Pretika › Haunted Places › वो फ्लैट खाली नहीं था।
एपिसोड 10 — मृत दोस्त
firoj saifi · Haunted Places · 3 मिनट
नैना वापस फ्लैट में आई तो रात के लगभग दो बज चुके थे।
कबीर उसके साथ था।
लेकिन अब सब कुछ अलग था।
नैना उसे देखती तो उसे दोस्त नहीं, एक ऐसी आत्मा दिखाई देती थी जो दो महीने से उसके साथ चल रही थी।
कबीर खिड़की के पास खड़ा था।
नैना ने पूछा—
“तू यहाँ क्यों रुका हुआ है?”
“क्योंकि मेरा काम पूरा नहीं हुआ।”
“क्या काम?”
कबीर ने उसकी ओर देखा।
“तुझे बचाना।”
“मुझसे क्या बचाना है?”
कबीर कुछ देर चुप रहा।
फिर बोला—
“तू इस कहानी की अगली शिकार नहीं है।”
“तो क्या हूँ?”
“आखिरी दरवाज़ा।”
नैना के चेहरे पर डर उतर आया।
“मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा।”
कबीर ने मेज पर मीरा की डायरी रखी।
“मीरा ने कमरे नंबर 13 के बारे में जितना लिखा था, वो पूरा सच नहीं था।”
“क्यों?”
“क्योंकि कुछ बातें उसने जानबूझकर छिपाईं।”
नैना ने डायरी खोली।
एक पन्ने पर सिर्फ एक चित्र बना था।
एक गोल घेरा।
उसके चारों तरफ तेरह नाम।
बीच में लिखा था—
वापसी।
नैना ने पूछा—
“ये क्या है?”
कबीर बोला—
“बीस साल पहले यहाँ एक पूजा हुई थी।”
“किसने?”
“शालिनी ने।”
“क्यों?”
कबीर ने जवाब देने से पहले आईने की तरफ देखा।
“अपनी बहन को वापस लाने के लिए।”
अचानक आईने में नैना और कबीर के अलावा एक तीसरी आकृति दिखाई दी।
एक औरत।
सफेद घूँघट।
नैना पलटी।
वहाँ कोई नहीं था।
फिर आईने में वह औरत मुस्कुराई।
कबीर ने कहा—
“वो आ गई।”
नैना ने धीरे से पूछा—
“शालिनी?”
आईने में औरत ने अपना घूँघट उठाया।
लेकिन चेहरा शालिनी का नहीं था।
वह नैना का चेहरा था।
नैना पीछे हट गई।
“ये क्या है?”
कबीर ने कहा—
“वो तुझे अपना चेहरा दिखा रही है।”
“क्यों?”
“क्योंकि उसे तेरा चेहरा चाहिए।”
आईना अचानक टूट गया।
काँच के टुकड़े फर्श पर गिर गए।
एक टुकड़े पर खून से शब्द उभरने लगे—
तुम आखिरी हो।
नैना ने पूछा—
“आखिरी क्या?”
कबीर ने कहा—
“आखिरी लड़की।”
“तेरहवीं?”
“हाँ।”
नैना की साँस रुक गई।
“लेकिन मीरा तो बारहवीं थी।”
“शायद।”
“शायद?”
कबीर ने डायरी का आखिरी हिस्सा खोला।
एक नाम लाल स्याही से लिखा था—
नैना — 17 अगस्त।
नैना ने कहा—
“ये बीस साल पुरानी तारीख है।”
“हाँ।”
“तो उस समय मुझे क्यों लिखा गया था?”
कबीर ने जवाब दिया—
“क्योंकि तू उस रात यहाँ थी।”
नैना ने सिर पकड़ लिया।
उसे अचानक एक आवाज़ सुनाई दी।
एक बच्ची रो रही थी।
“नैना… मुझे बाहर निकालो।”
नैना ने आँखें बंद कर लीं।
उसे लाल रिबन वाली बच्ची दिखाई दी।
“तुमने वादा किया था।”
नैना ने फुसफुसाया—
“मैं वापस आऊँगी।”
कबीर ने पूछा—
“क्या देखा?”
नैना ने आँखें खोलीं।
“मीरा अकेली नहीं थी।”
“कौन था?”
“एक और बच्ची।”
“कौन?”
नैना ने कहा—
“अनु।”
कबीर का चेहरा बदल गया।
“अनु?”
“शालिनी की बहन।”
उसी समय कमरे की सारी दीवारों पर एक साथ दस्तक होने लगी।
ठक…
ठक…
ठक…
फिर एक महिला की आवाज़ आई—
“अब तुम्हें सब याद आएगा।”
नैना ने पूछा—
“कौन हो तुम?”
आवाज़ आई—
“जिसे तुम्हारी माँ ने रोकने की कोशिश की थी।”
और तभी कमरे के बीच एक काली परछाईं खड़ी हो गई।
उसके पीछे एक महिला की आकृति थी।
शालिनी।
उसने कहा—
“बीस साल पहले मैंने एक गलती की थी।”
“और आज तुम उसे पूरा करोगी।”
एपिसोड समाप्त।
- Writer
- firoj saifi
- Story
- वो फ्लैट खाली नहीं था।
- Chapter
- 10 of 20
- Category
- Haunted Places
- Reading time
- 3 min
- Words
- 534
- Language
- Hindi (हिंदी)
- Price
- Free to read
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