PretikaParanormal"रात डेढ़ बजे"

एपिसोड - 6

FARHA KHAN · Paranormal · 5 मिनट

Writer
FARHA KHAN
Story
"रात डेढ़ बजे"
Chapter
6 of 7
Category
Paranormal
Reading time
5 min
Words
920
Language
Hindi (हिंदी)
Price
Free to read

जो रिया को नहीं दिखाई दे रही थी लेकिन मरियम को दिखाई दे रही थी।। मरियम के बदन का सारा खून सूख गया था।।

वह तो दूध का कंटेनर डेरी के फ्रिज में रख आई थी फिर यह बुढ़िया यहां क्या कर रही थी।।?? लेकिन मरियम नहीं जानती थी कि अब उसे दूध के कंटेनर से कोई सरोकार नहीं था।। बल्कि अब वह सिर्फ वहां आएगी जहां मरियम होगी।। उसके हाथ से दूध लेने।। क्योंकि कल मरियम ने उसे दूध दिया था और वह भी बिल्कुल मुफ्त में।।।
अब उसे मरियम के हाथ से ही चाहिए था।।

"यह क्या हो रहा है?? क्या बैल खराब हो गई है??" रिया कुछ ना समझी में कह रही थी जबकि इस अजीब सी सिचुएशन में वह डर रही थी यह भी सच था।।।
मरियम का चेहरा पसीनो से तर हो रहा था।।

"दूध...घर में दूध है क्या??" मरियम ने कांपती आवाज़ में पूछा।।

"दूध..? दूध का इस बेल से क्या मतलब??" रिया को उस वक्त मरियम की दिमाग़ी हालत पर शक हुआ था।।

"तुम बस..जल्दी से दूध लेकर आओ किसी बर्तन में।। किसी बोतल में..जिसपर उसका ढक्कन कसकर बंद हो।।" वह हड़बड़ी में बोल रही थी।। अब मरियम यह भी जानती थी कि जब वह बुढ़िया यहां तक आ गई है तो बस अब किसी भी लम्हा वह घर का दरवाज़ा खुद ही खोल लेगी और अंजाम से तो मरियम भी नावाकिफ थी।।

"दूध...क्या करोगी??" रिया अपने ही सवालों में उलझी थी।।

"बस कुछ मत पूछो।। जो कह रही हूं करो।। जाओ रिया।।" मरियम की कनपटी फटने को तैयार थी।।

अंदर बहुत से मेहमान थे और ऐसे में जाने क्या हो?? कौन कौन उस बुढ़िया की तलाश का शिकार बने कुछ कहा नहीं जा सकता था।।

मरियम जो दरवाज़े से लगी हुई थी उसने खुद ही कुंडी खुलने की खट की आवाज़ सुनी।।।
बेल बंद हो गई थी और दरवाज़ा खुद ब खुद अनलॉक हो गया था।।जो अब ऐसे हिल रहा था जैसे हवा के हाथों ने थामा हुआ है और हल्का हल्का उसे हिला रही है।।
जमीन पर अंदर की तरफ वह बुढ़ी ओरत का सारा खिंचने लगा था।।

मरियम ज़ोर से चीखी थी।।
"रिया...जल्दी करो।।"

उसी वक़्त जल्दी जल्दी भागती रिया वहां पहुंच गई थी और दूध की बोतल मरियम को थमा दी थी।। मरियम ने फौरन ही बोतल लेकर दरवाज़े की तरफ फेंक दी थी।।।
बोतल दरवाज़े से निकलते साये पर जा गिरी थी।। वह साया जो अब रिया को भी दिखाई दे रहा था।। उसकी आँखें फट गई थीं लेकिन मरियम ने उसे खामोश रहने का इशारा किया था।।

