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PART 8 — मंदिर के नीचे
firoj saifi · Haunted Places · 1 मिनट
मंदिर के नीचे एक गुप्त कमरा था।
दीवार पर सैकड़ों नाम लिखे थे।
हर नाम के आगे एक तारीख।
सबसे आखिरी नाम—
रिया शर्मा।
लेकिन उसके आगे तारीख नहीं थी।
आरव समझ जाता है।
रिया अभी पूरी तरह मरी नहीं थी।
तभी उसे एक पुरानी किताब मिलती है।
उसमें लिखा था—
“जिस दिन गाँव की रात में कोई आवाज़ नहीं होगी, उस दिन दरवाज़ा खुलेगा।”
आरव किताब बंद करता है।
और अचानक…
पूरे गाँव में खामोशी छा जाती है।
एकदम पूर्ण खामोशी।
न हवा।
न पत्ते।
न कीड़े।
कुछ भी नहीं।
मीरा काँपती हुई कहती है—
“आरव…”
फर्श के नीचे से कुछ खुरचने की आवाज़ आती है।
खर्र… खर्र… खर्र…
पत्थर टूटता है।
नीचे एक काला दरवाज़ा दिखाई देता है।
दरवाज़े पर लिखा था—
“अंदर जो है, वो कभी इंसान था।”
आरव दरवाज़ा खोल देता है।
अंदर…
रिया बैठी थी।
जिंदा।
आरव दौड़कर उसे गले लगा लेता है।
लेकिन रिया रोते हुए कहती है—
“भैया… तुमने दरवाज़ा क्यों खोला?”
आरव पीछे हटता है।
“क्यों?”
रिया काँपते हुए दरवाज़े के पीछे देखती है।
“क्योंकि अब वो बाहर आ सकता है।”
अचानक पीछे से किसी ने दरवाज़ा बंद कर दिया।
""""पार्ट 9""""
- Writer
- firoj saifi
- Story
- Raat ki khamoshi
- Chapter
- 8 of 10
- Category
- Haunted Places
- Reading time
- 1 min
- Words
- 190
- Language
- Hindi (हिंदी)
- Price
- Free to read
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