Pretika › Paranormal › "रात डेढ़ बजे"
एपिसोड- 5
FARHA KHAN · Paranormal · 5 मिनट
- Writer
- FARHA KHAN
- Story
- "रात डेढ़ बजे"
- Chapter
- 5 of 7
- Category
- Paranormal
- Reading time
- 5 min
- Words
- 890
- Language
- Hindi (हिंदी)
- Price
- Free to read
अगले दिन वह उलझी उलझी सी रही। उसे बस यह फिक्र थी कि कहीं आज भी सारा दूध ना बिक जाए।। वह एक ना एक कंटेनर हटा हटा कर रखती रही।।आज भी लोगों का आना जाना लगा रहा।।
लेकिन आखिर में महज़ एक कंटेनर बाक़ी रहा और उसने आखिरी कस्टमर को मना कर दिया।। रिया हैरानी से उसे देखने भी लगी मगर उसने उसे नज़र अंदाज़ कर दिया था।। उसे क्या बताती कि कंटेनर बचाकर रखना अपनी जान को सलामत रखना था।।
वह उसे डराना नहीं चाहती थी और वैसे भी अगर कोई बात निकलती है तो इसमें बदनामी उसके ही डेयरी की होगी।।
इसलिए उसे खामोशी से ही इस राज़ को राज़ रहने देना था।। वह जो कोई भी थी।। उसे इस बात से कोई मतलब नहीं था मगर फिर अचानक से उसे याद आया कि क्या एक चुड़ैल के डर से उसे हमेशा इस खौफ तले रहना होगा?? क्या उसे किसी फकीर बाबा से बात करनी चाहिए या नहीं?? लेकिन वह तो किसी को नहीं जानती थी।।
क्या रिया से बात करे?? वह दिन भर इसी उधेड़बुन में रही थी।।
रात को दूध का कंटेनर बचाकर फ्रिज में रखा।। आज रिया के यहां उसकी बेटी का बर्थडे था।। वह जल्दी चली गई ..मरियम भी इन्वेटेड थी और उसे वहां जाना था।। राहा को लेकर राबिया पहुंच गई होगी।। वह भी अपना काम खत्म करके उसके घर के लिए निकल गई थी।।
वह काफी लेट हो गई थी।। केक भी कट चुका होगा इसलिए उसे जाना वहां बेकार भी लग रहा था लेकिन चूंकि राहा भी वहीं थी और उसे उसको भी पिक करना था।। फिर रिया के यहां हर पार्टी लेट नाइट तक ही चलती थी।। उसके सारे रिलेटिव्ज़ और फ्रेंड्स अपने ऑफिस वगैरह से फ्री होकर ही पहुंचते थे इसलिए देर तक गेदरिंग चलती रहती थी।।
रात साढ़े ग्यारह बजे भी रिया के घर पर अच्छी खासी रोनक़ हो रही थी हां केक कट हो चुका था कुछ देर पहले ही।। राहा बच्चों के साथ खेल रही थी।।
सबके साथ वक्त का पता ही नहीं चला था।। बहुत दिनों बाद इस तरह उन लोगों से मिली थी जो कॉलेज में उसके साथ हुआ करते थे।। कॉलेज के बाद वह लोग भी दोस्त की तरह मिलते हैं जो उन दिनों एक दूसरे को देखना भी पसंद नहीं करते।।
बहुत सी बातें हुई... गेम्स खेले और कब 1 बजे के बाद का टाइम हो गया पता ही नहीं चला।।
वह राहा और राबिया को लेकर वहां से बस निकलने वाली थी जब रिया के घर की डोर बैल हुई थी।। कुछ मेहमान जा चुके थे और कुछ जाने वाले थे।।
उस बेल में एक अजब सी चिंगाड़ थी।। सभी एक साथ उस आवाज़ पर मुतवज्जोह हो गए थे।।
"कौन होगा..??" रिया ने गोया खुद से कहा।। अब किसी के आने का नहीं बल्कि सबके जाने का टाइम था।।
"मै देखती हूं..." रिया सबसे कहती हुई दरवाज़े की तरफ बढ़ गई थी मगर मरियम को जाने क्यों अजीब सी सनसनाहट महसूस होने लगी थी।। बेल इतनी ही देर में कितनी ही मर्तबा बज गई थी।। जो कि नॉर्मल नहीं था।।
मरियम ने तेज़ी से रिया को हाथ उठा कर रोका था।।
"कौन है जो इतनी जल्दी में है?? मुझे कुछ ठीक नहीं लग रहा।।" मरियम ने धड़कते दिल के साथ कहा।। साथ ही उसकी निगाह घड़ी की तरफ भी उठ गई थी।। बेशक वह आज दूध फ्रिज में रख कर आई थी मगर जाने क्यों उसके अंदर से कोई धुआं सा उठ रहा था जो उसे डरा रहा था।। घड़ी डेढ़ बज रही थी और ये वक्त कुछ दिनों से मरियम के लिए मौत का पैगाम बना हुआ था।।
"डॉन्ट वेरी..हो सकता है मेरे कज़न्स में से कोई हो।। अभी रस्ते में आया हो कुछ भूल गए हों.." उसने कुछ देर पहले निकले उसके कज़न्स का सोचते हुए कहा और उसे तसल्ली देती आगे बढ़ गई थी।।
मरियम ने राहा को अपने नज़दीक खड़ा कर लिया था।। पता नहीं क्यों आने वाले लम्हों से उसे खौफ आ रहा था।। रिया ने मरियम को तसल्ली दे दी थी मगर उसके ज़हन में भी कुछ खटका सा हो रहा था।।
उसके कज़न का कुछ रह जाता तो कॉल करके वह लोग बता देते थे।। वह बाद में उन्हें दे देती थी और फ़िर बेल भी लगातार हो रही थी।।
रिया ने इसलिए पहले पीहोल से बाहर झांका था।। बाहर तो कोई नहीं था मगर जिस चीज़ ने उसे दहलाया था वह था यह कि बेल अभी भी हो रही थी और बाहर बेल के बटन के पास कोई भी मौजूद नहीं था।। उसकी आँखें खौफ से फट गई थीं।।
यह कैसे हो सकता था।।
वह झटके से पीछे हुई और पीछे खड़ी मरियम से टकराईं।
रिया की चीख निकल गई।।
"रिलेक्स मै हूं.. क्या हुआ??" मरियम ने आहिस्ता से ऐसे पूछा गोया कोई सुन लेगा।।
"वह...बाहर कोई नहीं है।।" रिया ने डरे हुए लहजे में कहा।। मरियम की धड़क हक़ीक़त के रूप ढली थी।।
"मतलब..? फिर डोर बैल कौन कर रहा है??" वह हैरानी से पूछ रही थी।।
"पता नहीं..." रिया ने कहा और मरियम आगे बढ़ गई।। उसने पी हॉल पर अपनी आंख रखी और उसका सारा बदन पानी पानी होने लगा था।। उसकी पेशानी पर पसीने की छींटे नमूदार हुई थीं।।।
जो रिया को नज़र नहीं आ रहा था वह मरियम देख सकती थी और मरियम देख रही थी कि अपने भुतहा बच्चे गोद में उठाए वह बुढ़िया रिया के घर की बैल बजाए जा रही थी।।