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भाग तीसरा — गाड़ी नंबर DL-1C-1273
Piyashi Atma · Real Experiences · 3 मिनट
- Writer
- Piyashi Atma
- Story
- दिल्ली कैंट — सफ़ेद साड़ी वाली
- Chapter
- 3 of 5
- Category
- Real Experiences
- Reading time
- 3 min
- Words
- 571
- Language
- Hindi (हिंदी)
- Price
- Free to read
वरुण की गाड़ी सड़क के आखिरी मोड़ पर पहुँची — वहाँ औरत ने रुकने को कहा, और वरुण ने गाड़ी रोक दी, क्योंकि अब उसके पास रोकने के अलावा कोई रास्ता नहीं बचा था — या तो वो रोकता, या वो जानता नहीं कि इस सड़क के आगे क्या है, क्योंकि उसका नेविगेशन अजीब तरह से बीस मिनट से एक ही स्क्रीन पर अटका हुआ था — "आप अपनी मंज़िल पर पहुँच गए हैं" — हालाँकि उसने कोई मंज़िल डाली ही नहीं थी। औरत गाड़ी से उतरी — इस बार वरुण ने साइड मिरर में देखा कि वो उतरी कैसे, पर उसे उतरते हुए कोई नहीं दिखा — एक पल पीछे की सीट पर थी, अगले पल सड़क के किनारे खड़ी थी, उस पुराने बरगद के नीचे, जिसकी जड़ें सड़क को उखाड़कर बाहर आ चुकी थीं।
वरुण ने हिम्मत करके शीशा नीचे किया — और औरत ने उसे कुछ दिखाया। उसकी हथेली में एक पुराना-सा, जंग लगा हुआ चाबी का गुच्छा था, और उसने चाबियों को ऐसे उठाया जैसे कोई अपनी सबसे कीमती चीज़ दिखा रहा हो — और फिर बोली — "तीस साल पहले, इसी जगह, इसी बरगद के नीचे, एक गाड़ी ने मुझे ठोकर मारी थी — सफ़ेद रंग की अम्बैसडर, नंबर DL-1C-1273 — और उस गाड़ी का ड्राइवर भाग गया था, मुझे यहीं छोड़कर, इसी सड़क पर, उस रात जो मेरी शादी की पहली रात थी।" वरुण का खून जम गया — क्योंकि DL-1C-1273, यह नंबर उसने कहीं सुना था, कहीं देखा था — और उसे याद आया कि कहाँ — यह नंबर उसके मामा की पुरानी अम्बैसडर का था, वही अम्बैसडर जो उसके मामा ने बहुत पहले बेच दी थी, और जिसकी एक तस्वीर उसके घर की अलमारी में आज भी रखी है, जिसमें उसके मामा उसी गाड़ी के साथ खड़े हैं — और जिसके बारे में मामा ने एक ही बात बार-बार कही थी — "इस गाड़ी को मैंने बेचा नहीं था बेटा, इस गाड़ी को मैंने छुड़ाया था — एक ऐसी रात के बाद जिसे मैं भूलना चाहता था, पर जो मुझे कभी भूलने नहीं देती।"
वरुण के हाथ में रखा मोबाइल काँप रहा था — और औरत ने आखिरी बार वो कहा जिसने वरुण की दुनिया हिला दी — "मैं नाम नहीं बताती, क्योंकि नाम बताने वालों को ढूँढा नहीं जाता — मैं बस इतना कहूँगी कि मेरी लाश आज तक इस बरगद के नीचे नहीं है — मुझे ठोकर मारने वाले ने मुझे यहाँ से उठाया था, और मुझे कहीं और डाला था, किसी ऐसी जगह जहाँ से मैं लौट नहीं पाई — और जब तक मुझे मेरी चिता नहीं मिलेगी, मैं इस सड़क पर खड़ी रहूँगी, हर रात, हर गाड़ी के सामने — और तुम, वरुण, तुम उस घर के हो जिसने मुझे मारा — तो अब तय करो, कि तुम अपने घर की क़ुरबानी दोगे, या अपने घर का पाप धोएगे।" यह कहकर औरत बरगद की छाँव में घुल गई — और वरुण की गाड़ी का इंजन, जो बीस मिनट से बंद पड़ा था, अपने आप स्टार्ट हो गया — और डैशबोर्ड पर, उसके मोबाइल की स्क्रीन चमक उठी, जिस पर एक अनजान नंबर से मैसेज आया था — "कल रात, बारह बजे, वही जगह — अपने मामा को लेकर आना — उनसे पूछना, तीस साल पहले वो इस सड़क से लौटते हुए अपनी गाड़ी के डिक्की में क्या ले गए थे।"
सस्पेंस — मामा ने उस रात डिक्की में क्या ले गए थे...? और औरत को वरुण का नाम कैसे मालूम था...?