PretikaParanormal"रात डेढ़ बजे"

एपिसोड 2

FARHA KHAN · Paranormal · 4 मिनट

Writer
FARHA KHAN
Story
"रात डेढ़ बजे"
Chapter
2 of 7
Category
Paranormal
Reading time
4 min
Words
770
Language
Hindi (हिंदी)
Price
Free to read

उसे अच्छी तरह याद था कि वो बहुत अच्छे से शॉप को लॉक करके आई थी। फिर शॉप के अंदर ये कौन था? उसके साथ तीन वर्कर काम करते थे, और तीनों ही मरियम से पहले ही अपने घर चले जाते थे।

मरियम ने देखा, वो काले रंग की बड़ी सी चादर ओढ़े कोई औरत थी। उसने एक बच्चे को अपने कंधे से लगाया हुआ था। बच्चा शायद सो गया था। वो धीरे-धीरे फ्रिज की तरफ बढ़ रही थी। उसमें से एक कंटेनर निकाला और वापस काउंटर की तरफ आई। एक थैली में से शायद उसने पैसे निकाले थे और उन्हें काउंटर पर रख दिए थे।

उसका दूध लेना और पैसे रख देना तो ठीक था, लेकिन हैरानी-परेशानी इस बात की थी कि ये औरत अंदर आई तो आई कैसे? मरियम ने बाहर दरवाजे वाले कैमरे से कैमरे चेक किए। दरवाजे वैसे ही लॉक थे, जिस तरह मरियम करके आई थी।

मरियम को सिक्योरिटी की बहुत बुरी फिक्र होने लगी थी। वो वापस काउंटर वाले कैमरे पर आई, लेकिन अब वो औरत वहाँ नहीं थी। मरियम ने जल्दी-जल्दी शॉप के हिस्से में लगे सारे कैमरे चेक किए, मगर अब वो कहीं नहीं नजर आ रही थी। वो कहाँ से आई थी, कहाँ चली गई थी, कुछ समझ नहीं आ रहा था।

अब तो गोया नींद भी नहीं आ रही थी। जहन में कोई खौफनाक सा म्यूजिक बज रहा था। ये बात नजरअंदाज करने लायक नहीं थी।

उसके साथ काम करने वाले वर्कर में एक उसकी दोस्त रिया भी थी, जो सबसे पहले उसकी शॉप खोला करती थी। अगले दिन जब मरियम अपनी डेयरी पर पहुँची, तो रिया पहले से वहाँ मौजूद थी।

“रिया, क्या हुआ? सुबह काउंटर पर तुम्हें कुछ पैसे मिले थे?”

मरियम के दिमाग में रात वाला वाकिया बिल्कुल ताजा था।

रिया ने चौंक कर उसे देखा और सर नहीं में हिलाया।

“नहीं, तो यहाँ तो कोई पैसे नहीं थे। यहाँ तो बस एक ही काला सा कॉइन पड़ा हुआ था। मैंने तुम्हारे कैश ड्रॉर में डाल दिया है।”

मरियम ने जल्दी से अपना कैश ड्रॉर खोला और देखा कि उसमें एक हिस्से में वो कॉइन पड़ा हुआ था। उसने उठाकर उसे चेक किया। वो काला सा पुराना, बहुत पुराना कॉइन था। और वो सिर्फ अपने वजूद में ही पुराना नहीं था, बल्कि शायद वो कभी किसी जमाने में चलने वाला कॉइन था। वो उसने गूगल पर सर्च किया और देखा कि वो बहुत पहले पिछली सदी में चलने वाला कॉइन था।

मरियम के दिल की धड़कन कुछ और तेज़ हो गई थी। उसे वो औरत वैसे भी बहुत ज़्यादा पुरअसरार लग रही थी। आखिर वो कौन थी और उसकी डेयरी में क्या करने आई थी और कहाँ से आई थी? या वो उसकी डेयरी में हमेशा से आती रही है, ये सिर्फ पहली बार था जब उसने उसे देखा था।

वो अक्सर डेढ़ बजे से पहले ही सो जाती थी। उस दिन मरियम का दिल किसी काम में ज़्यादा अच्छे तरह से मशगूल नहीं हो सका और वो जल्दी ही आ गई थी। बाद में रिया उसको, उसकी डेयरी बंद करके आई थी।

सब कामों से निपटकर मरियम अपने बिस्तर पर लेटी तो उसके दिमाग में वही सब बातें चलने लगीं। उसने टाइम देखा, डेढ़ बजने में थोड़ा सा ही टाइम

बचा था, वो जाने क्यों फिर से उस औरत के आने का इंतज़ार कर रही थी, शायद खुद को कोई प्रूफ देना चाहती थी कि उसने जो कुछ देखा था, वो कोई ख़्वाब नहीं था।

राहा सो गई थी, कमरे की सारी लाइट ऑफ थीं, और उसके बीच में उसका मोबाइल जल रहा था। वो अपने मोबाइल पर सीसीटीवी की ऐप खोलकर बार-बार सब जगह के सीसीटीवी चेक कर रही थी।

और फिर आखिरकार घड़ी में जैसे ही रात का डेढ़ बजा था, वो औरत फिर से कहीं से उजागर हो गई और धीरे-धीरे उसी बच्चे को कंधे से लगा कर फ्रिज की तरफ बढ़ने लगी थी।

मरियम की आँखों में दहशत थी, उसकी चाल अजीब सी थी, और उसका कद भी दरमियाने से

कुछ ज़्यादा ही था।।।

मरियम अपने दिल की धड़कन अपने कानों में गूँजती महसूस कर रही थी। वो फिर से आगे बढ़ी, फ्रिज खोला, कंटेनर निकाला, और फिर से कोई सिक्का, सिक्का उसने काउंटर पर रख दिया था।

मरियम इस मर्तबा उसकी एक-एक हरकत को गौर से देखती रही और फिर उसके चलने वाली तरफ देखती रही। वो धीरे-धीरे आगे बढ़ी और डेयरी के पुराने से दरवाज़े को हल्का सा खोला। वो दरवाज़ा वो बहुत कम खोलती थी। वो उसे स्टोर से जोड़ता था।

उसने दरवाज़ा खोला और उसके स्टोर में दाखिल हो गई। उसने स्टोर वाला कैमरा खोला, लेकिन वो इधर से आई तो थी, लेकिन इधर जैसे दाखिल ही नहीं हुई थी। उस दरवाज़े के पीछे स्टोर और स्टोर के बीच में कोई और दुनिया थी, जहाँ वो रूपोश हो गई।

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