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भाग पहला — रात दो बजे की घंटी
Piyashi Atma · Paranormal · 3 मिनट
- Writer
- Piyashi Atma
- Story
- रात 2 बजे का मैसेज — पेंटिंग में क़ैद
- Chapter
- 1 of 6
- Category
- Paranormal
- Reading time
- 3 min
- Words
- 407
- Language
- Hindi (हिंदी)
- Price
- Free to read
रोहन मल्होत्रा — उम्र पच्चीस साल, पुणे में एक आईटी कंपनी में काम करने वाला, और अकेले एक किराए के फ्लैट में रहने वाला आम लड़का — उस रात बहुत थका हुआ था, क्योंकि ऑफिस में प्रोजेक्ट की डेडलाइन चल रही थी और उसने रात के डेढ़ बजे तक काम किया था। बिस्तर पर लेटते ही उसने अपना फोन साइलेंट पर डाला, पर सोने से पहले उसकी आखिरी आदत — फोन की स्क्रीन को एक आखिरी बार देखना — उसे उस रात महँगी पड़ने वाली थी, हालाँकि तब उसे यह नहीं पता था, क्योंकि स्क्रीन पर कुछ भी खास नहीं था, सिवाय घड़ी के, जो दिखा रही थी — रात के 1 बजकर 59 मिनट।
रोहन सो गया — और ठीक रात दो बजे, उसके फोन की स्क्रीन अपने आप जल उठी। साइलेंट मोड पर होते हुए भी फोन ने वो घंटी बजाई जो उसने कभी सेट नहीं की थी — एक पुरानी-सी, घंटी जैसी, मंदिर की घंटी जैसी आवाज़ — और स्क्रीन पर एक मैसेज चमका, एक ऐसे नंबर से जिसमें कोई अंक नहीं थे, बल्कि सिर्फ़ एक चित्र था — एक छोटी-सी पेंटिंग की तस्वीर, जिसमें एक लड़की खिड़की के पास खड़ी थी, और जिसके नीचे लिखा था — "रोहन, देखो मैं तुम्हारे लिए क्या लाई हूँ — तुम्हारी तस्वीर।"
रोहन उठकर बैठ गया — उसने सोचा कोई दोस्त मज़ाक कर रहा है, और उसने मैसेज को खोला। तस्वीर में वो लड़की थी, खिड़की के पास खड़ी, और उसके हाथ में एक कैनवास था, जिस पर कोई तस्वीर बनी हुई थी — पर तस्वीर इतनी छोटी थी कि साफ़ नहीं दिख रही थी। रोहन ने पहला नियम तोड़ दिया — उसने तस्वीर को ज़ूम किया — और ज़ूम करते ही उसकी साँस रुक गई, क्योंकि लड़की के हाथ में जो कैनवास था, उस पर जो तस्वीर बनी थी, वो रोहन की अपनी तस्वीर थी — बिल्कुल वैसी, जैसी वो अभी इस वक़्त था — बिस्तर पर बैठा, फोन हाथ में, आँखें बड़ी-बड़ी, और उसके पीछे, उसके कमरे की खिड़की — जिसमें से एक साया झाँक रहा था। रोहन ने झट से पलटकर अपनी खिड़की देखी — खिड़की खाली थी, पर्दा सा था, पर पर्दे के नीचे, फर्श पर, कुछ गिरा हुआ चमक रहा था — और रोहन ने टॉर्च जलाकर देखा, तो वहाँ एक पेंटिंग ब्रश पड़ा था, गीला, ताज़ा, जैसे अभी किसी ने इस्तेमाल किया हो।
⏳ सस्पेंस — बंद फ्लैट में ताज़ा ब्रश कहाँ से आया...? और पेंटिंग में रोहन के पीछे खड़ा साया कौन था...?