PretikaHaunted Placesदरवाज़े के उस पार , Season 1

एपिसोड 5 — कनक की कहानी

firoj saifi · Haunted Places · 2 मिनट

Writer
firoj saifi
Story
दरवाज़े के उस पार , Season 1
Chapter
5 of 8
Category
Haunted Places
Reading time
2 min
Words
341
Language
Hindi (हिंदी)
Price
Free to read

अगली सुबह अरमान और रीवा शहर गए।

उन्होंने पुराने रिकॉर्ड खंगाले।

काफी खोज के बाद उन्हें परिवार के पुराने वकील के बारे में पता चला।

बूढ़े वकील ने उन्हें देखते ही कहा,

"आप लोग आखिरकार उस हवेली में वापस आ ही गए।"

अरमान ने पूछा,

"आप कनक को जानते थे?"

वकील ने गहरी साँस ली।

"कनक आपके दादा की बहन नहीं थी।"

अरमान चौंक गया।

"तो परिवार ने तस्वीर में उसे क्यों रखा?"

वकील ने जवाब दिया,

"क्योंकि आपके दादा उससे प्रेम करते थे।"

कमरे में खामोशी छा गई।

"जब परिवार को पता चला कि कनक गर्भवती है, उन्होंने उसे परिवार की इज्जत के लिए तहखाने में बंद कर दिया।"

रीवा ने घबराकर पूछा,

"कितने समय के लिए?"

"कई दिन।"

"और खाना?"

वकील की नजरें नीचे झुक गईं।

"एक समय के बाद... कोई उसे खाना देना भूल गया।"

रीवा के हाथ काँपने लगे।

वकील ने आगे कहा,

"जब दरवाज़ा खोला गया, तब तक बहुत देर हो चुकी थी।"

"उसके साथ क्या किया?"

"परिवार ने उसकी मौत छुपाने के लिए उसे दीवार के पीछे चुनवा दिया।"

अरमान कुछ बोल नहीं पाया।

"लेकिन उसकी बच्ची?"

वकील ने उसकी तरफ देखा।

"कनक की बच्ची जन्म के बाद मर गई थी।"

"उसका अंतिम संस्कार?"

वकील ने सिर झुका लिया।

"कभी नहीं हुआ।"

रीवा के चेहरे पर डर उभर आया।

वकील ने धीरे से कहा,

"कनक अपनी बच्ची को ढूँढती है। हर उस लड़की में उसे अपनी बेटी दिखाई देती है जो उस हवेली में आती है।"

अरमान के दिमाग में तुरंत माही का चेहरा आया।

वे दोनों उसी समय हवेली लौट आए।

रीवा सीधे माही के कमरे में गई।

माही खिड़की के पास बैठी थी।

बिल्कुल शांत।

"माँ?"

माही ने धीरे से पलटकर देखा।

"माँ, कनक दीदी बहुत अकेली हैं।"

रीवा की साँस रुक गई।

"तुम उनसे बात करती हो?"

माही ने मुस्कुराकर कहा,

"हाँ।"

"वो क्या चाहती हैं?"

माही ने मासूमियत से जवाब दिया,

"वो मुझे अपना घर दिखाना चाहती हैं।"

रीवा ने उसी पल फैसला कर लिया।

"हम यहाँ से जा रहे हैं।"

लेकिन जैसे ही उन्होंने सामान पैक करना शुरू किया—

हवेली की सारी बत्तियाँ एक साथ बुझ गईं।

अंधेरे में माही की आवाज़ आई।

लेकिन वो माही की आवाज़ नहीं थी।

एक भारी, बूढ़ी औरत की आवाज़ थी।

"मेरी बेटी को मुझसे मत छीनो..."

रीवा ने टॉर्च जलाई।

माही कमरे में नहीं थी।

खिड़की खुली थी।

और फर्श पर छोटे-छोटे गीले पैरों के निशान थे।

जो काले दरवाज़े की तरफ जा रहे थे।

""""एपिसोड 6"""""

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