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एपिसोड 1 — वापस लौटती आवाज़
firoj saifi · Haunted Places · 2 मिनट
कनक की आत्मा को शांति मिले लगभग दस वर्ष बीत चुके थे।
शर्मा हवेली अब पहले जैसी भयावह नहीं रही थी।
काले दरवाज़े पर अब भी हर शाम एक छोटा-सा दीया जलाया जाता था। रामदीन वृद्ध हो चुका था, लेकिन उसने यह जिम्मेदारी कभी नहीं छोड़ी।
अरमान और रीवा अब भी उसी हवेली में रहते थे।
और माही...
अब दस वर्ष की बच्ची नहीं रही थी।
वह बीस वर्ष की हो चुकी थी।
कॉलेज की पढ़ाई पूरी करके वह कुछ दिनों के लिए हवेली लौटी थी।
उस शाम बारिश हो रही थी।
माही अपने पुराने कमरे की सफाई कर रही थी।
अचानक उसे अलमारी के पीछे से एक पुराना लकड़ी का डिब्बा मिला।
डिब्बे पर जंग लगा ताला था।
उसने ताला तोड़ दिया।
अंदर कुछ पुराने दस्तावेज़, एक चांदी की अंगूठी और एक काली-सफेद तस्वीर थी।
तस्वीर देखकर माही की भौंहें सिकुड़ गईं।
तस्वीर में उसके दादा खड़े थे।
लेकिन उनके पीछे एक व्यक्ति खड़ा था जिसे उसने कभी नहीं देखा था।
उस व्यक्ति के चेहरे पर एक अजीब मुस्कान थी।
तस्वीर के पीछे लिखा था—
"इसे कभी मत जगाना।"
माही का दिल तेज़ी से धड़कने लगा।
उसी समय कमरे की बत्ती झपकी।
एक बार।
दो बार।
फिर पूरी तरह बुझ गई।
अंधेरे में किसी ने बहुत धीमी आवाज़ में कहा—
"माही..."
वह स्थिर रह गई।
आवाज़ फिर आई—
"तुमने दरवाज़ा खोल दिया..."
माही ने तुरंत टॉर्च जलाई।
कमरा खाली था।
लेकिन उसकी नज़र फर्श पर गई।
वहाँ गीले पैरों के निशान थे।
इस बार निशान...
काले दरवाज़े की ओर नहीं जा रहे थे।
वे उसके कमरे के भीतर से शुरू होकर...
उसके बिस्तर के नीचे समाप्त हो रहे थे।
""""एपिसोड 2""""
- Writer
- firoj saifi
- Story
- दरवाज़े के उस पार — Season 2
- Chapter
- 1 of 8
- Category
- Haunted Places
- Reading time
- 2 min
- Words
- 272
- Language
- Hindi (हिंदी)
- Price
- Free to read
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