PretikaParanormal"रात डेढ़ बजे"

एपिसोड-4

FARHA KHAN · Paranormal · 4 मिनट

Writer
FARHA KHAN
Story
"रात डेढ़ बजे"
Chapter
4 of 7
Category
Paranormal
Reading time
4 min
Words
636
Language
Hindi (हिंदी)
Price
Free to read

मरियम को समझ में नहीं आ रहा था कि आखिर उससे करना क्या है ये इस वक्त उसके की डूरबेल इतनी जोर-जोर से कौन बजा रहा था?
उसे वो सिर्फ खुद को यही यकीन दिलाने में लगी हुई थी कि जो वो समझ रही है वैसा नहीं हो सकता लेकिन अगर वैसा नहीं था तो इस वक्त भला उसके घर में कौन आता था जो डेढ़ बजे उसके घर का दरवाज़ा बजाए?

जब बैल तीसरी बार बजी तो वह झटका खाकर बेड से उतर गई थी।। शुक्र था राहा की आँख नहीं खुली थी।।
वह जल्दी से कमरे से बाहर निकल गई थी।।

दरवाज़े तक वह बहुत तेज़ तेज़ चलती हुई आई थी लेकिन नज़दीक आते ही क़दम सुस्त हो गए।। उस तरफ कौन था?? वह जैसे जानती थी।। महज़ खुद को झुठला रही थी।।
वह बढ़ती हुई आगे आई और पी हॉल पर अपनी आंख रखी दी थी।। बाहर झाँक कर पता करने की कोशिश कर रही थी कि वह जो सोच रही थी वह सब बिल्कुल उसका वहम था लेकिन अक्सर हर सोच वहम नहीं होती।।

बाहर कॉरिडोर के हल्का हल्का अंधेरा था और उसी अंधेरे में चादर ओढ़े एक औरत खड़ी थी उसके दरवाज़े के पास..।। हाथों में बच्चा थामें हुए और उसके दरवाज़े को ऐसे घूर रही थी गोया आंखों की तपिश से ही दरवाज़े की लकड़ी को पिघला कर कोयला बना देगी।।
उसकी लाल आँखें जिसके इर्द गिर्द गहरे काले हल्क़े हो रहे थे और चेहरा झुलसा हुआ था।।
मरियम की सांस बहुत तेज़ चल रही थी मगर उसका ज़हन बिल्कुल भी काम नहीं कर रहा था।
बुढ़िया ने फिर से दरवाज़े पर अपना हाथ मारा था और आवाज़ ईस तरह हुई थी गोया किसी ने हथोंडा मारा हो।।

मरियम धीरे धीरे हिम्मत करके दरवाज़ा खोलने लगी थी लेकिन अचानक उसे अहसास हुआ कि घर में वह अकेली नहीं है।।
घर में उसकी छोटी सी बेटी राहा भी मौजूद है।। उसका खौफ़ दोगुना हुआ था।। उसने क़दम पीछे हट लिया।। दरवाज़ा बार बार बज रहा था।।
ज़ोर ज़ोर से...
मरियम ने जल्दी से किचन में जाकर फ्रिज खोला।। फ्रिज में एक कंटेनर रखा हुआ था।। उसने एक लम्हे कुछ सोचा और जल्दी से दरवाज़े की तरफ आई थी मगर उसके क़दम अपनी जगह जड़ हो गए थे।।
दरवाज़ा अनलॉक था और बाहर से आती हवा के साथ साथ हल्का हल्का हिल रहा था।।
मरियम की आँखें दोगुनी बड़ी हो गई थीं।। उसका चेहरा किसी खौफनाक ख्याल से सफेद पड़ गया था।। वह तेज़ी से राहा के कमरे की तरफ बढ़ी थी।। मगर फिर झटके से रुकी।।
कोई साया अभी तक घर के बाहर से ही नज़र आ रहा था।। उसने रुककर गौर से देखा और कुछ गहरा सांस लेकर आगे बढ़ आई।।
उसके क़दम भले ही कांप रहे थे मगर यह अधखुले दरवाज़े से झांकता साया इस बात का गवाह था कि अभी वह बुढ़ी ओरत अंदर नहीं आई है बल्कि अंदर आ रही है।।
मरियम के कांपते क़दमों में रवानी आई थी ।। वह दरवाज़े की तरफ भागी थी और जल्दी से कंटेनर पूरी जान से बाहर की तरफ फेंक दिया था।।
दूध के कंटेनर की आवाज़ ज़मीन पर गिरने की आई ही नहीं शायद उस बुढ़िया ने उसे हवा में ही पकड़ लिया था।। मरियम अब खड़ी हुई गहरे गहरे सांस ले रही थी।। उसका सारा बदन पसीने से शराबोर हो रहा था।। दरवाज़ा हल्के हल्के बंद होने लगा और फिर खुद ही लॉक हो गया।।
कानों में जैसे खामोशी दस्तक देने लगी थी।। मरियम ने तसल्ली के साथ अपने धड़कते दिल पर हाथ रखा।।
सही वक्त पर उसके ज़हन में अपने फ्रिज से कंटेनर निकालने की बात आ गई थी और आज उसकी ही नहीं बल्कि राबिया और राहा की भी जान बच गई थी।।
पता नहीं वह बुढ़िया उसका और उसके परिवार का खून बहा सकती थी या नहीं मगर हां वह कोई फायदा पहुंचाने वाली चीज़ तो थी नहीं।।

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