PretikaParanormal"रात डेढ़ बजे"

"एपिसोड -7

FARHA KHAN · Paranormal · 5 मिनट

Writer
FARHA KHAN
Story
"रात डेढ़ बजे"
Chapter
7 of 7
Category
Paranormal
Reading time
5 min
Words
925
Language
Hindi (हिंदी)
Price
Free to read

रिया के साथ वह बाबा पास जाने के लिए निकल गई थी।। दिल में ढेर सारे सवाल थे जिनका जवाब कोई नहीं था।।
क्या सब कुछ ठीक होगा?? वह सही कर रही है?? उस बुढ़िया की क्या कहानी होगी?? उसका बच्चा और वह कैसे मरे थे?? कि आज तक वह अपने बच्चे को सीने से लगाए घूम रही थी।। एक आत्मा बनकर।।??

शाम के गहरे रंग माहौल में उतरने लगे थे।। बाबा की छोटी सी कुटिया सुनसान में थी।। ऊबड़ खाबड़ रास्ते पर पांव रखना मुहाल हो रहा था लेकिन अंदर जो खौफ था उसके लिए वह अब कहीं भी जा सकती थी।।

किसी भी दर पर...किसी भी चौखट को खटखटा सकती थी क्योंकि अब उसे राहा का ख्याल था।। अलबत्ता उनकी झोंपड़ी के सामने आ रुकी थी।। रिया उससे एक क़दम आगे थी।। उसी ने दरवाज़ा खटखटाया।।

"कौन..??" अंदर से आवाज़ आई।।

"हमे बाबा से मिलना है।।" रिया ने भी वहीं से जवाब दिया।। मरियम इधर उधर का जायज़ा ले रही थी।।

"मिलने का वक़्त खत्म हो चुका है।।" अंदर से मायूस कर देने वाली आवाज़ आई।। रिया और मरियम एक साथ एक दूसरे को देखन लगी थीं।। कुछ देर के लिए खामोश ही हो गई थीं।। इतनी जल्दी जल्दी में भी वह वक्त पर नहीं आ सकी थीं।।।

"बाबा..।। हम बहुत दूर से आए हैं।। मेहरबानी करके एक बार हमारी बात सुन लीजिए।। आज की रात हमपर बहुत भारी होने वाली है।" आखिरकार मरियम आगे आई थी और उसने इल्तिजाई अंदाज़ में कहा।।
आज कुछ भी पता था कि वह बुढ़िया किस जगह आएगी?? मरियम के घर..रिया के घर या फिर डेरी में।।

"मै बाबा नहीं उनका खादिम हूं।। बाबा यहां नहीं है।।"
बस अब आगे क्या कह सकते थे।। दोनों मायूसी के साथ उस दरवाज़े से हट गई थीं।।
आते वक्त वह दोनों उम्मीद से भरी हुई थीं लेकिन अब जाते हुए दिल बोझिल हो गया था।।
अजीब सा रास्ता था।। धूल से भरा..। कंकड़ी और लंबा रास्ता।। सुनसान और वीरान सा।।
लोग यहीं लेकिन अपनी परेशानियां लेकर आते थे और शायद उसकी तदबीर(समाधान) लेकर जाते थे लेकिन वह यहां से भी खाली जा रही थी।। दिल में डर भी था और बहुत से सवाल भी।।

"अब क्या करेंगे??" रिया ने उसकी तरफ देखते हुए पूछा।।

कार थोड़ी दूर पर ही खड़ी करनी पड़ी थी वरना इस रास्ते पर पंक्चर होना लाज़मी था।। मरियम के पास उसके सवाल का कोई जवाब नहीं था।। वह खुद अंधेरे में डूबी हुई लग रही थी।। खामोशी से कांधे उचका दिए।।

"मेरी वजह से तुम भी मुसीबत में पड़ गईं।।" मरियम ने उसकी तरफ से फिक्रमंद होते हुए कहा।।