वह भी होंठ भींचे आँखें फैलाए इस मंज़र को देख रही थी।।

एक काला बूढ़ा..और बहुत पतला सा हाथ अंदर की तरफ आया था।।। गहरा काला...जैसे किसी ने उसे जला दिया हो।।उसके नाखून बेहद बड़े और गंदे थे।। रिया की सिट्टी पिट्टी गुम हो रही थी।मरियम का हाल भी उससे जुदा नहीं था बस फर्क इतना था कि मरियम इससे पहले भी यह सब देख और कर चुकी थी।।
उसने दूध की बोतल उठाई और हाथ वापस खींच लिया या।।
दरवाज़ा धीरे धीरे बंद होने लगा था मगर रिया तेज़ी से आगे बढ़ी और दरवाज़े को झटके से बंदकर उससे कमर टिका दी थी।।
उसका दिल बहुत स्पीड से धड़क रहा था जैसे फेल होने की कगार पर हो।।
मरियम खड़ी खड़ी उसे देख रही थी।।दोनों पसीने से शराबोर थीं और सहमी हुई थीं।।

भले ही वह बुढ़िया जा चुकी थी मगर उसकी वह मनहूसिया अभी तक साँसों को तेज़ किए हुए थी।।
रिया ने कोई सवाल नहीं किया था शायद उसे अभी कुछ बोलने की हिम्मत नहीं थी।। उसने मरियम को इस वक्त जाने नहीं दिया।। अपने घर में ही रोक दिया था।। मरियम अगले दिन सुबह सुबह घर गई थी।। रात के अंधेरे से उसे अब खौफ आने लगा था।। जैसे किसी भी वक़्त कोई भी अंधेरा लम्हा उसे अपने ज़ेरे असर कर लेगा।। उसका मुंह दबा कर उसकी सांस रोक लेगा।।

रिया ने लेकिन डेरी पर उसे एक जानिब बुला लिया था।।

"क्या था वह? रात किसका हाथ था वह..?? और तुम्हें कैसे पता था कि उसको दूध दे देने से वह चला जाएगा??" रिया के अंदर रात भर से यही सवाल सिर उठा रहे थे।।
मरियम को मालूम था वह अब कुछ नहीं छिपा सकेगी इसलिए उसने उसे शुरुआत से बता दिया था।।।
रिया ने घबराहट में चारों तरफ देखा।।
"यानी वह इसी स्टोर में रहती है??" उसकी धड़कन फिर से बढ़ गई थी।। वह यूँ बोली गोया डेरी की चार दीवारी में किसी की सरसराहट सी गूंजने लगी हो।।

"पता नहीं.." मरियम ने थके से अंदाज़ में कहा।।

"तुम इतने दिनों से खामोश क्यों थी?? मुझे कुछ बताया क्यों नहीं??" उसने हैरानी से कहां।

"मुझे लगा बस यह सब नॉर्मल है।। वह आती है दूध का कंटेनर ले जाती है लेकिन मुझे यह नहीं मालूम था कि अब वह मेरे साथ हर जगह जाएगी।।" मरियम अब इस बात का अहसास होने के बाद बहुत परेशान हो गई थी।।

"तुम्हें सोचना चाहिए था।। वह दोनों ज़िंदा नहीं हैं कि तुम उनकी हेल्प कर रही थी।। पता नहीं क्या हो जाए।।?? मै एक बाबा को जानती हूं। उनके पास चलना वह ज़रूर कोई हल बताएंगे।। इससे पीछा छुड़ाना ही पड़ेगा।।" रिया ने उसे समझाते हुए कहा।। मरियम ने सिर इस बात में हिलाया।।

"आज एक कंटेनर अपने गेट के बाहर रख देना और मै भी रख दूंगी।। अब पता नहीं वह किधर आएगी।।?" मरियम ने परेशान से लहजे में कहा तो रिया का खौफ बढ़ सा गया था।।

"आज ही चलते हैं बाबा के पास।। अभी ज़्यादा टाइम नहीं हुआ है।। मिल जाएंगे।।" उसने घड़ी में टाइम देखते हुए कहा।। मरियम ने भी उसकी इस बात में सिर हिलाया और कुछ ज़रूरी काम निपटाने लगी।।

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