Pretika › Haunted Places › वो फ्लैट खाली नहीं था।
एपिसोड 11 — बीस साल पहले
firoj saifi · Haunted Places · 3 मिनट
बीस साल पहले।
17 अगस्त की रात।
तेज बारिश हो रही थी।
शिव रेजिडेंसी तब एक पुरानी हवेली थी।
उस हवेली में शालिनी अपनी छोटी बहन अनु के साथ रहती थी।
अनु सिर्फ नौ साल की थी।
एक रात उसे अचानक तेज बुखार आया।
कुछ घंटों में उसकी हालत बिगड़ गई।
डॉक्टर आए।
लेकिन उसे बचाया नहीं जा सका।
अनु की मौत हो गई।
शालिनी टूट गई।
उसने कई दिनों तक कमरे से बाहर कदम नहीं रखा।
लेकिन एक रात किसी ने उसे बताया कि मृत व्यक्ति को वापस लाने की एक विधि होती है।
तेरह आत्माएँ।
एक शरीर।
और एक ऐसा दरवाज़ा जो इस दुनिया और दूसरी दुनिया के बीच खुलता है।
शालिनी ने उस आदमी पर विश्वास कर लिया।
वह एक तांत्रिक था।
उसने कहा—
“अगर तुम अपनी बहन को वापस चाहती हो, तो तुम्हें डर से ऊपर उठना होगा।”
शालिनी ने पूछा—
“कितनी कीमत?”
तांत्रिक ने कहा—
“तेरह।”
“तेरह क्या?”
“तेरह ज़िंदगियाँ।”
शालिनी पीछे हट गई।
“नहीं।”
लेकिन उसने एक और बात कही—
“अगर तुमने यह नहीं किया, तो अनु हमेशा के लिए चली जाएगी।”
शालिनी ने अनु की तस्वीर देखी।
उसकी आँखों में आँसू थे।
फिर उसने हाँ कर दी।
रात के बारह बजे हवेली के नीचे एक कमरा तैयार किया गया।
वही कमरा जिसे बाद में कमरा नंबर 13 कहा गया।
दीवारों पर तेरह निशान बनाए गए।
बारह जगहों पर दीपक जलाए गए।
बीच में अनु की तस्वीर रखी गई।
शालिनी ने मंत्र पढ़ना शुरू किया।
पहले हवा चली।
फिर कमरे का तापमान गिरा।
दीवारों पर खरोंचें आने लगीं।
शालिनी चिल्लाई—
“अनु!”
एक छोटी बच्ची की आवाज़ आई।
“दीदी…”
शालिनी की आँखों में खुशी आ गई।
“अनु?”
आवाज़ फिर आई—
“दीदी, दरवाज़ा खोलो।”
शालिनी दरवाज़े की तरफ बढ़ी।
लेकिन तांत्रिक ने उसका हाथ पकड़ लिया।
“रुको।”
“क्यों?”
“ये अनु नहीं है।”
अचानक कमरे की दीवारों पर खून फैलने लगा।
दीपक एक-एक करके बुझने लगे।
आवाज़ बदल गई।
अब वह बच्ची की आवाज़ नहीं थी।
एक गहरी आवाज़ थी।
“मुझे शरीर चाहिए।”
शालिनी पीछे हट गई।
“तुम कौन हो?”
आवाज़ हँसी।
“तुमने मुझे बुलाया।”
शालिनी समझ गई कि उसने गलती कर दी है।
तांत्रिक भागने लगा।
लेकिन दरवाज़ा बंद हो चुका था।
काली परछाईं उसके पीछे पहुँची।
उसकी चीख पूरे घर में गूँज उठी।
शालिनी ने भागकर बाहर जाने की कोशिश की।
तभी उसे एक बच्ची दिखाई दी।
वह नैना थी।
छोटी नैना।
उसके हाथ में लाल रिबन था।
उसके पीछे छोटी मीरा खड़ी थी।
मीरा रो रही थी।
“नैना, मुझे बाहर ले चलो।”
शालिनी ने नैना के सामने हाथ उठाया।
“अगर तुमने इसे बाहर निकाला…”
वह नैना के माथे पर उंगली रखकर बोली—
“तुम्हारी सारी यादें मिट जाएँगी।”
छोटी नैना डर गई।
उसने मीरा का हाथ छोड़ दिया।
दरवाज़ा बंद हो गया।
और कमरे में काली परछाईं जाग गई।
उस रात बारह लोगों की मौत हुई।
लेकिन तेरहवीं जगह खाली रह गई।
क्योंकि नैना बच गई थी।
शालिनी ने उसे खोजने की कोशिश की।
लेकिन नैना की माँ उसे शहर से दूर ले गई।
कमरा बंद कर दिया गया।
बीस साल तक।
लेकिन दरवाज़ा पूरी तरह बंद नहीं हुआ था।
क्योंकि तेरहवीं आत्मा अभी बाकी थी।
वर्तमान में नैना ने आँखें खोलीं।
उसके सामने शालिनी खड़ी थी।
“तुम्हें अब याद आने लगा है।”
नैना ने पूछा—
“तुमने अनु को क्यों नहीं बचाया?”
शालिनी की आँखों में पहली बार दर्द दिखाई दिया।
“क्योंकि जो आया था… वो अनु नहीं था।”
कबीर ने पूछा—
“तो फिर क्या था?”
शालिनी ने उसकी तरफ देखा।
“वही… जो अब नैना के अंदर आना चाहता है।”
एपिसोड समाप्त।
- Writer
- firoj saifi
- Story
- वो फ्लैट खाली नहीं था।
- Chapter
- 11 of 20
- Category
- Haunted Places
- Reading time
- 3 min
- Words
- 577
- Language
- Hindi (हिंदी)
- Price
- Free to read
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