PretikaReal Experiencesआधी रात का आकाशवाणी — 104.8 मेगाहर्ट्ज़

भाग 5 — टेप का दूसरा पहलू

Piyashi Atma · Real Experiences · 3 मिनट

Writer
Piyashi Atma
Story
आधी रात का आकाशवाणी — 104.8 मेगाहर्ट्ज़
Chapter
5 of 5
Category
Real Experiences
Reading time
3 min
Words
423
Language
Hindi (हिंदी)
Price
Free to read

सत्तार ने टेप को आगे सुनने की हिम्मत जुटाई, और जो सुना, उसने उसकी रूह कँपा दी। कमला जी की काँपती आवाज़ के बाद टेप पर एक भारी, धुंधली आवाज़ दर्ज थी — किसी पुरुष की, जो बहुत धीमे, लगभग फुसफुसाकर कह रहा था — "कमला... तुमने वह गाना क्यों गाया? तुम्हें कहा था ना — बहन के लिए कोई गाना नहीं। अगर वह लौट आई, तो यह स्टेशन, यह इमारत, यह सब... तुम्हारा नहीं रहेगा।" और फिर शोर, किसी कुर्सी के गिरने की आवाज़, कमला जी की चीख — और फिर दम घुटने जैसी कराह, और आखिर में लंबी खामोशी। टेप के बिल्कुल आखिर में वही पुरुष आवाज़ एक बार फिर दर्ज थी, इस बार रिकॉर्डर के बिल्कुल पास से — "कोई इसे कभी नहीं सुनेगा। यह टेप यहीं रहेगी। और कमला... अब तुम रोज़ गाओगी, सिर्फ मेरे लिए, हमेशा के लिए।"

सत्तार की समझ में अब एक-एक कड़ी जुड़ने लगी। उसने नाना ओझा से दोबारा मुलाकात की और सीधा सवाल पूछा — "नाना, १९८४ में स्टेशन का डायरेक्टर कौन था?" नाना का चेहरा बदल गया, और उसने कमरे का दरवाज़ा बंद करके धीमे से कहा — "मदनलाल आगाशे। स्टेशन डायरेक्टर, और उसी इमारत का मालिक भी, क्योंकि ज़मीन उसके बाप की थी। कमला जी उस स्टेशन की आत्मा थीं, और मदनलाल चाहता था कि कमला जी की प्रसिद्धि से स्टेशन चले, पर कमला जी की बहन मीरा उस ज़मीन की असली वारिस थी — वह ज़मीन कमला और मीरा की माँ की थी, जिसे मदनलाल के बाप ने धोखे से अपने नाम करा लिया था। अगर मीरा लौट आती और कागज़ात पेश करती, तो मदनलाल सड़क पर आ जाता। कमला जी हर रविवार अपनी बहन को रेडियो पर पुकारती थीं... और १४ अक्टूबर की रात, जब कमला जी ने घोषणा की कि मीरा ने पत्र लिखा है और वह लौटने वाली है... उसी रात कमला जी की 'हृदय गति' रुक गई।" नाना की आँखें नम थीं — "पोस्टमार्टम रिपोर्ट मदनलाल ने अपने पैसे से बदलवा दी थी। सच कोई नहीं जानता... शायद सिर्फ वह टेप जानती थी, जिसे मदनलाल ने खुद कोट्ठी नंबर सात में क़ैद किया था — क्योंकि उसे मिटाने की उसकी हिम्मत नहीं हुई। मदनलाल तीन साल बाद मर गया — उसी स्टूडियो में, उसी कुर्सी पर, और कहते हैं मरते वक्त उसकी आँखें डर से फैली हुई थीं, और हाथ में एक टेप की पट्टी लिपटी थी।"

⏳ सस्पेंस — कमला देशपांडे को मारने वाला मदनलाल आगाशे तो चालीस साल पहले मर चुका... तो फिर आज भी ऊपर स्टूडियो में रात को वह धुंधली पुरुष आवाज़ किसकी गूँजती है...?

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