PretikaHaunted Places“आखिरी दरवाज़ा” — Season 3

Episode 3 — दूसरा चेहरा

firoj saifi · Haunted Places · 2 मिनट

Writer
firoj saifi
Story
“आखिरी दरवाज़ा” — Season 3
Chapter
3 of 8
Category
Haunted Places
Reading time
2 min
Words
275
Language
Hindi (हिंदी)
Price
Free to read

माही अपने पिता पर शक करने लगती है।
वह पूछती है—
“क्या आप ही ने उस चीज़ को बुलाया था?”
अरमान कहता है—
“नहीं।”
माही कहती है—
“फिर मैंने आपको दरवाज़े के अंदर क्यों देखा?”
अरमान के पास कोई जवाब नहीं।
उसी रात देवेंद्र फिर दिखाई देता है।
माही उससे सवाल करती है।
माही: “मेरे पिता सच बोल रहे हैं?”
देवेंद्र: “तुम्हारे पिता ने उसे नहीं बुलाया।”
माही: “तो किसने?”
देवेंद्र जवाब देता है—
“तुम्हारी माँ ने।”
माही हैरान रह जाती है।
देवेंद्र बताता है कि माही की माँ उस शक्ति को बुलाना नहीं चाहती थी।
वह सिर्फ उससे एक सौदा करना चाहती थी।
उसकी इच्छा थी कि माही जीवित रहे, चाहे परिवार की बाकी पीढ़ियों को इसकी कीमत क्यों न चुकानी पड़े।
लेकिन शक्ति ने सौदे को बदल दिया।
उसने कहा—
“बच्ची रहेगी... लेकिन उसकी परछाईं मेरी होगी।”
माही समझ जाती है कि दूसरी माही उसी सौदे का परिणाम है।
देवेंद्र उसे एक पुराना कमरा दिखाता है।
कमरे में कई आईने लगे हैं।
हर आईने में माही का अलग रूप दिखाई देता है।
एक बच्ची।
एक बूढ़ी औरत।
एक डरी हुई लड़की।
और एक ऐसी माही जिसके चेहरे पर कोई भाव नहीं।
देवेंद्र कहता है—
“ये तुम्हारी संभावनाएँ नहीं हैं। ये वो रास्ते हैं जिन पर तुम जा सकती थीं।”
अचानक सारे आईने टूटने लगते हैं।
एक आईने में दूसरी माही दिखाई देती है।
वह कहती है—
“तुम उसे क्यों सुन रही हो?”
देवेंद्र गायब हो जाता है।
दूसरी माही माही से कहती है—
“देवेंद्र ने भी तुमसे झूठ बोला है।”
माही पूछती है—
“क्या झूठ?”
वह कहती है—
“तुम्हें बचाने के लिए कोई अनुष्ठान नहीं हुआ था।”
“तुम्हारे परिवार ने तुम्हें उस शक्ति को देने की कोशिश की थी।”
माही स्तब्ध रह जाती है।
दूसरी माही आगे कहती है—
“लेकिन मैं बीच में आ गई।”
माही पूछती है—
“तुमने मेरी जान क्यों बचाई?”
दूसरी माही पहली बार गंभीर होती है।
“क्योंकि तुम मेरी बहन नहीं हो...”
कुछ पल की खामोशी।
“तुम मैं हो।”
CUT TO BLACK.

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