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एपिसोड 3 — तहखाने की दूसरी दीवार

firoj saifi · Haunted Places · 1 मिनट

माही, अरमान और रामदीन तहखाने में उतरे।
कनक के जाने के बाद तहखाना बंद कर दिया गया था।
लेकिन अब वहाँ कुछ बदल चुका था।
जहाँ पहले कनक की दीवार थी, उसके पीछे एक और दीवार दिखाई दे रही थी।
पुरानी।
काली।
और उस पर वही अजीब प्रतीक बना था जो हवेली के मुख्य दरवाज़े पर था।
रामदीन उसे देखते ही पीछे हट गया।
"इसे बंद कर दीजिए।"
अरमान ने पूछा,
"क्यों?"
रामदीन ने काँपती आवाज़ में कहा,
"क्योंकि कनक उस दरवाज़े के पीछे कैद थी..."
उसने दीवार की ओर देखा।
"...लेकिन यह दरवाज़ा केवल कनक को ही कैद नहीं रखता था।"
माही ने पूछा,
"तो किसे?"
रामदीन ने उत्तर नहीं दिया।
अचानक दीवार के भीतर से तीन बार आवाज़ आई।
ठक।
ठक।
ठक।
माही आगे बढ़ी।
उसने दीवार पर हाथ रखा।
उसी क्षण उसे किसी बच्चे के रोने की आवाज़ सुनाई दी।
"माँ..."
माही ने हाथ पीछे खींच लिया।
"यहाँ कोई बच्चा है।"
रामदीन घबराकर बोला,
"नहीं!"
लेकिन उसी पल दीवार में दरार पड़ गई।
अंदर एक संकरा मार्ग दिखाई दिया।
और उसके अंत में...
एक लकड़ी का दरवाज़ा था।
जिस पर अंदर से नाखूनों के निशान थे।

""""एपिसोड 4""""

Writer
firoj saifi
Story
दरवाज़े के उस पार — Season 2
Chapter
3 of 8
Category
Haunted Places
Reading time
1 min
Words
191
Language
Hindi (हिंदी)
Price
Free to read

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