PretikaHaunted Placesदरवाज़े के उस पार , Season 1

एपिसोड 1 — नई शुरुआत

firoj saifi · Haunted Places · 3 मिनट

Writer
firoj saifi
Story
दरवाज़े के उस पार , Season 1
Chapter
1 of 8
Category
Haunted Places
Reading time
3 min
Words
481
Language
Hindi (हिंदी)
Price
Free to read

शाम ढल चुकी थी।
पहाड़ों के बीच बनी एक सुनसान सड़क पर काली SUV धीरे-धीरे आगे बढ़ रही थी। बाहर तेज़ बारिश हो रही थी। बारिश की बूंदें शीशे पर लगातार पड़ रही थीं और वाइपर उनके रास्ते को साफ करने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन सामने फैली धुंध हर कुछ सेकंड में सड़क को फिर निगल लेती |और
गाड़ी के अंदर अरमान चुपचाप ड्राइव कर रहा था।
उसके बगल में उसकी पत्नी रीवा बैठी थी, जबकि उनकी दस साल की बेटी माही अपनी माँ से चिपकी हुई खिड़की के बाहर देख रही थी।
माही ने आखिरकार पूछा,
"पापा, अब कितनी दूर है?"
अरमान ने हल्की मुस्कान के साथ कहा,
"बस पंद्रह मिनट, बेटा। फिर हम पहुँच जाएंगे।"
"और हमारा नया घर कैसा है?"
"बहुत बड़ा। इतना बड़ा कि अगर तुम उसमें छुपोगी तो हमें तुम्हें ढूँढने में पूरा दिन लग जाएगा।"
माही हँस पड़ी।
लेकिन रीवा नहीं हँसी।
वह लगातार बाहर देख रही थी।
तीन साल पहले अरमान ने शहर की भागदौड़ छोड़कर अपने दादा की पुरानी पहाड़ी हवेली में रहने का फैसला किया था। हवेली उसे विरासत में मिली थी। परिवार के बाकी लोग उसे बेच देना चाहते थे, लेकिन अरमान ने कभी ऐसा नहीं किया।
उस हवेली से उसके बचपन की बहुत सारी यादें जुड़ी थीं।
फिर भी रीवा को इस जगह को लेकर हमेशा एक अजीब बेचैनी रहती थी।
"रीवा," उसने धीरे से कहा, "तुम्हें सच में लगता है कि हमें वहाँ जाकर रहना चाहिए?"
अरमान ने उसकी तरफ देखा।
"रीवा, वो सिर्फ एक पुराना घर है। इससे ज्यादा कुछ नहीं।"
रीवा कुछ बोलने ही वाली थी कि अचानक—
गाड़ी की हेडलाइट्स में एक बूढ़ी औरत दिखाई दी।
सड़क के किनारे।
बारिश में पूरी तरह भीगी हुई।
वह बिल्कुल स्थिर खड़ी थी।
अरमान ने जोर से ब्रेक लगाया।
गाड़ी फिसलते हुए कुछ दूर जाकर रुकी।
माही डरकर चीख पड़ी।
रीवा ने तुरंत कहा,
"बाहर मत जाना!"
अरमान ने सामने देखा।
औरत वहीं खड़ी थी।
उसके सफेद बाल चेहरे से चिपके हुए थे।
फिर अचानक—
हेडलाइट्स कुछ पल के लिए झपकीं।
और जब रोशनी वापस आई...
सड़क खाली थी।
वहाँ कोई नहीं था।
अरमान ने हैरानी से कहा,
"तुमने भी उसे देखा?"
रीवा ने धीरे से सिर हिलाया।
"हाँ।"
कुछ देर बाद उन्होंने गाड़ी आगे बढ़ा दी।
करीब आधे घंटे बाद धुंध के बीच एक विशाल हवेली दिखाई दी।
लोहे का पुराना गेट खुला हुआ था।
हवेली के सामने एक बूढ़ा चौकीदार लालटेन लिए खड़ा था।
रामदीन।
अरमान गाड़ी से बाहर आया।
रामदीन ने उसे देखते ही कहा,
"मालिक..."
उसकी आवाज़ में खुशी से ज्यादा डर था।
"आप आ गए। मुझे लगा था अब कोई नहीं आएगा इस घर में।"
अरमान ने हँसकर पूछा,
"क्यों काका? हवेली इतनी डरावनी हो गई क्या?"
रामदीन ने जवाब नहीं दिया।
उसने हवेली के मुख्य दरवाज़े की तरफ देखा।
फिर बहुत धीमी आवाज़ में बोला,
"मालिक... एक बात याद रखिएगा।"
"क्या?"
रामदीन ने हवेली के अंदर की तरफ इशारा किया।
"उस काले दरवाज़े को कभी रात में मत खोलिएगा।"
अरमान की मुस्कान गायब हो गई।
"कौन-सा काला दरवाज़ा?"
रामदीन ने कुछ नहीं कहा।
उसी समय हवेली के अंदर से बहुत धीमी आवाज़ आई।
किसी औरत के रोने की आवाज़।
माही ने अपनी माँ का हाथ कसकर पकड़ लिया।
रीवा का चेहरा सफेद पड़ गया।
रामदीन ने लालटेन नीचे कर ली।
और फिर फुसफुसाया—
"वो फिर जाग गई है..."

"""एपिसोड 2"""

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