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एपिसोड 13 — नैना का अतीत
firoj saifi · Haunted Places · 3 मिनट
- Writer
- firoj saifi
- Story
- वो फ्लैट खाली नहीं था।
- Chapter
- 13 of 15
- Category
- Haunted Places
- Reading time
- 3 min
- Words
- 481
- Language
- Hindi (हिंदी)
- Price
- Free to read
नैना पूरी रात सो नहीं सकी।
उसके दिमाग में एक ही सवाल घूम रहा था—
अगर वह बीस साल पहले यहाँ थी, तो उसे कुछ याद क्यों नहीं था?
सुबह होते ही उसने अपनी माँ के पुराने सामान तलाशने शुरू किए।
एक पुराना संदूक मिला।
उसमें कपड़े, कुछ तस्वीरें और पुराने कागज़ थे।
सबसे नीचे एक लिफाफा था।
उस पर लिखा था—
नैना के लिए — अगर उसे सब याद आने लगे।
नैना के हाथ काँप गए।
उसने लिफाफा खोला।
अंदर उसकी माँ का पत्र था।
“नैना,
अगर तुम यह पढ़ रही हो, तो इसका मतलब है कि शिव रेजिडेंसी तुम्हें वापस बुला चुकी है।”
नैना की साँस रुक गई।
“बीस साल पहले मैं तुम्हें वहाँ से लेकर भागी थी। तुम सिर्फ सात साल की थीं। तुम्हें कुछ याद नहीं था। मैंने जानबूझकर तुम्हारी यादें दबा दी थीं।”
नैना ने पत्र पढ़ना जारी रखा।
“तुमने कमरे नंबर 13 का दरवाज़ा खोला था। अंदर मीरा थी। लेकिन मीरा के पीछे कुछ और था।”
नैना की आँखों के सामने वही बच्ची आ गई।
लाल रिबन वाली बच्ची।
पत्र में आगे लिखा था—
“शालिनी ने तुम्हें रोकने की कोशिश की थी। लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी।”
नैना रोने लगी।
“तुम्हारी माँ ने उस चीज़ को खत्म करने की कोशिश की, लेकिन वह नहीं मरी। उसने सिर्फ अपना रास्ता बदल लिया।”
कबीर उसके पीछे खड़ा था।
“तेरी माँ को सब पता था।”
नैना ने पत्र नीचे रखा।
“फिर उसने मुझे कभी बताया क्यों नहीं?”
“क्योंकि वो चाहती थी कि तू सामान्य जिंदगी जी सके।”
नैना ने दूसरा कागज़ निकाला।
उस पर एक पुराना नक्शा था।
शिव रेजिडेंसी का।
नीचे लिखा था—
कमरा 13 के नीचे एक और कमरा है।
कबीर ने कहा—
“हमें वहीं जाना होगा।”
शाम को दोनों वापस बिल्डिंग पहुँचे।
बेसमेंट खाली था।
B-13 का दरवाज़ा खुला था।
अंदर तेरह तस्वीरें अब दीवार पर नहीं थीं।
सिर्फ खाली फ्रेम थे।
नैना ने एक फ्रेम को छुआ।
अचानक उसके सामने बचपन का दृश्य खुल गया।
छोटी नैना और मीरा हाथ पकड़े खड़ी थीं।
मीरा रो रही थी।
“मुझे बाहर ले चलो।”
नैना ने कहा—
“मैं वापस आऊँगी।”
“पक्का?”
“पक्का।”
लेकिन तभी सफेद घूँघट वाली शालिनी आई।
“तुम अगर इसे बाहर ले गई…”
उसने नैना के माथे पर हाथ रखा।
“तुम सब भूल जाओगी।”
छोटी नैना ने डरकर मीरा का हाथ छोड़ दिया।
लेकिन इस बार दृश्य में एक और बात दिखाई दी।
दरवाज़े के पीछे कोई तीसरा खड़ा था।
काली परछाईं।
वह छोटी नैना को देख रही थी।
फिर उसने हाथ बढ़ाया।
नैना अचानक वर्तमान में लौट आई।
वह चीखते हुए पीछे हट गई।
कबीर ने उसे संभाला।
“क्या हुआ?”
“वो… मुझे बचपन से जानती थी।”
“कौन?”
“वो चीज़।”
दीवार के पीछे से आवाज़ आई—
“तुमने मुझे देखा था।”
नैना ने कहा—
“तुम कौन हो?”
आवाज़ बोली—
“तुम्हारा पहला डर।”
अचानक फर्श खुल गया।
नीचे सीढ़ियाँ दिखाई दीं।
कबीर ने टॉर्च नीचे की।
बहुत गहराई तक जाती सीढ़ियाँ।
नैना ने कहा—
“ये नक्शे में नहीं था।”
कबीर बोला—
“क्योंकि इसे किसी को दिखाना नहीं था।”
दोनों नीचे उतरने लगे।
हर सीढ़ी पर एक नाम लिखा था।
पहली—
मीरा।
दूसरी—
अनु।
तीसरी—
शालिनी।
फिर एक नाम देखकर नैना रुक गई।
कबीर।
उसने उसकी तरफ देखा।
कबीर चुप था।
“तेरा नाम यहाँ क्यों है?”
कबीर ने धीरे से कहा—
“क्योंकि मेरी मौत उसी कमरे में हुई थी।”
नैना की आँखें फैल गईं।
सीढ़ियों के नीचे एक दरवाज़ा था।
उस पर लिखा था—
असली कमरा 13।
दरवाज़ा अपने आप खुल गया।
अंदर से किसी बच्ची की आवाज़ आई—
“नैना… इस बार मेरा हाथ मत छोड़ना।”
एपिसोड समाप्त।