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भाग पहला — रात के बारह बजे
Piyashi Atma · Real Experiences · 3 मिनट
दिल्ली कैंट की वो सड़क — जिसे आज भी पुराने दिल्लीवाले बिना नाम लिए पहचान जाते हैं — दिन में फ़ौजी गाड़ियों और स्कूल की बसों से गुलज़ार रहती है, पर रात के ग्यारह बजते-बजते उस पर अजीब-सी खामोशी उतर आती है, ऐसी खामोशी जो दिल्ली जैसे शहर में अनसुनी-सी लगती है, जैसे पूरी सड़क ने अपनी आवाज़ किसी को गिरवी रख दी हो। और रात के बारह बजे के बाद, उस सड़क पर सिर्फ़ वो लोग निकलते हैं जिन्हें या तो बहुत ज़रूरी काम होता है, या जिन्हें उस सड़क के क़िस्से मालूम नहीं होते — क्योंकि जिन्हें क़िस्से मालूम होते हैं, वो चाहे दो किलोमीटर का घुमाव क्यों न लगाना पड़े, उस सड़क से बचकर निकलते हैं।
वरुण सेहगल — उम्र उनतीस साल, एक निजी कैब कंपनी का ड्राइवर — उन लोगों में से था जिन्हें क़िस्से मालूम नहीं थे, क्योंकि वो दिल्ली में नया था, देहरादून से आया हुआ, और उसके लिए हर सड़क बस सड़क थी — जहाँ गाड़ी चलती है, वहाँ किराया बनता है। उस रात, बुधवार की रात, उसे एक सवारी एअरपोर्ट छोड़कर लौटते हुए देर हो गई थी, और घड़ी में बज रहे थे रात के ग्यारह बजकर अट्ठावन मिनट, जब उसकी गाड़ी उस सड़क पर उतरी — पेड़ों की ओट वाली, लाइटों से दूर-दूर वाली, और ऐसी सीधी कि लगे यह सड़क कहीं खत्म ही नहीं होती।
वरुण ने रेडियो चालू किया — कुछ नहीं आया, सिर्फ़ सर्सराहट। उसने सोचा शायद जंगल के पास सिग्नल कमज़ोर होता है, और उसने रफ़्तार थोड़ी बढ़ा दी, क्योंकि सुबह पाँच बजे की शिफ्ट थी और सोना ज़रूरी था। गाड़ी आगे बढ़ी — और ठीक बारह बजे, जब घड़ी की दोनों सुइयाँ एक ही जगह ऊपर खड़ी हुईं, तो वरुण की नज़र सामने की सड़क पर पड़ी — सड़क के बिल्कुल बीचों-बीच, सफ़ेद साड़ी में लिपटी एक औरत खड़ी थी, और उसका हाथ ऊपर उठा हुआ था, लिफ्ट माँगने वाली मुद्रा में — पर उसकी मुद्रा में एक अजीब बात थी, उसका हाथ बिल्कुल स्थिर था, ऐसे स्थिर जैसे किसी ने मूर्ति का हाथ उठाकर जमा दिया हो। वरुण ने ब्रेक पर पैर रखा — और तभी उसके रेडियो की सर्सराहट बंद हो गई, और रेडियो से एक पुराना गीत उतर आया — ऐसा गीत जो आजकल कभी नहीं बजता — और वरुण ने जैसे ही हाथ चैनल बदलने के लिए बढ़ाया, उसे रियरव्यू मिरर में कुछ दिखा — और उसकी साँस उसी पल अटक गई।
सस्पेंस — आईने में क्या था, जिसे देखकर वरुण का हाथ चैनल तक नहीं पहुँच सका...?
- Writer
- Piyashi Atma
- Story
- दिल्ली कैंट — सफ़ेद साड़ी वाली
- Chapter
- 1 of 5
- Category
- Real Experiences
- Reading time
- 3 min
- Words
- 416
- Language
- Hindi (हिंदी)
- Price
- Free to read
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