Pretika › Haunted Places › “आखिरी दरवाज़ा” — Season 3
Episode 7 — दरवाज़े के उस पार
firoj saifi · Haunted Places · 2 मिनट
- Writer
- firoj saifi
- Story
- “आखिरी दरवाज़ा” — Season 3
- Chapter
- 7 of 8
- Category
- Haunted Places
- Reading time
- 2 min
- Words
- 225
- Language
- Hindi (हिंदी)
- Price
- Free to read
माही और उसकी दूसरी परछाईं काले दरवाज़े के अंदर पहुँच चुकी हैं।
दूसरी तरफ एक ऐसी दुनिया है जहाँ समय रुक चुका है।
हवेली वैसी ही है जैसी कई दशक पहले थी।
दीवारों पर पुराने परिवार के लोग दिखाई देते हैं।
माही अपनी माँ को देखती है।
वह उसके पास आती है।
माँ: “मुझे माफ कर दो।”
माही की आँखों में आंसू आ जाते हैं।
“आपने मुझे क्यों नहीं बताया?”
माँ कहती है—
“क्योंकि मुझे लगा था कि सच तुम्हें तोड़ देगा।”
माही कहती है—
“झूठ ने मुझे ज्यादा तोड़ा।”
माँ उसकी तरफ देखकर कहती है—
“अब फैसला तुम्हारा है।”
माही पूछती है—
“किस बात का?”
माँ काले दरवाज़े की तरफ देखती है।
“उसे हमेशा के लिए खत्म करने का।”
माही पूछती है—
“कैसे?”
माँ जवाब देती है—
“जिस चीज़ को डर से बनाया गया हो... उसे डर से खत्म नहीं किया जा सकता।”
माही समझ जाती है कि उसे उस शक्ति से लड़ना नहीं है।
उसे स्वीकार करना है।
वह दूसरी माही की तरफ देखती है।
दोनों एक-दूसरे का हाथ पकड़ती हैं।
तभी शक्ति सामने आती है।
वह कहती है—
“तुम मुझे स्वीकार करोगी... तो मैं तुम्हारा हिस्सा बन जाऊंगी।”
माही कहती है—
“नहीं।”
फिर वह कहती है—
“तुम मेरे अंदर नहीं रहोगी।”
“मैं तुम्हें अपने अतीत में वापस भेजूंगी।”
माही अपनी सारी पुरानी यादों को स्वीकार करती है।
उसका डर कम होने लगता है।
शक्ति कमजोर होने लगती है।
लेकिन तभी देवेंद्र सामने आता है।
वह कहता है—
“एक बात अभी भी बाकी है।”
माही पूछती है—
“क्या?”
देवेंद्र कहता है—
“दरवाज़ा बंद करने के लिए किसी एक को पीछे रहना होगा।”
दोनों माही एक-दूसरे को देखती हैं।