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भाग 4 — कोट्ठी नंबर सात
Piyashi Atma · Real Experiences · 3 मिनट
- Writer
- Piyashi Atma
- Story
- आधी रात का आकाशवाणी — 104.8 मेगाहर्ट्ज़
- Chapter
- 4 of 5
- Category
- Real Experiences
- Reading time
- 3 min
- Words
- 406
- Language
- Hindi (हिंदी)
- Price
- Free to read
उस रात सत्तार ने फैसला किया कि वह सच जाने बिना अब इस इमारत में नहीं रहेगा — या तो डर उसे भगाएगा, या सच उसे बचाएगा। उसने चाबियों का गुच्छा उठाया, मोमबत्ती ली, और पहली बार ऊपर की सीढ़ियाँ चढ़ा। ऊपर का फर्श धूल में दबा था, दीवारों पर पुराने प्रोग्राम चार्ट लटके थे, और गलियारे के आखिर में एक लोहे का दरवाज़ा था जिस पर पीतल की पट्टी पर लिखा था — "टेप लाइब्रेरी — कोट्ठी नंबर सात"। ताला जंग से पक्का हो चुका था, पर हैरानी की बात यह थी कि दरवाज़े के नीचे की दरार से एक धीमी, बिल्कुल धीमी रील-घूमने की आवाज़ आ रही थी — जैसे अंदर कोई टेप रिकॉर्डर अभी भी चल रहा हो, बारह साल से, बिना बिजली के। सत्तार ने हथौड़े से ताला तोड़ा, दरवाज़ा खोला, और अंदर का नज़ारा देखकर उसके हाथ से मोमबत्ती गिरने को हुई।
कोट्ठी के बीचों-बीच एक पुराना रील-टू-रील रिकॉर्डर रखा था, और उसकी दोनों रीलें सचमुच घूम रही थीं — आगे की रील भरी हुई, पीछे की खाली होती जा रही, जैसे कोई अदृश्य हाथ हर रात रिकॉर्डिंग करता हो। दीवारों के रैक पर सैकड़ों टेपें थीं, और सबसे ऊपर एक टेप थी जिस पर लाल स्याही से लिखा था — "१४ अक्टूबर १९८४ — आखिरी प्रसारण — कभी न सुनाई जाए।" सत्तार ने काँपते हाथ से उस टेप को उतारा, रिकॉर्डर पर चढ़ाया — और हैरानी, पुरानी टेप लगाते ही रिकॉर्डर की रीलें थम गईं, जैसे मशीन चालीस साल से बस इसी टेप का इंतज़ार कर रही हो। उसने प्ले दबाया। स्पीकर से पहले कुछ सेकंड की खामोशी आई, फिर घंटी की तीन टन, और फिर कमला देशपांडे की वही मीठी आवाज़ — "श्रोताओं, आज की महफ़िल बहुत खास है... क्योंकि आज मैंने एक गाना समर्पित किया है अपनी बहन मीरा को, जो बहुत दूर है... और मुझे विश्वास है कि जहाँ भी वह है, वह यह ज़रूर सुन रही होगी।" और फिर गाना शुरू हुआ — ऐसा दर्द भरा, ऐसा खूबसूरत, कि सत्तार की आँखों से आँसू अपने आप बह निकले। पर गाना आधे में ही अचानक रुक गया, और टेप पर एक दूसरी आवाज़ दर्ज थी — भय से भरी, कमला जी की ही आवाज़, धीमे से — "माइक बंद करो... स्टूडियो में... मैं अकेली नहीं हूँ..."
⏳ सस्पेंस — चालीस साल पहले की आखिरी रिकॉर्डिंग में कमला देशपांडे ने मरने से पहले कहा था कि स्टूडियो में वह अकेली नहीं थी... तो उस रात स्टूडियो में और कौन था...?