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PART 10 — रात की खामोशी
firoj saifi · Haunted Places · 2 मिनट
- Writer
- firoj saifi
- Story
- Raat ki khamoshi
- Chapter
- 10 of 10
- Category
- Haunted Places
- Reading time
- 2 min
- Words
- 225
- Language
- Hindi (हिंदी)
- Price
- Free to read
आरव समझ जाता है कि इस शक्ति को बाहर आने से रोकने का सिर्फ एक रास्ता है।
उसे खुद दरवाज़े के अंदर रहना होगा।
रिया उसे रोकती है।
“नहीं भैया… इस बार मेरी बारी है।”
आरव सिर हिलाता है।
“तुमने मुझे एक बार बचाया था।”
वह मुस्कुराता है।
“अब मेरी बारी है।”
आरव दरवाज़े के अंदर चला जाता है।
दरवाज़ा बंद हो जाता है।
मीरा और रिया बाहर रह जाती हैं।
कुछ सेकंड बाद…
गाँव में पहली बार सुबह होती है।
सूरज निकलता है।
पक्षी चहचहाने लगते हैं।
सब कुछ सामान्य हो जाता है।
लेकिन मीरा मंदिर की सीढ़ियों पर बैठी रो रही थी।
उसके पास आरव का फोन पड़ा था।
फोन अचानक बजता है।
स्क्रीन पर कॉल आ रही थी—
आरव।
मीरा काँपते हाथों से फोन उठाती है।
दूसरी तरफ कुछ सेकंड तक कोई आवाज़ नहीं।
फिर आरव की फुसफुसाहट सुनाई देती है—
“मीरा…”
मीरा की आँखों में आँसू आ जाते हैं।
“आरव?”
दूसरी तरफ से आवाज़ आती है—
“तुमने दरवाज़ा बंद तो कर दिया…”
कुछ सेकंड खामोशी।
फिर—
“…लेकिन खिड़की खुली रह गई।”
कॉल कट।
मीरा धीरे-धीरे पीछे मुड़ती है।
मंदिर के सामने लगी एक पुरानी खिड़की…
अपने आप खुलती है।
अंदर से काला अंधेरा बाहर फैलने लगता है।
और उस अंधेरे में…
आरव खड़ा था।
लेकिन उसके चेहरे पर मुस्कान थी।
वह धीरे से अपनी उंगली होंठों पर रखता है।
“श्श्श…”
फिर पूरे गाँव में एक साथ…
सभी आवाज़ें बंद हो जाती हैं।
रात की खामोशी लौट चुकी थी।
सीज़न 1 समाप्त।
लेकिन कहानी अभी खत्म नहीं हुई…
क्योंकि आरव ने दरवाज़े के अंदर जिस चीज़ को बंद किया था…
वो आरव नहीं था।
सीज़न 2 — “दरवाज़े के उस पार”