Pretika › Haunted Places › वो फ्लैट खाली नहीं था।
एपिसोड 16 — कबीर का बलिदान
firoj saifi · Haunted Places · 3 मिनट
कमरे की दीवारें काँप रही थीं।
काली परछाईं धीरे-धीरे कमरे के बीच आ रही थी।
नैना ने कबीर का हाथ पकड़ लिया।
“मैं तुझे नहीं जाने दूँगी।”
कबीर ने कहा—
“नैना, मेरी बात सुन।”
“नहीं।”
“मेरी मौत पहले ही हो चुकी है।”
“मुझे फर्क नहीं पड़ता।”
“लेकिन मुझे पड़ता है।”
नैना रोने लगी।
“तूने मुझे इतने दिनों तक झूठ क्यों बोला?”
“क्योंकि मैं चाहता था कि तू डर से नहीं, जिंदगी से जुड़ी रहे।”
अचानक परछाईं ने हमला किया।
कबीर ने नैना को पीछे धकेल दिया।
काली आकृति उससे टकराई।
कबीर दीवार से जा लगा।
नैना चीखी—
“कबीर!”
वह उठ खड़ा हुआ।
उसके शरीर से धुआँ निकल रहा था।
शालिनी बोली—
“अब समय आ गया है।”
कबीर ने उसकी तरफ देखा।
“मैं तैयार हूँ।”
नैना ने पूछा—
“किसलिए?”
कबीर ने उसकी तरफ देखा।
“दरवाज़ा बंद करने के लिए।”
“नहीं।”
“नैना…”
“मैं तुझे खो चुकी हूँ। दोबारा नहीं खोऊँगी।”
कबीर मुस्कुराया।
“तूने मुझे खोया नहीं।”
“तो?”
“मैं बस वहाँ जा रहा हूँ जहाँ से वापस नहीं आ सकता।”
नैना ने उसका हाथ पकड़ लिया।
“मत जा।”
कबीर ने कहा—
“याद है तूने बचपन में मीरा से क्या कहा था?”
नैना रोते हुए बोली—
“मैं वापस आऊँगी।”
“हाँ।”
“मैंने वादा किया था।”
“और अब उसे पूरा कर।”
कबीर कमरे नंबर 13 की तरफ बढ़ा।
नैना उसके पीछे दौड़ी।
लेकिन दरवाज़ा बंद हो गया।
“कबीर!”
अंदर से उसकी आवाज़ आई—
“दरवाज़ा मत खोलना।”
“कबीर!”
“इस बार किसी का हाथ मत छोड़ना।”
नैना दरवाज़ा पीटती रही।
अंदर से चीख सुनाई दी।
फिर सन्नाटा।
नैना फर्श पर गिर गई।
कुछ सेकंड बाद दरवाज़ा खुला।
अंदर कोई नहीं था।
सिर्फ कबीर की घड़ी पड़ी थी।
नैना ने उसे उठा लिया।
घड़ी की सुई 3:13 पर रुकी हुई थी।
शालिनी ने कहा—
“उसने खुद को दरवाज़े का हिस्सा बना दिया।”
नैना ने पूछा—
“क्या वो वापस आएगा?”
शालिनी चुप रही।
“सच बताओ।”
“नहीं।”
नैना की आँखों से आँसू बहने लगे।
लेकिन तभी घड़ी के अंदर से आवाज़ आई—
“नैना…”
नैना ने घड़ी कान से लगाई।
कबीर की आवाज़ थी।
“मैं अभी गया नहीं हूँ।”
नैना ने घड़ी को कसकर पकड़ लिया।
“कबीर?”
आवाज़ आई—
“वो तुझे कमरे नंबर 13 में बुलाएगी।”
“कौन?”
“शालिनी नहीं।”
“फिर?”
“वो।”
आवाज़ टूट गई।
घड़ी बंद हो गई।
अचानक पूरी बिल्डिंग की बिजली चली गई।
सभी दरवाज़े अपने आप खुल गए।
सीढ़ियों से बच्चों की हँसी आने लगी।
शालिनी ने कहा—
“आखिरी रात शुरू हो गई।”
नैना ने पूछा—
“क्या होगा?”
“जो बीस साल पहले होना चाहिए था।”
अचानक सामने की दीवार पर एक दरवाज़ा दिखाई दिया।
उस पर लिखा था—
कमरा 13
नैना ने धीरे से कदम बढ़ाया।
शालिनी ने कहा—
“अगर अंदर गई…”
नैना ने पीछे देखे बिना कहा—
“तो वापस नहीं आऊँगी?”
शालिनी ने जवाब दिया—
“शायद।”
नैना ने दरवाज़ा खोला।
अंदर उसका बचपन था।
और दरवाज़ा उसके पीछे बंद हो गया।
एपिसोड समाप्त।
- Writer
- firoj saifi
- Story
- वो फ्लैट खाली नहीं था।
- Chapter
- 16 of 20
- Category
- Haunted Places
- Reading time
- 3 min
- Words
- 465
- Language
- Hindi (हिंदी)
- Price
- Free to read
वो फ्लैट खाली नहीं था। · सभी भाग →
और कहानियाँ · More stories
- दरवाज़े के उस पार , Season 1 · firoj saifi
- Raat ki khamoshi · firoj saifi
- दरवाज़े के उस पार — Season 2 · firoj saifi
- मुझे आवाज़ किसने दी? · firoj saifi