PretikaHaunted Placesदरवाज़े के उस पार , Season 1

एपिसोड 6 — तहखाने में

firoj saifi · Haunted Places · 2 मिनट

Writer
firoj saifi
Story
दरवाज़े के उस पार , Season 1
Chapter
6 of 8
Category
Haunted Places
Reading time
2 min
Words
245
Language
Hindi (हिंदी)
Price
Free to read

अरमान और रीवा दौड़कर काले दरवाज़े तक पहुँचे।

दरवाज़ा पहले से खुला था।

जैसे कोई उनका इंतजार कर रहा हो।

"माही!"

रीवा सीढ़ियाँ उतरती चली गई।

तहखाने में हल्की रोशनी थी।

वहाँ कोई दीया नहीं था।

फिर भी अंधेरे में एक पीली रोशनी तैर रही थी।

माही टूटी हुई दीवार के सामने बैठी थी।

उसके हाथ में पुरानी चूड़ियाँ थीं।

वह धीरे-धीरे एक लोरी गा रही थी।

ऐसी लोरी जिसे उसने कभी सीखा ही नहीं था।

रीवा ने उसे पुकारा।

"माही, बेटा!"

माही ने उसकी तरफ देखा।

लेकिन उसकी आँखों में पहचान नहीं थी।

अरमान आगे बढ़ा।

जैसे ही उसने माही का हाथ पकड़ना चाहा—

एक अदृश्य ताकत ने उसे जोर से पीछे धकेल दिया।

वह दीवार से जा टकराया।

तभी टूटी हुई दीवार के पीछे से एक आकृति धीरे-धीरे उभरने लगी।

फटे पुराने कपड़े।

चेहरे पर बिखरे बाल।

और आँखों की जगह गहरे अंधेरे गड्ढे।

कनक।

उसकी आवाज़ पूरे तहखाने में गूँजी।

"ये मेरी बेटी है।"

रीवा घुटनों के बल बैठ गई।

"हमने कुछ नहीं किया, कनक।"

कनक ने माही के सिर पर हाथ रखा।

"तुम सबने उसे मुझसे छीना था।"

माही की आँखें धीरे-धीरे सफेद होने लगीं।

रीवा चीख पड़ी।

"माही!"

उसी समय ऊपर से रामदीन की आवाज़ सुनाई दी।

"मालिक!"

रामदीन हाथ में एक पुरानी डायरी लेकर तहखाने में दौड़ता हुआ आया।

"मुझे पता है इसे कैसे रोकना है!"

उसने डायरी खोली।

"कनक की माँ ने ये मुझे मरने से पहले दी थी।"

डायरी में लिखा था—

कनक की आत्मा तभी शांत होगी जब उसकी बच्ची को सम्मान मिलेगा।

उसकी बच्ची के अवशेष इसी तहखाने में कहीं दबे थे।

"हमें उसकी बच्ची को ढूँढना होगा," रामदीन ने कहा।

"और सूरज निकलने से पहले उसका अंतिम संस्कार करना होगा।"

अरमान ने घड़ी देखी।

रात बहुत कम बची थी।

""""एपिसोड 7""""

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