PretikaHaunted Placesदरवाज़े के उस पार — Season 2

एपिसोड 2 — दादा की डायरी

firoj saifi · Haunted Places · 1 मिनट

Writer
firoj saifi
Story
दरवाज़े के उस पार — Season 2
Chapter
2 of 8
Category
Haunted Places
Reading time
1 min
Words
192
Language
Hindi (हिंदी)
Price
Free to read

माही ने अगली सुबह वह तस्वीर अरमान को दिखाई।

तस्वीर देखते ही अरमान का चेहरा बदल गया।

"यह तुम्हें कहाँ मिली?"

"मेरे कमरे की पुरानी अलमारी से।"

अरमान कुछ क्षण चुप रहा।

फिर बोला,

"इसे वापस रख दो।"

माही ने पहली बार अपने पिता की आवाज़ में भय महसूस किया।

"पापा, यह व्यक्ति कौन है?"

"मुझे नहीं पता।"

"आप झूठ बोल रहे हैं।"

अरमान ने उसकी ओर देखा।

काफी देर बाद उसने कहा,

"तुम्हारे दादा के बारे में कुछ बातें हैं जो हमने तुमसे कभी नहीं बताईं।"

उसने पुराने स्टोर रूम से एक लोहे का संदूक निकाला।

संदूक के अंदर उसके दादा की डायरी थी।

डायरी का अंतिम भाग पहले कभी किसी ने नहीं पढ़ा था।

उसमें लिखा था—

"कनक अकेली नहीं थी।"

माही की आँखें फैल गईं।

आगे लिखा था—

"जिस शक्ति ने हवेली को वर्षों तक अपने नियंत्रण में रखा, उसका संबंध उस काले दरवाज़े से भी पुराना है।"

रीवा ने डायरी उसके हाथ से ले ली।

"बस।"

लेकिन देर हो चुकी थी।

माही ने अंतिम पृष्ठ पढ़ लिया था।

उस पर केवल एक वाक्य था—

"यदि दरवाज़ा दोबारा खुले, तो पीछे मुड़कर मत देखना।"

उसी रात...

हवेली के गलियारे में किसी के चलने की आवाज़ आने लगी।

धीरे-धीरे।

एक कदम।

फिर दूसरा।

फिर तीसरा।

रामदीन अपने कमरे से बाहर आया।

उसने देखा—

काले दरवाज़े के सामने दीया बुझ चुका था।

और दरवाज़ा...

स्वतः खुल रहा था।

""""एपिसोड 3""""

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