"कोई बात नहीं।। इसमें तुम्हारी क्या गलती है?? हां लेकिन तुम्हें मुझे पहले ही बताना उसके बारे।। अब तक हम मिलकर कोई समाधान निकाल लेते।।" रिया ने उसे तसल्ली देते हुए कहा।। मरियम ने हां में सिर हिलाया।।

"हां।। मुझे नहीं मालूम था कि वह हर जगह आ जाएगी?? मुझे लगा बस वह डेयरी से एक कंटेनर दूध ले जाती है तो क्या हुआ??" मरियम ने गलती मानते हुए कहा।।

शाम और भी गहरी हो गई थी।।

"हमने कार इतनी दूर तो नहीं खड़ी की थी.." वह अच्छा खासा पैदल चल दी थी मगर अभी तक वह रास्ता नहीं आया था जहां उन्होंने अपनी कार पार्क की थी।।

रिया के कहने पर उलझे ज़हन की मरियम ने भी अब ध्यान दिया था।। बाबा की झोंपड़ी पर जाते हुए वह कुछ दूर चली थीं लेकिन अब काफ़ी दूर निकल आई थी मगर कार नहीं दिखी थी।।

"क्यों?? क्या हमने ग़लत रास्ता ले लिया है??" मरियम ने इधर उधर देखते हुए कहा।।
ऐसा भी नहीं लग रहा था कि वह कोई अलग रास्ता था।। वह शायद इसी तरफ से आई थीं।।
अभी दोनों इसी उधेड़ बुन में थीं कि थोड़ी दूर पेड़ों के पीछे से कोई निकलते हुए जल्दी से दूसरे पेड़ के पीछे छिप गया था।।
मरियम ने ही सिर्फ उस साये को देखा था।। उसे लगा शायद कोई उनसे छिपने के कोशिश कर रहा है।।

"उधर कोई है।।। शायद किसी ने हमारी कार चोरी कर ली है और अब हमसे छुपा छुपी खेल रहा है।।" मरियम ने सरगोशी में रिया के कान के जानिब झुकते हुए कहा।।

"कौन..?? किधर??" रिया ने फौरन ही उसकी तरह ही निगाह इधर उधर घुमाई थी।।

"पुलिस को फोन लगाओ.।।" मरियम को पता था वह जो कोई भी था छिप चुका था।। नज़र नहीं आयेगा इसलिए पुलिस बुलाना सही था।।
रिया अभी पर्स से मोबाइल निकाल ही रही थी कि वह साया पेड़ के पीछे से बाहर आकर खड़ा हो गया।।
अंधेरा इतना भी नहीं था कि वहां खड़ा कोई नज़र ना आए और दूरी की वजह से चेहरा दिखाई नहीं दे रहा था मगर हां इतना तो समझ आ रहा था कि जो भी है काली चादर ओढ़े हुए है।।

"रिया...वह देखो।। वह सामने आ गया।।" मरियम ने जल्दी से रिया का बाज़ू हिलाया।।
रिया ने उसके इशारे की तरफ देखा और आँखें सिकुड़ी।। उसे तो कोई नज़र नहीं आ रहा था।।
"कौन है..?? कहां है??" रिया ने नासमझी में कहा।।

"अरे.. वह सामने देखो।। उन दो पेड़ों के बीच में..।।" मरियम ने फिर से इशारा किया।।

"मरियम..तुम्हे वहम हो रहा है।। वहां कोई नहीं है।।" रिया ने नॉर्मल से अंदाज़ में कहा और मोबाइल पर नंबर डायल करने लगी लेकिन उसकी आवाज़ मानों मरियम के वजूद में ऐसे गूंजती चली है जैसे खामोश और खाली मकान में हल्की सी सदा भी तूफान उठा देती है।।

यानी जो वह देख रही थी वह रिया को नज़र नहीं आ रहा था इसका मतलब..?? वह कोई इंसान नहीं..बल्कि... कुछ और था??
क्या वह वही बुढ़िया थी?? काली चादर लपेटे... अंधेरे में मरियम की आंख की एकदम सीध में।। यह उसका वहम नहीं था।।

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