PretikaHaunted Placesवो फ्लैट खाली नहीं था।

एपिसोड 12 — असली चेहरा

firoj saifi · Haunted Places · 3 मिनट

Writer
firoj saifi
Story
वो फ्लैट खाली नहीं था।
Chapter
12 of 15
Category
Haunted Places
Reading time
3 min
Words
485
Language
Hindi (हिंदी)
Price
Free to read

कमरे में सन्नाटा था।
नैना शालिनी को देख रही थी।
“अगर वो अनु नहीं थी… तो तुमने उसे क्यों बुलाया?”
शालिनी ने कहा—
“मैंने उसे नहीं बुलाया था। मैंने सिर्फ दरवाज़ा खोला था।”
“फिर वो चीज़ कहाँ से आई?”
“दूसरी तरफ से।”
कबीर ने पूछा—
“दूसरी तरफ क्या है?”
शालिनी मुस्कुराई।
“वहाँ कोई इंसान नहीं रहता।”
नैना ने मीरा की डायरी उठाई।
“मीरा ने तुम्हारा नाम क्यों लिखा?”
“क्योंकि उसने मुझे देखा था।”
“तुमने उसे मारा?”
शालिनी चुप रही।
नैना ने फिर पूछा—
“मीरा को तुमने कमरे में बंद किया था?”
शालिनी ने कहा—
“हाँ।”
“क्यों?”
“क्योंकि वो उसे देख चुकी थी।”
“किसे?”
शालिनी ने कमरे की दीवार की तरफ देखा।
“जिसे तुम सिर्फ परछाईं समझती हो।”
अचानक कमरे की लाइट बंद हो गई।
अंधेरे में मीरा की आवाज़ आई—
“नैना…”
नैना चौंक गई।
“मीरा?”
“मेरे नाम पर भरोसा मत करना।”
कबीर ने नैना को पीछे किया।
“ये फिर से चाल है।”
लाइट वापस आई।
मीरा सामने खड़ी थी।
लेकिन इस बार उसका चेहरा शांत था।
“नैना, मैं तुम्हें सच बताने आई हूँ।”
नैना ने पूछा—
“तुम्हारे साथ क्या हुआ?”
मीरा ने कहा—
“मुझे कमरे में बंद किया गया था।”
“किसने?”
मीरा ने शालिनी की तरफ देखा।
“उसने।”
शालिनी चुप रही।
मीरा ने आगे कहा—
“लेकिन शालिनी ने मुझे मारना नहीं चाहा था।”
नैना ने आश्चर्य से पूछा—
“फिर?”
“वो मुझे उस चीज़ से बचा रही थी।”
कबीर ने पूछा—
“तो तुम शालिनी के खिलाफ क्यों थीं?”
मीरा ने जवाब दिया—
“क्योंकि मुझे पता नहीं था कि वो मुझे बचा रही है।”
शालिनी की आँखों में आँसू आ गए।
“मीरा…”
मीरा ने उसकी तरफ देखा।
“बहुत देर कर दी।”
फिर मीरा ने नैना की तरफ देखा।
“अब वो तुम्हारे पीछे है।”
नैना ने पूछा—
“कौन?”
मीरा का चेहरा अचानक बदलने लगा।
उसकी आँखें काली हो गईं।
उसकी त्वचा पर दरारें आने लगीं।
वह मुस्कुराई।
और अगले ही पल उसके चेहरे पर शालिनी का चेहरा दिखाई देने लगा।
कबीर चिल्लाया—
“नैना, पीछे!”
नैना ने पलटकर देखा।
दीवार पर उसकी परछाईं नहीं थी।
उसकी जगह एक दूसरी परछाईं थी।
उस परछाईं के सिर पर लाल रिबन था।
नैना धीरे-धीरे पीछे हटने लगी।
“ये क्या है?”
शालिनी बोली—
“वो तुम्हारे अंदर आने की कोशिश कर रही है।”
“क्यों?”
“क्योंकि तुमने उसे बचपन में देखा था।”
“तो?”
“जिस इंसान की आँखों ने उसे पहली बार देखा… उसी शरीर को वो सबसे मजबूत दरवाज़ा मानती है।”
नैना की आँखें भर आईं।
“मैंने क्या किया था?”
शालिनी ने कहा—
“तुमने कमरे का दरवाज़ा खोला था।”
“मैंने?”
“हाँ।”
“लेकिन क्यों?”
“क्योंकि अंदर मीरा रो रही थी।”
नैना ने आँखें बंद कर लीं।
उसे फिर वही दृश्य दिखाई दिया।
छोटी मीरा।
लाल रिबन।
बंद दरवाज़ा।
और उसके पीछे अंधेरा।
लेकिन इस बार उसे कुछ और दिखाई दिया।
दरवाज़े के अंदर मीरा अकेली नहीं थी।
एक छोटी लड़की उसके पीछे खड़ी थी।
अनु।
नैना ने आँखें खोल दीं।
“अनु…”
शालिनी ने कहा—
“वो मेरी बहन नहीं थी।”
नैना ने पूछा—
“तो कौन थी?”
शालिनी ने जवाब दिया—
“उस चीज़ ने अनु का चेहरा पहन रखा था।”
कमरे की दीवार पर अचानक एक बड़ा दरार बन गया।
उस दरार के अंदर से काली धुंध बाहर आने लगी।
कबीर ने नैना का हाथ पकड़ा।
“हमें यहाँ से जाना होगा।”
शालिनी ने कहा—
“जाओ।”
नैना ने उसे देखा।
“तुम?”
“मेरा समय खत्म हो चुका है।”
“लेकिन मुझे अभी सच चाहिए।”
शालिनी ने धीरे से कहा—
“सच कमरे नंबर 13 में है।”
अचानक जमीन काँपने लगी।
मीरा गायब हो गई।
शालिनी भी गायब हो गई।
और दीवार पर सिर्फ एक वाक्य रह गया—
“तेरहवाँ नाम याद करो।”
नैना ने नीचे देखा।
फर्श पर पानी में उसका चेहरा था।
लेकिन पानी में उसकी आँखें शालिनी जैसी थीं।
कबीर ने फुसफुसाकर कहा—
“अब वो तेरे अंदर है।”
एपिसोड समाप्त।

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