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एपिसोड 3 — तस्वीर में चेहरा

firoj saifi · Haunted Places · 2 मिनट

अगले दिन माही अकेली हवेली की पुरानी लाइब्रेरी में खेल रही थी।

वहाँ किताबों के अलावा पुराने कागज़, रजिस्टर और तस्वीरें रखी थीं।

एक तस्वीर उसके हाथ लग गई।

तस्वीर पर धूल जमी थी।

माही ने उसे अपनी फ्रॉक से साफ किया।

तस्वीर पर तारीख लिखी थी—

1974

तस्वीर में अरमान के दादा खड़े थे।

उनकी पत्नी भी साथ थीं।

लेकिन उनके बीच एक जवान लड़की खड़ी थी।

माही ने तस्वीर लेकर अरमान को बुलाया।

"पापा, ये कौन है?"

अरमान ने तस्वीर देखते ही कुछ पल के लिए बोलना बंद कर दिया।

उसने लड़की का चेहरा ध्यान से देखा।

"मुझे नहीं पता।"

"लेकिन ये हमारे परिवार की तस्वीर है ना?"

"हाँ।"

"फिर ये कौन है?"

अरमान के पास जवाब नहीं था।

उस रात उसने पुराने रजिस्टर निकाल लिए।

कई घंटे खोजने के बाद उसे एक पुराने खत में एक नाम मिला—

कनक।

अरमान ने रामदीन से पूछा।

रामदीन काफी देर तक चुप रहा।

फिर बोला,

"कनक बिटिया..."

उसकी आँखें नम हो गईं।

"वो इस हवेली में रहती थी।"

"परिवार की सदस्य थी?"

रामदीन ने सिर हिलाया।

"नहीं।"

"तो फिर?"

"नौकरानी की बेटी थी।"

अरमान की आँखें सिकुड़ गईं।

रामदीन ने आगे कहा,

"मालिक के दादा जी उसे बहुत चाहते थे। लेकिन परिवार को ये रिश्ता मंजूर नहीं था।"

"फिर क्या हुआ?"

रामदीन ने काले दरवाज़े की तरफ देखा।

"1975 में वो अचानक गायब हो गई।"

"कहाँ गई?"

रामदीन ने बहुत धीमी आवाज़ में कहा,

"मैंने उसे उस रात... उसी दरवाज़े के अंदर जाते देखा था।"

अरमान सन्न रह गया।

उस रात माही अपने कमरे में सो रही थी।

अचानक उसकी नजर खिड़की के शीशे पर पड़ी।

शीशे में उसका प्रतिबिंब नहीं था।

एक दूसरी लड़की खड़ी थी।

लंबे बाल।

पीला चेहरा।

और एक अजीब मुस्कान।

माही पीछे हटी।

लेकिन शीशे में वह लड़की उसके और करीब आ गई।

उसने होंठ हिलाए।

"मुझे बाहर निकालो..."

माही चीख पड़ी।

उसकी आवाज़ पूरी हवेली में गूँज गई।

"""""एपिसोड 4"""""

Writer
firoj saifi
Story
दरवाज़े के उस पार , Season 1
Chapter
3 of 8
Category
Haunted Places
Reading time
2 min
Words
316
Language
Hindi (हिंदी)
Price
Free to read

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