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Episode 8 — आखिरी दरवाज़ा
firoj saifi · Haunted Places · 2 मिनट
सुबह होने वाली है।
माही के पास बहुत कम समय है।
दरवाज़ा बंद करने के लिए किसी एक को दूसरी दुनिया में रहना होगा।
दूसरी माही कहती है—
“मैं रह जाऊंगी।”
माही मना कर देती है।
“तुमने बचपन में मेरी जान बचाई थी। अब मैं तुम्हें नहीं छोड़ूंगी।”
दूसरी माही कहती है—
“अगर हम दोनों बाहर गए... तो वो भी हमारे साथ आएगी।”
माही समझ जाती है कि शक्ति उनके बीच छिपकर बाहर निकल सकती है।
दोनों कुछ देर चुप रहती हैं।
फिर माही एक फैसला करती है।
वह दूसरी माही को गले लगा लेती है।
दोनों की परछाइयाँ एक हो जाती हैं।
कमरा रोशनी से भर जाता है।
काला दरवाज़ा टूटने लगता है।
शक्ति चीखती है—
“तुम मुझे खत्म नहीं कर सकती!”
माही जवाब देती है—
“मैं तुम्हें खत्म नहीं कर रही।”
“मैं तुम्हें अपने डर से आज़ाद कर रही हूँ।”
अचानक सब कुछ शांत हो जाता है।
माही आँखें खोलती है।
वह हवेली के बाहर खड़ी है।
सुबह हो चुकी है।
अरमान और रामदीन उसके सामने हैं।
काला दरवाज़ा अब हमेशा के लिए बंद दिखाई देता है।
अरमान माही को गले लगा लेता है।
रामदीन रोते हुए कहता है—
“सब खत्म हो गया।”
माही हवेली की तरफ देखती है।
“नहीं काका...”
कुछ पल रुककर कहती है—
“अब पहली बार सच में खत्म हुआ है।”
वह शहर वापस लौटती है।
कुछ दिन बाद वह अपने कमरे में आईने के सामने खड़ी होती है।
इस बार उसका प्रतिबिंब बिल्कुल सामान्य है।
माही मुस्कुराती है।
तभी आईने में हल्की दरार दिखाई देती है।
माही उसे ध्यान से देखती है।
दरार के पीछे अंधेरा है।
फिर एक बहुत धीमी आवाज आती है—
“माही...”
वह पीछे मुड़ती है।
कमरा खाली है।
वह फिर आईने की तरफ देखती है।
आईने में उसके पीछे एक छोटा बच्चा खड़ा है।
माही धीरे से पलटती है।
वहाँ कोई नहीं।
वह दोबारा आईने में देखती है।
बच्चा अब भी वहीं है।
वह मुस्कुराकर कहता है—
“कहानी खत्म नहीं हुई...”
स्क्रीन धीरे-धीरे काली हो जाती है।
- Writer
- firoj saifi
- Story
- “आखिरी दरवाज़ा” — Season 3
- Chapter
- 8 of 8
- Category
- Haunted Places
- Reading time
- 2 min
- Words
- 327
- Language
- Hindi (हिंदी)
- Price
- Free to read
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