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PART 9 — असली चेहरा

firoj saifi · Haunted Places · 2 मिनट

कमरे में अंधेरा।

आरव टॉर्च जलाता है।

दीवारों पर तस्वीरें लगी थीं।

हर तस्वीर में एक परिवार।

और हर परिवार के बीच…

एक ही चेहरा।

आरव।

मीरा समझ जाती है।

“ये सब तुम्हारे पूर्वज नहीं हैं…”

आरव पूछता है—

“तो कौन हैं?”

मीरा धीरे से कहती है—

“तुम्हारे जैसे लोग।”

आरव को पता चलता है कि हर कुछ दशकों में इस गाँव में एक बच्चा पैदा होता है जो उस शक्ति का अगला “दरवाज़ा” बनता है।

और इस बार…

वह बच्चा आरव था।

उसके पिता ने उसे बचाने के लिए पूरे गाँव से झूठ बोला।

लेकिन रिया ने खुद को बलिदान करके उस शक्ति को कुछ सालों तक रोककर रखा।

अब दरवाज़ा खुल चुका था।

और अंधेरे में एक आकृति दिखाई देती है।

वह आरव के बिल्कुल सामने खड़ी होती है।

धीरे-धीरे उसका चेहरा बदलता है।

पहले पिता का चेहरा।

फिर रिया का।

फिर मीरा का।

और आखिर में…

आरव का।

वह मुस्कुराकर कहती है—

“मैं कोई भूत नहीं हूँ।”

आरव पूछता है—

“फिर कौन हो?”

वह जवाब देती है—

“मैं वो हूँ… जो तुम्हारे अंदर तब से रह रहा है, जब तुम पैदा भी नहीं हुए थे।”

आरव के कानों में अचानक हजारों आवाज़ें गूंजने लगती हैं।

और आखिरी आवाज़…

उसकी अपनी थी।

“मुझे बाहर आने दो।”

""""पार्ट 10""""

Writer
firoj saifi
Story
Raat ki khamoshi
Chapter
9 of 10
Category
Haunted Places
Reading time
2 min
Words
210
Language
Hindi (हिंदी)
Price
Free to read

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