PretikaHaunted Placesदरवाज़े के उस पार , Season 1

एपिसोड 7 — मुक्ति की खोज

firoj saifi · Haunted Places · 2 मिनट

Writer
firoj saifi
Story
दरवाज़े के उस पार , Season 1
Chapter
7 of 8
Category
Haunted Places
Reading time
2 min
Words
245
Language
Hindi (हिंदी)
Price
Free to read

रामदीन ने डायरी में बने पुराने नक्शे को जमीन पर फैलाया।

"तहखाने का पूरब वाला कोना।"

वहीं एक पुराना पीपल का पेड़ था जिसकी जड़ें तहखाने की दीवारों तक फैली हुई थीं।

अरमान और रामदीन ने मिट्टी खोदना शुरू किया।

रीवा माही के पास बैठी रही।

"माँ यहीं है बेटा।"

माही की आँखें अभी भी बंद थीं।

कनक की परछाई उसके पीछे खड़ी थी।

वह चुपचाप उन्हें देख रही थी।

मिट्टी हटाते-हटाते अरमान का हाथ किसी कपड़े से टकराया।

उसने मिट्टी हटाई।

एक छोटी-सी पोटली दिखाई दी।

पुराने फटे कपड़े में लिपटी हुई।

रामदीन के हाथ काँपने लगे।

"यही है..."

उसकी आँखों में आँसू आ गए।

"इतने सालों से... ये बच्ची यहीं दबी थी।"

उन्होंने अवशेषों को बहुत सावधानी से बाहर निकाला।

उसी क्षण तहखाने की हवा अचानक तेज़ हो गई।

दीवारों पर लगी पुरानी चीज़ें हिलने लगीं।

कनक की आवाज़ गूँजी—

"जल्दी करो..."

अरमान और रामदीन बच्ची के अवशेष लेकर हवेली के पीछे बने छोटे मंदिर की तरफ भागे।

रात का आखिरी पहर था।

पंडित को पहले ही बुलाया जा चुका था।

अंतिम संस्कार शुरू हुआ।

मंत्रों की आवाज़ हवेली के भीतर तक गूँजने लगी।

उधर तहखाने में माही अचानक जमीन पर गिर पड़ी।

रीवा दौड़कर उसके पास पहुँची।

"माही!"

कुछ सेकंड तक माही बिल्कुल शांत रही।

फिर उसकी उंगलियाँ हिलीं।

उसने धीरे से आँखें खोलीं।

इस बार उसकी आँखें सामान्य थीं।

उसने अपनी माँ को देखा।

"माँ?"

रीवा ने उसे कसकर गले लगा लिया।

उसकी आँखों से आँसू बहने लगे।

लेकिन तभी रीवा ने पीछे देखा।

तहखाने की सीढ़ियों पर कनक खड़ी थी।

उसकी परछाई पहले से ज्यादा धुंधली हो चुकी थी।

वह माही को देख रही थी।

और पहली बार उसके चेहरे पर गुस्सा नहीं था।

बस एक माँ की थकी हुई बेचैनी थी।

""""एपिसोड 8""""

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