Pretika › Ghost Stories › नीली हवेली 2.0 — आईने के उस पार
एपिसोड 9 — आख़िरी रात
firoj saifi · Ghost Stories · 3 मिनट
हवेली काँपने लगी।
दीवारों से चीखें आने लगीं।
खिड़कियाँ अपने-आप टूट गईं।
काले दरवाज़े के पीछे से धुआँ बाहर निकलने लगा।
सोमेश्वर फिरोज की ओर बढ़ा।
“तुम्हारे मरते ही मैं फिर जीवित हो जाऊँगा।”
फिरोज पीछे हटते हुए दीवार से जा लगा।
“तुम्हें मेरी ज़रूरत क्यों है?”
“क्योंकि तुम्हारे भीतर दो आत्माएँ हैं,” सोमेश्वर ने कहा। “तुम्हारी और देवयानी की। एक शरीर में दो दरवाज़े। तुम्हारे माध्यम से वह शक्ति स्थायी रूप से इस दुनिया में रह सकेगी।”
तभी नंदिनी उसके सामने आ गई।
दोनों के बीच भयानक संघर्ष शुरू हो गया।
नंदिनी का धुएँ से बना शरीर बार-बार टूटता और फिर जुड़ जाता। सोमेश्वर मंत्र पढ़ते हुए उसके चारों ओर आग की लपटें खड़ी कर रहा था। हर मंत्र के साथ नंदिनी की चीख कमजोर होती जा रही थी।
फिरोज ने देखा कि कमरे के बीच में एक पुरानी तलवार पड़ी है।
उसने तलवार उठाई।
सोमेश्वर ने उसे पकड़ लिया।
“तुम मुझे नहीं मार सकते।”
फिरोज ने कहा—
“मैं नहीं।”
उसने तलवार नंदिनी की ओर बढ़ाई।
“वह मारेगी।”
नंदिनी ने तलवार पकड़ ली।
उसने सोमेश्वर के सीने में तलवार घोंप दी।
एक भयानक चीख पूरे तहखाने में गूँज गई।
सोमेश्वर का शरीर राख में बदलने लगा।
लेकिन जाते-जाते उसने मुस्कुराकर कहा—
“तुमने श्राप तोड़ दिया…”
वह रुका।
“लेकिन एक चीज़ भूल गए।”
फिरोज ने पूछा—
“क्या?”
सोमेश्वर ने काले दरवाज़े की ओर देखा।
“श्राप नंदिनी से शुरू नहीं हुआ था।”
अचानक हवेली की सारी दीवारें गिरने लगीं।
नंदिनी ने फिरोज का हाथ पकड़ा।
“भागो!”
दोनों तहखाने से बाहर भागे।
राघव भी उनके पीछे भाग रहा था, लेकिन मुख्य दरवाज़े तक पहुँचते ही किसी अदृश्य शक्ति ने उसे पीछे खींच लिया।
फिरोज ने उसका हाथ पकड़ने की कोशिश की।
राघव चिल्लाया—
“मुझे छोड़ दो!”
“नहीं!”
राघव ने फिरोज को धक्का दिया।
“अगर तुम रुके तो वह तुम्हें भी ले जाएगी!”
अगले ही पल हवेली की छत गिर गई।
राघव आग और धुएँ के भीतर गायब हो गया।
सुबह तक वहाँ सिर्फ़ राख बची थी।
नंदिनी गायब थी।
फिरोज ने राख के बीच उसे खोजा, लेकिन उसे सिर्फ़ एक जला हुआ चाँदी का पायल मिला।
उसने सोचा—
शायद वह मुक्त हो गई।
लेकिन राख के नीचे एक पत्थर पर नया निशान बना था।
एक आँख।
उसके चारों ओर अब आठ रेखाएँ थीं।
फिरोज ने पायल उठाया।
पायल के भीतर से बहुत धीमी आवाज़ आई—
“भैया…”
वह पीछे हट गया।
राख के नीचे से एक छोटी-सी उँगली बाहर निकली।
फिरोज ने काँपते हुए मिट्टी हटाई।
वहाँ एक बच्ची का चेहरा था।
देवयानी।
उसकी आँखें बंद थीं।
लेकिन उसके होंठ हिल रहे थे।
“तुमने मुझे फिर छोड़ दिया।”
फिरोज चीखते हुए पीछे गिर पड़ा।
अगले ही पल बच्ची का चेहरा राख में बदल गया।
दूर पहाड़ी के नीचे गाँव की घंटियाँ बजने लगीं।
और जली हुई हवेली के मलबे में किसी ने धीरे-धीरे कदम रखा।
नंदिनी।
उसका चेहरा अब आधा इंसानी था और आधा काला।
उसने फिरोज की ओर देखा।
“तुम्हें लगा मैं तुम्हें बचा रही थी?”
फिरोज ने पायल कसकर पकड़ लिया।
“तुमने मुझे इस्तेमाल किया।”
नंदिनी ने उत्तर नहीं दिया।
उसने सिर्फ़ हवेली की राख की ओर देखा।
“मैंने तुम्हें दरवाज़ा बनाया।”
फिर वह धुएँ में बदलकर गायब हो गई।
- Writer
- firoj saifi
- Story
- नीली हवेली 2.0 — आईने के उस पार
- Chapter
- 9 of 15
- Category
- Ghost Stories
- Reading time
- 3 min
- Words
- 519
- Language
- Hindi (हिंदी)
- Price
- Free to read
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