस्वीर उठाई।
“ये मीरा है।”
नैना उसके पास गई।
मीरा की तस्वीर के नीचे लिखा था—
17 अगस्त 2018
नैना ने दूसरी तस्वीर देखी।
17 अगस्त 2012
तीसरी—
17 अगस्त 2008
हर कुछ साल में एक लड़की।
कबीर ने धीरे से कहा—
“ये कोई हादसा नहीं था।”
नैना की नजर सामने लगी दीवार पर गई।
वहाँ तेरह फ्रेम थे।
बारह फ्रेम में तस्वीरें थीं।
तेरहवाँ खाली था।
नीचे लिखा था—
अगली।
नैना का दिल तेजी से धड़कने लगा।
“कबीर…”
कबीर ने उसकी ओर देखा।
“हाँ?”
नैना ने खाली फ्रेम की तरफ इशारा किया।
उस पर ताजा लाल रंग से एक नाम लिखा था।
नैना।
अचानक पीछे से दरवाज़ा बंद हो गया।
धड़ाम!
नैना दौड़कर दरवाज़े तक गई।
“खोलो!”
कबीर ने हैंडल घुमाया।
दरवाज़ा नहीं खुला।
तभी कमरे में किसी बच्ची की हँसी गूँजी।
“ही… ही… ही…”
नैना ने टॉर्च घुमाई।
कोने में लाल रिबन पड़ा था।
वही लाल रिबन।
जो उसने अपने सपनों में देखा था।
कबीर ने धीरे से कहा—
“नैना… इसे मत छूना।”
लेकिन लाल रिबन अपने आप हवा में उठ गया।
वह धीरे-धीरे नैना की तरफ आया।
और उसके हाथ पर लिपट गया।
नैना चीख पड़ी।
उसी समय कमरे की दीवार से आवाज़ आई—
“तुम दोनों में से एक पहले से मर चुका है।”
कबीर बिल्कुल शांत हो गया।
नैना ने उसकी तरफ देखा।
“क्या मतलब?”
कबीर ने कोई जवाब नहीं दिया।
उसका चेहरा पहली बार डर से भर गया था।
और तभी दीवार पर लगी बारहों तस्वीरों की आँखें एक साथ नैना की तरफ घूम गईं।
एपिसोड समाप्त।