PretikaReal Experiencesदिल्ली कैंट — सफ़ेद साड़ी वाली

भाग पाँचवाँ — ड्राइवर सीट पर दूसरा आदमी

Piyashi Atma · Real Experiences · 3 मिनट

Writer
Piyashi Atma
Story
दिल्ली कैंट — सफ़ेद साड़ी वाली
Chapter
5 of 5
Category
Real Experiences
Reading time
3 min
Words
489
Language
Hindi (हिंदी)
Price
Free to read

वरुण ने मामा से वह सवाल पूछा जो मैसेज में लिखा था — और मामा का चेहरा उस पल ऐसे सन्न हो गया जैसे उन्हें बीस साल पुरानी किसी सज़ा की याद दिला दी गई हो। बूढ़े ने काँपते हाथों से चाय का कप उठाया, एक घूँट पिया, और फिर बोले — "बेटा, मैंने तुम्हें आधा सच बताया था — उस रात गाड़ी में मैं अकेला नहीं था, मेरे साथ मेरा दोस्त था, प्रकाश तनेजा — जो आजकल इस शहर का बहुत बड़ा आदमी है, बिल्डर है, नेता जी का दोस्त है — और सच यह है कि उस रात ड्राइवर सीट पर मैं नहीं था, प्रकाश था, क्योंकि मैं इतना नशे में था कि गाड़ी चलाने लायक़ नहीं था, और प्रकाश ने कहा था — 'तू पीछे बैठ जा, मैं चलाता हूँ।'"

"ठोकर लगी तो मैं सोया हुआ था — मुझे झटका लगा और मैं उठा, तो प्रकाश गाड़ी रोक चुका था, और उसने कहा था — 'कुछ नहीं हुआ, कुत्ता था, चल।' मैं फिर सो गया — और सुबह अखबार पढ़कर मुझे पता चला कि उस सड़क पर एक नवविवाहिता का खून मिला है, और पुलिस ढूँढ रही है। मैं प्रकाश के पास गया, मैंने पूछा, और उसने मुझे दस लाख रुपये का चेक थमाया और कहा — 'यह चेक तेरे मुँह का ताला है, श्रीकांत — और याद रख, गाड़ी तेरी थी, नंबर तेरा था, अगर मैं फँसा तो तू भी फँसेगा — तो चुप रह, और अपनी ज़िंदगी जी।' मैं चुप रह गया बेटा — मैं कायर था, मैं ग़रीब था, और दस लाख रुपये उस वक़्त मेरे लिए दुनिया थे — पर उस चेक को मैंने आज तक नहीं भुनाया, वो आज भी उसी डिब्बे में पड़ा है, उस साड़ी के पल्लू के नीचे, क्योंकि मुझे पता था कि यह रुपया नहीं, यह उस औरत की क़ब्र पर रखा पत्थर है।"

वरुण ने डिब्बे में हाथ डाला — और सच में, पल्लू के नीचे, एक पुराना पीला चेक पड़ा था, प्रकाश तनेजा के हस्ताक्षर वाला, तीस साल पहले की तारीख़ वाला। वरुण की आँखों में आँसू और आँखों के नीचे गुस्सा, दोनों एक साथ उतरे — "मामा, आपको तीस साल पहले पुलिस के पास जाना चाहिए था।" मामा ने सिर झुका लिया — "मुझे बहुत कुछ करना चाहिए था बेटा, पर मैंने कुछ नहीं किया — और अब शायद वक़्त मुझे वही मौक़ा दे रहा है जो मैंने तीस साल पहले गँवाया था — बता क्या करना है, मैं करूँगा, चाहे उसकी क़ीमत मेरी बची हुई ज़िंदगी ही क्यों न हो।" वरुण ने अपना मोबाइल उठाया और उस अनजान नंबर पर मैसेज लिखा — "सच मिल गया — अब बताइए, आप कहाँ हैं — आपकी क़ब्र कहाँ है?" — और जवाब आया, तीन शब्दों में, जिन्हें पढ़कर वरुण की साँस अटक गई — "प्रकाश की नई बिल्डिंग की नींव में।"

⏳ सस्पेंस — क्या प्रकाश ने उस औरत को अपनी बिल्डिंग की नींव में दफ़नाया था...? और क्या तीस साल बाद कोई उस नींव को उखाड़ पाएगा...?

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