Pretika › Real Experiences › नूर
रातों का इश्क़
Pretika · Real Experiences · 4 मिनट
उस रात के बाद, अरमान और नूर की मुलाक़ातों का एक अजीब-सा सिलसिला शुरू हो गया।
वो सिर्फ़ रात को आती थी। जब पूरा क़स्बा सो जाता, जब आख़िरी कुत्ता भी भौंकना बंद कर देता, जब चाँद आसमान के बीचों-बीच आ जाता — तब, आम के बाग़ की उस ठंडी हवा के साथ, वो आँगन में उतर आती थी। पहली बार जब वो अरमान के सामने, ज़मीन पर खड़ी हुई, तो अरमान का सारा डर जैसे उसकी मुस्कान में पिघल गया।
वो घंटों बातें करते। नूर उसे बीते ज़मानों की कहानियाँ सुनाती — नवाबों के क़िस्से, पुराने राग, ऐसी दुनिया जो अब सिर्फ़ किताबों में बची थी। और अरमान उसे अपनी दुनिया की बातें बताता — अपने शहर की, अपनी माँ की, अपने सपनों की, उस छोटे-से जीवन की, जो वो जीना चाहता था। वो उसे ट्रांज़िस्टर पर बजते नए गाने सुनाता, और नूर हैरानी से उस छोटे-से डिब्बे को देखती, जिसमें से इतनी सारी आवाज़ें निकलती थीं।
धीरे-धीरे, बिना जाने, बिना समझे, बिना ख़ुद को रोके — अरमान को नूर से इश्क़ हो गया।
और ये कोई आम इश्क़ नहीं था। ये वो इश्क़ था, जिसमें इंसान अपनी जान, अपना होश, अपना सब कुछ भूल जाता है। दिन भर अरमान बस शाम होने का इंतज़ार करता। स्कूल के बच्चे शिकायत करने लगे कि मास्टर साहब अब पढ़ाते नहीं, बस खिड़की से बाहर देखते रहते हैं। उसका खाना-पीना छूट गया। उसकी आँखों के नीचे स्याह घेरे पड़ गए। पर उसे कोई फ़र्क़ नहीं पड़ता था। क्योंकि रात होते ही, जब नूर उसके सामने होती, तो उसे लगता जैसे उसे दुनिया की हर चीज़ मिल गई हो।
पर इस इश्क़ में कुछ चीज़ें ऐसी थीं, जिन्हें अरमान देख तो रहा था, पर समझना नहीं चाहता था।
नूर कभी कुछ खाती-पीती नहीं थी। जब अरमान उसके पास होता, तो हवा में हमेशा एक हल्की-सी, राख की गंध रहती थी। जब वो हँसती, तो उसकी हँसी कानों को मीठी लगती, पर सीने में एक अजीब-सा ठंडापन भर जाता। और एक रात, जब अरमान ने उसका हाथ थामने की कोशिश की — तो वो हाथ बर्फ़ से भी ज़्यादा ठंडा था, इतना ठंडा कि अरमान की उँगलियाँ कुछ पल के लिए सुन्न पड़ गईं। और सबसे अजीब बात — चाँद की रौशनी में, अरमान की परछाईं तो ज़मीन पर पड़ती थी... पर नूर की कोई परछाईं नहीं थी।
एक रात, अरमान ने हिम्मत करके पूछ ही लिया, "नूर, तुम सच में कौन हो? तुम कोई इंसान नहीं हो, मैं जानता हूँ। फिर भी मुझे तुमसे डर नहीं लगता। मुझे बस... तुमसे मोहब्बत है।"
नूर कुछ देर ख़ामोश रही। उसकी गहरी आँखों में आँसुओं की एक हल्की-सी चमक उभर आई। फिर उसने कहा, "मैं उस आग से बनी हूँ, जिसमें सदियों पहले मुझे जला दिया गया था, अरमान। मैं वो रूह हूँ, जो मरकर भी नहीं मर पाई। तेरे ज़माने के लोग मुझ जैसों को जिन्न कहते हैं। मैं धुएँ रहित आग से बनी हूँ। मैं इस हवेली से बंधी हुई हूँ, सदियों से, अकेली।"
"और वो कहानियाँ?" अरमान ने काँपते हुए पूछा, "वो लड़के, जो यहाँ आकर कभी वापस नहीं लौटे?"
नूर की आँखों में एक गहरा दर्द उतर आया। उसने अरमान की आँखों में सीधे देखा, और बोली, "अरमान, मेरी एक गुज़ारिश है। आने वाली अमावस की रात से पहले — तू यहाँ से चला जा। बहुत दूर। और फिर कभी पलटकर मत आना। मुझ पर भरोसा कर। मैं तुझे खोना नहीं चाहती... इसीलिए कह रही हूँ।"
पर अरमान कहाँ मानने वाला था। इश्क़ में डूबे एक इंसान को दुनिया की कोई चेतावनी, कोई ख़तरा, कोई मौत डरा नहीं सकती। उसने नूर का वो ठंडा हाथ अपने दोनों हाथों में थाम लिया, और कहा, "मैं कहीं नहीं जाऊँगा, नूर। तेरे बिना नहीं। चाहे जो हो जाए।"
नूर ने आँखें मूँद लीं। उसके चेहरे पर इश्क़ और दर्द, दोनों एक साथ तैर गए। शायद उसी पल उसने भी जान लिया था, कि अब बहुत देर हो चुकी थी।
- Writer
- Pretika
- Story
- नूर
- Chapter
- 3 of 5
- Category
- Real Experiences
- Reading time
- 4 min
- Words
- 644
- Language
- Hindi (हिंदी)
- Price
- 3 parts free · 2 unlock with coins
और कहानियाँ · More stories
- दरवाज़े के उस पार , Season 1 · firoj saifi
- दरवाज़े के उस पार — Season 2 · firoj saifi
- “आखिरी दरवाज़ा” — Season 3 · firoj saifi
- डूबे गाँव की जनगणना · Pretika