Pretika › Jinn & Spirits › हमज़ाद
Episode 5 — जो साथ पैदा हुआ
Pretika · Jinn & Spirits · 4 मिनट
- Writer
- Pretika
- Story
- हमज़ाद
- Chapter
- 6 of 11
- Category
- Jinn & Spirits
- Reading time
- 4 min
- Words
- 622
- Language
- Hindi (हिंदी)
- Price
- Free to read
माँ ने जो कहानी उस रात मुझे सुनाई, वो हमारे खानदान की सबसे गहरी और सबसे डरी हुई परत थी — वो बात जो पीढ़ी-दर-पीढ़ी सिर्फ़ फुसफुसाहट में एक-दूसरे को बताई जाती थी, और फिर दफ़्न कर दी जाती थी।
उन्होंने बताया कि आज से बहुत साल पहले, हमारे खानदान में एक बुज़ुर्ग थे — मेरे परनाना के भी नाना, यानी बहुत ऊपर की किसी पीढ़ी के — जो एक अमिल थे। और वो कोई मामूली अमिल नहीं थे। उनके पास जिन्नात को बुलाने और बाँधने का इल्म था। लोग दूर-दूर से अपनी मुश्किलें लेकर उनके पास आते थे। पर इल्म की एक भूख होती है, ज़ोया — जितना मिलता है, उतना और चाहिए होता है। और एक दिन उस बुज़ुर्ग ने वो करने की ठान ली जो कोई समझदार अमिल कभी नहीं करता। उसने अपने ही हमज़ाद को जगाने का फ़ैसला किया।
मैंने बीच में टोका — हमज़ाद? ये क्या होता है, माँ?
माँ ने कहा — हर इंसान जब पैदा होता है, बेटा, तो उसी घड़ी, उसी पल, उस दूसरी दुनिया में — जिन्नात की दुनिया में — उसका एक हमशक्ल भी पैदा होता है। आग और धुएँ से बना हुआ। उसे हमज़ाद कहते हैं। वो उम्र भर हमारे साथ रहता है, हमें देखता है, पर सोया रहता है, चुप रहता है। हमें पता भी नहीं चलता। पर अगर कोई अमिल अपने हमज़ाद को जगा ले, और उस पर काबू पा ले, तो कहते हैं उसे बेइंतहा ताक़त मिल जाती है — क्योंकि वो हमज़ाद उसकी हर बात जानता है, उसके दुश्मन की हर चाल पहले से भाँप लेता है।
तो उन्होंने अपने हमज़ाद को जगा लिया? — मैंने पूछा।
जगा तो लिया, माँ की आवाज़ और धीमी हो गई, पर काबू नहीं रख पाए। और उसके बाद जो हुआ, उसकी कीमत आज तक हमारा खानदान चुका रहा है। एक सौदा हुआ था, ज़ोया। किसी बहुत बड़ी, बहुत पुरानी ताक़त के साथ। और उस सौदे के मुताबिक़, हमारे खानदान की हर पीढ़ी में एक बच्चा ऐसा पैदा होता है जिसका हमज़ाद जन्म से जागा हुआ होता है। और वो बच्चा...
माँ रुक गईं।
वो बच्चा क्या, माँ?
वो बच्चा मैं थी, बेटा। मुझसे पहले मेरे चाचा थे। और इस पीढ़ी में... उन्होंने मेरा हाथ कसकर पकड़ लिया, इस पीढ़ी में वो तू है।
मेरे पूरे बदन में जैसे बर्फ़ दौड़ गई। तो वो रात के तीन बजकर बयालीस, वो दूसरी साँस, आईने में मुस्कुराती वो परछाईं, वो खुशबू, वो आवाज़ जो मेरा नाम लेती थी — वो सब कोई बाहर से आई हुई चीज़ नहीं थी। वो मेरे साथ पैदा हुआ था। वो जन्म से मेरे साथ था। और उस ताबीज़ ने पंद्रह साल तक उसे मुझसे — या शायद मुझे उससे — अलग रखा था। जब से ताबीज़ खोया, तब से वो दीवार गिर गई थी। और अब वो जाग चुका था।
माँ ने बताया कि वो अगले दिन एक अमिल को बुलाने वाली हैं, कोई जिन पर वो बरसों से भरोसा करती आई हैं, ताकि दोबारा कोई ताबीज़ बनवाया जा सके। पर उस रात, माँ के सो जाने के बाद, मेरे phone पर एक अनजान number से एक message आया। सिर्फ़ एक लाइन का।
जो तुम्हारी माँ बुला रही है, वो तुम्हारी मदद के लिए नहीं आ रहा। और जो चीज़ तुम्हारे साथ है — उससे डरने से पहले, ये पूछना कि इतने सालों में उसने तुम्हें कभी नुक़सान क्यों नहीं पहुँचाया।
मैंने उस number पर call करने की कोशिश की। पर वो कभी लगा ही नहीं। और उस रात, पहली बार, मुझे तीन बजकर बयालीस पर डर नहीं लगा।
पहली बार, मुझे जानना था — कि वो कौन है, जो जन्म से मेरा है।
Comment Question
और मुझे एक बात बताओ — अगर एक दिन तुम्हें पता चले कि तुम्हारा हमज़ाद जाग चुका है, तो तुम्हारा सबसे पहला एहसास क्या होगा — “डर” या “सवाल”? नीचे comment में लिखो, बस एक शब्द।