Pretika › Haunted Places › वो फ्लैट खाली नहीं था।
एपिसोड 17 — आखिरी रात
firoj saifi · Haunted Places · 3 मिनट
नैना ने चारों तरफ देखा।
वह किसी कमरे में नहीं थी।
वह अपने बचपन के घर में थी।
दीवार पर वही पुरानी घड़ी।
टेबल पर उसकी माँ की तस्वीर।
कोने में उसका बचपन का खिलौना।
सब कुछ वैसा ही था।
लेकिन घर खाली था।
“माँ?”
कोई जवाब नहीं।
फिर पीछे से मीरा की आवाज़ आई।
“नैना।”
नैना पलटी।
छोटी मीरा खड़ी थी।
लाल रिबन उसके बालों में था।
“तुमने मेरा हाथ क्यों छोड़ा था?”
नैना की आँखों में आँसू आ गए।
“मुझे डर लगा था।”
“और अब?”
“अब नहीं लगेगा।”
मीरा मुस्कुराई।
“तो मेरा हाथ पकड़ो।”
नैना ने हाथ बढ़ाया।
लेकिन तभी कबीर की आवाज़ आई—
“मत पकड़ना।”
मीरा का चेहरा बदल गया।
उसकी आँखें काली हो गईं।
वह गायब हो गई।
नैना ने चारों तरफ देखा।
एक दरवाज़ा खुला।
उसके अंदर उसकी माँ बैठी थी।
“नैना, इधर आओ।”
नैना धीरे-धीरे आगे बढ़ी।
माँ ने कहा—
“तुम्हें घर छोड़ना होगा।”
“क्यों?”
“क्योंकि वो तुम्हें ढूँढ रही है।”
“कौन?”
माँ ने जवाब नहीं दिया।
उसका चेहरा अचानक बदल गया।
अब वह शालिनी थी।
“बहुत देर कर दी।”
नैना पीछे हट गई।
दूसरा दरवाज़ा खुला।
इस बार अंदर कबीर बैठा था।
नैना दौड़कर उसके पास गई।
“कबीर!”
उसने मुस्कुराकर कहा—
“मैंने कहा था ना, मैं तुझे अकेला नहीं छोड़ूँगा।”
नैना उसकी तरफ बढ़ी।
लेकिन उसे कुछ अजीब लगा।
“तू असली है?”
कबीर ने कहा—
“तुझे क्या लगता है?”
नैना पीछे हट गई।
“तू नहीं है।”
कबीर का चेहरा धीरे-धीरे बदल गया।
वह काली परछाईं बन गया।
कमरा अंधेरे में डूब गया।
नैना भागने लगी।
लेकिन हर दरवाज़ा उसे उसी जगह वापस ले आता।
एक दरवाज़ा।
फिर वही कमरा।
दूसरा दरवाज़ा।
फिर वही कमरा।
तीसरा।
फिर वही।
नैना चीख पड़ी—
“मुझे बाहर जाने दो!”
तभी सामने एक और नैना बैठी दिखाई दी।
वह बिल्कुल वैसी ही थी।
उसी कपड़े।
उसी चेहरे।
उसी आँखें।
दूसरी नैना ने मुस्कुराकर कहा—
“तुम बहुत देर से आई हो।”
असली नैना ने पूछा—
“तुम कौन हो?”
“तुम।”
“नहीं।”
“मैं वो हूँ जो तुम बन सकती थीं।”
“मुझे जाने दो।”
दूसरी नैना खड़ी हुई।
“तुम्हें लगता है तुम उससे लड़ सकती हो?”
“हाँ।”
“तुम डरती हो।”
“हाँ।”
“फिर भी लड़ोगी?”
नैना ने कहा—
“हाँ।”
दूसरी नैना मुस्कुराई।
“यही तुम्हारी कमजोरी है।”
“डर?”
“नहीं।”
वह करीब आई।
“तुम्हारा विश्वास।”
नैना ने समझने की कोशिश की।
“क्या?”
“वो तुम्हारे डर से नहीं, तुम्हारे विश्वास से मजबूत होती है।”
अचानक कमरे में शालिनी की आवाज़ आई—
“नैना!”
दूसरी नैना गायब हो गई।
सामने एक कैमरा पड़ा था।
नैना ने उसे उठाया।
स्क्रीन अपने आप चलने लगी।
उसमें नैना दिखाई दे रही थी।
लेकिन वह आज की नैना नहीं थी।
वह भविष्य की नैना थी।
स्क्रीन पर उसने कहा—
“अगर तुम यह देख रही हो, तो शायद मैं मर चुकी हूँ।”
नैना के हाथ काँपने लगे।
वीडियो में भविष्य की नैना कुछ सेकंड चुप रही।
फिर बोली—
“लेकिन अगर मैं अभी जिंदा हूँ… तो इसका मतलब है कि मैंने योजना बदल दी।”
वीडियो बंद हो गया।
नैना ने कैमरे को देखा।
फिर पीछे से कबीर की आवाज़ आई—
“योजना समझ आई?”
नैना ने पलटकर देखा।
कबीर खड़ा था।
इस बार उसकी आँखें शांत थीं।
“तुझे यहाँ से भागना नहीं है।”
“तो?”
“उसे उसके दरवाज़े से बाहर निकालना है।”
नैना ने पूछा—
“कैसे?”
कबीर ने कहा—
“डर को खत्म करके।”
अचानक कमरे की दीवार पर तेरह नाम दिखाई दिए।
नैना ने कहा—
“नाम मिटाने हैं।”
कबीर मुस्कुराया।
“अब तू तैयार है।”
एपिसोड समाप्त।
- Writer
- firoj saifi
- Story
- वो फ्लैट खाली नहीं था।
- Chapter
- 17 of 20
- Category
- Haunted Places
- Reading time
- 3 min
- Words
- 559
- Language
- Hindi (हिंदी)
- Price
- Free to read
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