PretikaHaunted Placesवो फ्लैट खाली नहीं था।

एपिसोड 9 — कबीर की मौत

firoj saifi · Haunted Places · 3 मिनट

Writer
firoj saifi
Story
वो फ्लैट खाली नहीं था।
Chapter
9 of 15
Category
Haunted Places
Reading time
3 min
Words
496
Language
Hindi (हिंदी)
Price
Free to read

बेसमेंट में बंद होने के बाद नैना को पहली बार महसूस हुआ कि कबीर कुछ छिपा रहा है।
दीवार से आई आवाज़ अब बंद हो चुकी थी।
कमरे में सिर्फ दोनों की साँसों की आवाज़ थी।
नैना ने कबीर की तरफ देखा।
“तू मुझसे क्या छिपा रहा है?”
कबीर ने नजरें फेर लीं।
“कुछ नहीं।”
“झूठ।”
“नैना…”
“उस आवाज़ ने कहा था—हम दोनों में से एक पहले से मर चुका है।”
कबीर चुप रहा।
नैना उसके करीब गई।
“वो तेरे बारे में था?”
कबीर ने सिर उठाया।
उसकी आँखों में ऐसा दर्द था जिसे नैना ने पहले कभी नहीं देखा था।
“हमें पहले यहाँ से निकलना चाहिए।”
“नहीं।”
नैना ने उसका हाथ पकड़ लिया।
“पहले सच।”
कबीर ने धीरे से अपना हाथ छुड़ा लिया।
“तू सच जान जाएगी तो शायद मुझसे नफरत करेगी।”
“मैं तुझसे कभी नफरत नहीं करूँगी।”
कबीर मुस्कुराया।
“तू ये बात याद रखना।”
अचानक बेसमेंट की लाइट जल उठी।
दरवाज़ा खुला हुआ था।
दोनों बाहर आए।
लेकिन वहाँ कोई नहीं था।
नैना ने तुरंत शर्मा जी को फोन किया।
फोन बंद था।
फिर उसने कबीर से कहा—
“मैं तेरे घर चल रही हूँ।”
कबीर ने उसे रोकने की कोशिश की।
“अभी नहीं।”
“अभी।”
दोनों शहर के दूसरे हिस्से में कबीर के घर पहुँचे।
नैना ने दरवाज़ा खटखटाया।
एक बुजुर्ग महिला ने दरवाज़ा खोला।
नैना ने मुस्कुराकर कहा—
“आंटी, कबीर घर पर है?”
महिला कुछ सेकंड उसे देखती रही।
फिर उसकी आँखें भर आईं।
“तुम नैना हो?”
नैना का चेहरा बदल गया।
“जी।”
महिला ने उसका हाथ पकड़ लिया।
“तुम इतने दिनों बाद आई हो।”
“इतने दिनों बाद?”
महिला रोने लगी।
“कबीर को गए दो महीने हो गए।”
नैना के कानों में जैसे धमाका हुआ।
“क्या?”
“दो महीने पहले उसका एक्सीडेंट हुआ था।”
नैना पीछे हट गई।
“नहीं… ये गलत है।”
महिला ने अंदर से एक तस्वीर निकाली।
तस्वीर में कबीर था।
उसके नीचे तारीख लिखी थी।
12 जून।
नैना ने काँपते हुए पूछा—
“आंटी… कबीर की मौत कब हुई?”
महिला ने जवाब दिया—
“12 जून की रात।”
नैना के हाथ काँपने लगे।
आज 18 अगस्त था।
दो महीने।
वह पीछे हटते हुए दीवार से लग गई।
“नहीं…”
उसके दिमाग में पिछले दो महीनों की सारी बातें घूमने लगीं।
कबीर उसके साथ था।
फोन पर बात करता था।
उसके फ्लैट में आता था।
उसे छूता था।
उसके साथ खाना खाता था।
लेकिन…
किसी और ने उसे कभी नहीं देखा था।
नैना धीरे से बाहर निकली।
सड़क पर कबीर खड़ा था।
वही कपड़े।
वही चेहरा।
वही मुस्कान।
“तुझे सच पता चल गया?”
नैना कुछ बोल नहीं पाई।
कबीर उसके पास आया।
“मैं तुझे बताना चाहता था।”
नैना की आँखों से आँसू निकल आए।
“तू मर चुका है?”
कबीर ने सिर झुका लिया।
“हाँ।”
“फिर मेरे साथ क्यों है?”
“क्योंकि उस रात मैं भी कमरे नंबर 13 में गया था।”
“क्यों?”
“मीरा को ढूँढने।”
नैना ने उसका हाथ पकड़ लिया।
इस बार उसका हाथ ठंडा था।
बहुत ठंडा।
“तूने मुझे पहले क्यों नहीं बताया?”
कबीर ने कहा—
“क्योंकि मुझे डर था कि सच पता चलते ही तू अकेली पड़ जाएगी।”
नैना रोते हुए बोली—
“तू मेरे साथ रह सकता है?”
कबीर ने हल्की मुस्कान दी।
“जब तक वो मुझे रहने दे।”
अचानक सड़क की लाइटें बंद हो गईं।
कबीर का चेहरा कुछ सेकंड के लिए धुंधला हुआ।
उसके पीछे वही काली परछाईं खड़ी थी।
नैना ने उसे देखा।
कबीर ने तुरंत कहा—
“उस तरफ मत देख।”
लेकिन देर हो चुकी थी।
परछाईं ने धीरे-धीरे अपना हाथ उठाया।
और कबीर की गर्दन पर काले निशान उभर आए।
कबीर दर्द से झुक गया।
नैना चीखी—
“कबीर!”
परछाईं गायब हो गई।
कबीर ने मुश्किल से कहा—
“अब उसके पास मेरी जगह भी है।”
नैना ने पूछा—
“किसके पास?”
कबीर ने कमरे नंबर 13 की दिशा में देखा।
“शालिनी के।”
एपिसोड समाप्त।

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