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भाग दूसरा — पीछे की सीट
Piyashi Atma · Real Experiences · 2 मिनट
- Writer
- Piyashi Atma
- Story
- दिल्ली कैंट — सफ़ेद साड़ी वाली
- Chapter
- 2 of 5
- Category
- Real Experiences
- Reading time
- 2 min
- Words
- 387
- Language
- Hindi (हिंदी)
- Price
- Free to read
रियरव्यू मिरर में, गाड़ी की पीछे वाली सीट पर, सफ़ेद साड़ी वाली औरत बैठी थी — बिल्कुल वैसे बैठी थी जैसे कोई सवारी बैठती है, सीधी कमर, हाथ गोद में, और नज़रें सीधी सामने, वरुण के आईने में टिकी हुईं। वरुण का शरीर जम गया — उसकी गाड़ी साठ की रफ़्तार पर थी, दरवाज़े बंद थे, शीशे ऊपर थे, और सड़क पर अभी कुछ पल पहले तक कोई नहीं था, सिवाय उस औरत के जो सड़क के बीच में खड़ी थी — वही औरत, जो अब उसकी गाड़ी के अंदर बैठी थी, बिना दरवाज़ा खोले, बिना कदम रखे। वरुण ने पीछे मुड़कर देखने की हिम्मत जुटाई — उसकी गर्दन आधी घूम चुकी थी कि उसे अपने दादाजी की एक पुरानी बात याद आई, जो वो बचपन में सुनता था — "बेटा, रात में गाड़ी में अगर कोई बिना बुलाए बैठ जाए, तो पीछे मुड़कर मत देखना — जो पीछे बैठा है, उसे आईने में देखो, क्योंकि आईना सच नहीं दिखाता, आईना वो दिखाता है जो है — और जो है, उसे देखने की हिम्मत कम ही लोगों में होती है।"
वरुण ने अपनी गर्दन वापस सीधी की — और आईने में देखता रहा। औरत ने हलचल नहीं की, बस एक बार अपना सिर थोड़ा सा झुकाया, और उसके झुकाने के साथ ही गाड़ी के अंदर की हवा बदल गई — एक ठंडी-सी हवा चली, जिसमें मोगरे की खुशबू थी, ऐसी ताज़ी खुशबू जैसे किसी ने अभी-अभी बालों में गजरा लगाया हो। और तब औरत बोली — एक ऐसी आवाज़ में जो बहुत दूर से आती हुई-सी लगती थी, जैसे कोई कुएँ के बहुत नीचे से बोल रहा हो — "आगे चलो।" वरुण की उंगलियाँ स्टीयरिंग पर जकड़ गईं — उसने कुछ नहीं कहा, बस गाड़ी चलाता रहा, और उसकी आँखें आईने से हट नहीं रही थीं। औरत ने फिर कहा — "आगे चलो — वहीं ले चलो, जहाँ तुम्हारी गाड़ी को जाना चाहिए था — आज तीस साल हो गए, और आज पहली बार इस सड़क पर ऐसी गाड़ी आई है जो मुझे वहाँ पहुँचा सकती है।" वरुण ने काँपती आवाज़ में पूछा — "कहाँ?" — और औरत ने आईने में उसकी आँखों में देखकर जवाब दिया — "वहीं — जहाँ मुझे छोड़कर भागे थे तुम्हारे लोग।"
सस्पेंस — "तुम्हारे लोग" से उसका क्या मतलब था...? वरुण की गाड़ी और तीस साल पुरानी रात का क्या रिश्ता था...?