PretikaHaunted Placesवो फ्लैट खाली नहीं था।

एपिसोड 20 — वो फ्लैट खाली नहीं था

firoj saifi · Haunted Places · 3 मिनट

Writer
firoj saifi
Story
वो फ्लैट खाली नहीं था।
Chapter
20 of 20
Category
Haunted Places
Reading time
3 min
Words
449
Language
Hindi (हिंदी)
Price
Free to read

छह महीने बाद।

नैना ने शहर बदल दिया था।

नई नौकरी।

नया घर।

नई जिंदगी।

उसने शिव रेजिडेंसी का नाम तक अपनी जिंदगी से निकाल दिया था।

उस घर में कोई पुरानी तस्वीर नहीं थी।

कोई आईना बेडरूम के सामने नहीं था।

और उसने कभी रात में खिड़की खुली नहीं छोड़ी।

धीरे-धीरे जिंदगी सामान्य होने लगी।

एक शाम नैना पुराने सामान के डिब्बे खोल रही थी।

उसे मीरा की डायरी मिली।

वही डायरी।

वह उसे देखकर कुछ सेकंड चुप रही।

फिर उसने डायरी खोल ली।

आखिरी पन्ना अभी भी खाली था।

नैना ने राहत की साँस ली।

“सब खत्म हो गया।”

उसने डायरी बंद कर दी।

लेकिन कुछ सेकंड बाद उसे लगा जैसे अंदर से कागज़ पलटने की आवाज़ आई।

फड़फड़…

फड़फड़…

नैना ने डायरी खोली।

आखिरी पन्ने पर अब शब्द लिखे जा रहे थे।

एक-एक करके।

“तुमने दरवाज़ा बंद कर दिया।”

नैना का दिल तेजी से धड़कने लगा।

दूसरी लाइन आई—

“लेकिन खिड़की खुली छोड़ दी।”

नैना ने तुरंत खिड़की की तरफ देखा।

खिड़की बंद थी।

उसने राहत की साँस ली।

फिर—

ठक…

ठक…

ठक…

खिड़की पर दस्तक हुई।

नैना जम गई।

धीरे-धीरे वह खिड़की के पास गई।

बाहर कोई नहीं था।

नीचे सड़क खाली थी।

उसने पर्दा हटाया।

काँच में उसका प्रतिबिंब दिखाई दिया।

लेकिन…

प्रतिबिंब मुस्कुरा रहा था।

नैना नहीं।

नैना पीछे हट गई।

प्रतिबिंब ने अपना हाथ उठाया।

नैना ने हाथ नहीं उठाया।

प्रतिबिंब ने होंठ हिलाए।

“नैना…”

नैना ने तुरंत पर्दा गिरा दिया।

उसी समय फोन बजा।

स्क्रीन पर नंबर देखकर उसका दिल रुक गया।

कमरा 407

नैना ने फोन नहीं उठाया।

फोन फिर बजा।

फिर।

फिर।

आखिर उसने कॉल रिसीव कर ली।

दूसरी तरफ कुछ सेकंड खामोशी रही।

फिर एक आवाज़ आई।

“नैना…”

उसकी आँखों में आँसू आ गए।

“कबीर?”

आवाज़ बहुत धीमी थी।

“दरवाज़ा मत खोलना।”

नैना ने पूछा—

“क्यों?”

कुछ सेकंड चुप्पी रही।

फिर कबीर बोला—

“क्योंकि इस बार…”

उसकी आवाज़ काँप रही थी।

“वो बाहर नहीं है।”

नैना का चेहरा सफेद पड़ गया।

“तो कहाँ है?”

फोन के दूसरी तरफ कबीर ने कहा—

“तुम्हारे अंदर।”

कॉल कट गई।

नैना ने धीरे-धीरे फोन नीचे किया।

कमरे में बिल्कुल सन्नाटा था।

फिर पीछे से किसी ने फुसफुसाया—

“नैना…”

उसने आँखें बंद कर लीं।

“नहीं।”

आवाज़ फिर आई।

“इस बार मुझे पहचानो।”

नैना ने धीरे-धीरे पलटकर देखा।

कमरे के कोने में एक लड़की खड़ी थी।

लाल रिबन।

भीगे बाल।

सफेद चेहरा।

लेकिन चेहरा…

नैना का था।

वह लड़की मुस्कुराई।

“तुमने मुझे बीस साल पहले दरवाज़े के बाहर छोड़ दिया था।”

नैना पीछे हटती गई।

“तुम कौन हो?”

लड़की ने सिर टेढ़ा किया।

“तुम्हारी पहली याद।”

“झूठ।”

“तुम्हारी पहली गलती।”

नैना की आँखों में पुरानी यादें लौटने लगीं।

कमरा नंबर 13।

मीरा।

शालिनी।

अनु।

कबीर।

और वह काली परछाईं।

लड़की धीरे-धीरे उसकी तरफ बढ़ी।

“तुमने दरवाज़ा बंद किया था।”

नैना ने कहा—

“हाँ।”

“लेकिन तुमने खुद को बंद नहीं किया।”

नैना पीछे हटते-हटते दीवार से लग गई।

लड़की उसके सामने आकर रुक गई।

उसने नैना के माथे पर उंगली रखी।

वही जगह।

जहाँ शालिनी ने बीस साल पहले छुआ था।

नैना की आँखों के सामने अंधेरा छाने लगा।

फोन फिर बजा।

इस बार स्क्रीन पर नाम था—

कबीर।

नैना ने फोन उठाया।

दूसरी तरफ कबीर की आवाज़ आई—

“नैना…”

“हाँ?”

“भागो।”

“कहाँ?”

कुछ सेकंड चुप्पी।

फिर कबीर ने कहा—

“जहाँ तुम जा रही हो… वहाँ भी वो पहले से है।”

नैना ने धीरे से सामने देखा।

लाल रिबन वाली लड़की मुस्कुरा रही थी।

उसने नैना के कान के पास आकर फुसफुसाया—

“मैं अंदर हूँ।”

नैना की आँखें फैल गईं।

लाइट बंद हो गई।

तीन दस्तकें सुनाई दीं।

ठक…

ठक…

ठक…

स्क्रीन काली हो गई।

सीज़न 1 समाप्त।

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