Pretika › Paranormal › "रात डेढ़ बजे"
एपिसोड-3
FARHA KHAN · Paranormal · 5 मिनट
- Writer
- FARHA KHAN
- Story
- "रात डेढ़ बजे"
- Chapter
- 3 of 7
- Category
- Paranormal
- Reading time
- 5 min
- Words
- 830
- Language
- Hindi (हिंदी)
- Price
- Free to read
मरियम का मोबाइल थामे हुए हाथ काँप रहा था।।
अब उसे कोई भी शक या वहम की गुंजाइश नहीं थी कि उसके स्टोर में एक बूढ़ी औरत बच्चे को कांधे से लगाए आती है और दूध लेकर पुराने ज़माने का सिक्का रख जाती है।।
और इसमें भी शुबहा बाक़ी नहीं था कि वह कोई इंसान नहीं है बल्कि किसी ज़माने में वह इंसान रही होगी जो अब महज़ एक रूह होगी या उससे भी ज़्यादा कुछ और।।
मरियम ने करवट बदलते हुए राहा को देखा था।। उसका दिल बहुत ज़ोर से धड़क रहा था।। आगे क्या होगा?? उसे नहीं मालूम था लेकिन उसका उसके स्टोर में आना मनहूसियत हो सकती थी।।
भला कोई मरा हुआ इंसान दूध क्यों लेकर जायेगा??
वह हज़ारों तरह के सवालों में घिरी थी।।
अगले दिन उसने जाकर उस स्टोर का दरवाज़ा खोला था।। जाने क्यों वह खुद को यह यक़ीन दिलाना चाहती थी कि वह महज़ एक इंसान है जो उसके साथ या तो कोई मज़ाक कर रहा है या फिर उसके स्टोर में चोरी कर रहा है।।
उसने पूरा स्टोर छान मारा और उसे कुछ भी नहीं मिला।। उस औरत से मंसूब एक शे भी वहाँ नहीं थी।।
"क्या हुआ..??" रिया उसके उड़े उड़े रंग को देखकर पूछ रही थी।। जाने वह क्या तलाश कर रही थी?? रोज़ ही वह पूरी डेयरी के एक एक कोने को घूर घूर कर देखती थी।।
"क...कुछ भी तो नहीं.." मरियम ने अपने माथे पर आए पसीने को साफ करते हुए कहा।।
"क्या सोचती रहती हो??" रिया ने कहा तो वह सिर इस बात की नफी में हिलाने लगी।।
रिया उसकी हमराज़ थी लेकिन इस मुतालिक़ बात करके वह रिया को डराना नहीं चाहती थी।। इसलिए उससे कुछ नहीं कहा मगर हां अपने अंदर से वह सिमटी हुई सी थी।।
अगले बहुत से दिनों तक वही सिलसिला चलता रहा था।।
आज न्यू ईयर था और दूध बहुत तेज़ी से बिका था।। लोग रात भर पार्टी करने वाले थे।। घर में मेहमान थे।। मरियम भी खुश थी कि आज उसे बहुत सारा दूध संभालकर रखने की ज़रूरत नहीं पड़ी।।
वह क़रीब बारह बजे घर वापस पहुंच गई थी।।
राहा अक्सर सो जाती थी जब वह इस तरह देर से आती थी।।
आज वह भी थक गई थी।। उस वाक़िए को अब कई दिनों से उसने नहीं देखा था जानबूझ कर उसने सोच लिया था वह जो कोई भी शे है कौन सा उसे कोई नुकसान पहुंचा रही है।। एक कंटेनर में उसका क्या चला जाएगा?? इसलिए उसने बहुत ज़्यादा सोचना छोड़ दिया था।।
वह नहा कर अपने बेड पर आई तो राहा की नैनी राबिया उठकर अपने रूम की तरफ चली गई थी।। जब तक मरियम नहीं आती थी तब तक वह राहा के पास रहती थी।।
वह आराम से लेट गई थी।। नींद आ रही थी लेकिन मोबाइल की नोटिफिकेशन की सदा ने उसका ज़हन अपनी जानिब खींच किया था।।
इतनी रात में अक्सर कोई भी उसे मेसेज नहीं करता था।।
यह सिलसिला भी मान के साथ शादी के बाद थोड़ा सुस्त पड़ गया था क्योंकि शादी के बाद वह दोनों साथ रहने लगे थे बस जब वह कहीं जाता था तभी रात में सोने से पहले बात करता था।।
कभी कभी रिया कुछ भूल जाती तो वह कुछ मेसेज डाल देती थी।।
उसने देखा कि किसी अननोन नम्बर से मेसेज था।। उसने मैसेज ओपन किया।।
"आज दूध नहीं रखा मेरे लिए??" उसने ज़ेर लब मेसेज में लिखे अल्फ़ाज़ दोहराए और मरियम पूरी शिद्दत से कांप उठी थी।।
मोबाइल की घड़ी में डेढ़ बजे का वक़्त हो रहा था।।
वह झटके से उठ बैठी थी।। फैली हुई आँखें बार बार उस मैसेज को पढ़ रही थीं।। आज वाकई एक भी कंटेनर दूध नहीं बचा था और उसे भला क्या ख्याल कि किसी के लिए उसे बचा कर रखना ज़रूरी था।।
कांपती उंगलियों से उसने सी सी टी वी वाला ऐप खोला था।।
दूसरे ही लम्हें वह ठंडी बर्फ़ की तरह जम सी गई थी।। मोबाइल उसके हाथों में पत्थर सा महसूस हो रहा था।।
डेयरी के सारे फ्रिज खुले पड़े थे।। जो बार बार ज़ोर ज़ोर से खुल रहे थे और बंद हो रहे थे।। स्टोर का दरवाज़ा भी इसी तरह खड़खड़ा रहा था और वह बुढ़ी ओरत पूरी डेयरी में इधर उधर गुस्से से फिर रही थी।। उसका बच्चा ज़ोर ज़ोर से रो रहा था जिसकी आवाज़ बेहद डरावनी थी।। वह बार बार कैमरे की तरफ देख रहा था उसकी पूरी तरह काली आँखें मरियम को घूरने लगती थीं।।
मरियम का दिल थर्रा रहा था।। उसे समझ नहीं आ रहा था क्या होना है?? क्या करना है??
फिर अचानक से वह डेयरी से बाहर निकलने वाले शटर से यूंही पार हो गई थी।।
डेयरी के सारे फ्रिज धड़ाक करके बंद हो गए और सन्नाटा सा छा गया।।
मरियम अब भी मोबाइल थामे बैठी थी।। उसकी समझ पूरी तरह कोरी हो रही थी।। खौफ से उसकी सारी जान निकल गई थी।।
कुछ लम्हे यूंही खामोशी में गुज़र गए थे और फिर अचानक से मरियम के घर की डोर बैल बहुत ज़ोर से चीखी थी।।
जैसे किसी के सारे घर में आग लगा दी हो।।