Pretika › Haunted Places › “आखिरी दरवाज़ा” — Season 3
Episode 6 — आखिरी अनुष्ठान
firoj saifi · Haunted Places · 2 मिनट
- Writer
- firoj saifi
- Story
- “आखिरी दरवाज़ा” — Season 3
- Chapter
- 6 of 8
- Category
- Haunted Places
- Reading time
- 2 min
- Words
- 221
- Language
- Hindi (हिंदी)
- Price
- Free to read
अरमान पुराने ग्रंथ से एक रास्ता खोजता है।
अगर माही और उसकी दूसरी परछाईं एक हो जाएँ, तो शक्ति का प्रभाव खत्म हो सकता है।
लेकिन इसके लिए दोनों को काले दरवाज़े के अंदर जाना होगा।
रामदीन इसका विरोध करता है।
“जो अंदर गया, वो वापस नहीं आया।”
माही कहती है—
“इस बार कोई वापस आएगा।”
रात में अनुष्ठान शुरू होता है।
हवेली की सारी बत्तियाँ बंद हो जाती हैं।
घड़ी 3:17 पर रुक जाती है।
काले दरवाज़े के चारों तरफ दीये जलाए जाते हैं।
माही और दूसरी माही आमने-सामने खड़ी होती हैं।
जैसे ही वे एक-दूसरे की तरफ बढ़ती हैं, हवेली में आवाजें गूंजने लगती हैं।
माही की माँ की आवाज।
देवेंद्र की आवाज।
कनक की आवाज।
सब उसे रोकने की कोशिश करते हैं।
फिर अचानक काला दरवाज़ा पूरी तरह खुल जाता है।
अंदर से वही रहस्यमयी शक्ति सामने आती है।
उसका कोई चेहरा नहीं है।
वह सिर्फ आवाज़ में बोलती है—
“माही मेरी है।”
माही जवाब देती है—
“मैं किसी की नहीं हूँ।”
शक्ति माही की सारी डरावनी यादें उसके सामने ला देती है।
बचपन।
माँ।
कनक।
देवेंद्र।
काला दरवाज़ा।
सब कुछ एक साथ।
माही टूटने लगती है।
दूसरी माही उसका हाथ पकड़ती है।
“डरो मत।”
माही पूछती है—
“अगर हम एक हो गए तो तुम खत्म हो जाओगी?”
दूसरी माही मुस्कुराती है।
“नहीं।”
“मैं पहली बार पूरी हो जाऊंगी।”
दोनों एक-दूसरे का हाथ पकड़ती हैं।
अचानक पूरी हवेली हिलने लगती है।
दरवाज़ा बंद होने लगता है।
लेकिन शक्ति आखिरी बार चीखती है—
“तुम्हें लगता है तुम मुझे बंद कर सकती हो?”
और माही के पीछे एक विशाल परछाईं खड़ी हो जाती है।